BHAKTI KI SHAKTI
🌙 कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष चतुर्थी ⏳ In 2 Days Vedic Sanatan Guide

Karwa Chauth Vrat

करवा चौथ का पावन व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में अटूट प्रेम व सौहार्द की कामना हेतु किया जाता है। हिंदू धर्म में इसे त्याग, निष्ठा और समर्पण का सर्वोच्च पर्व माना गया है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला (बिना अन्न-जल) व्रत रखती हैं और रात्रि में छलनी से चंद्रमा व पति का दर्शन कर जल ग्रहण करती हैं।

🕉️ Principal Deity: माता करवा, भगवान शिव-पार्वती, श्री गणेश, चंद्र देव
Festival Date (2026) 29 Oct 2026 • Thursday View Day Panchang
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Auspicious Muhurat & Timings for 2026

Calculated as per Vedic Surya Siddhanta and Lahiri Ayanamsha

Main Puja Muhurat

शाम 05:44 से शाम 07:02 तक (अवधि: 1 घंटा 18 मिनट)

Most Auspicious Window
Pradosh Kaal

शाम 05:37 से रात 08:11 तक

Sunset to 2h 24m
Moonrise Time (चंद्रोदय)

रात्रि 08:15 बजे (स्थान अनुसार 8:05 से 8:30 के मध्य)

Check your city moonrise
Sargi Muhurat

प्रातः 04:30 से 05:25 तक (सूर्योदय से पूर्व)

Before Sunrise
Tithi Transition Timing

तिथि विवरण: 29 अक्टूबर 2026, प्रातः 08:14 बजे से • समाप्ति: 30 अक्टूबर 2026, प्रातः 06:45 बजे तक

Shubh Choghadiya:

शुभ चौघड़िया: शाम 05:44 - 07:18 | अमृत: शाम 07:18 - 08:52

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Step-by-Step Schedule & Ritual Timeline (Hour by Hour)

Detailed sequence from morning to night for rituals, puja, and lighting lamps

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सरगी का सेवन व स्नान

प्रातः 04:00 - 05:15 AM

सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। सास द्वारा दी गई सरगी (मिठाई, फल, मेवे, दूध/सेवई) का सेवन करें और पर्याप्त जल पीकर दिनभर के निर्जला व्रत की तैयारी करें।

🙏

संकल्प व पूजा स्थान सज्जा

प्रातः 05:30 - 06:00 AM

हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर अखंड सौभाग्य के निर्जला व्रत का संकल्प लें: "मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादिसुस्थिरश्री प्राप्तये करकचतुर्थीव्रतमहं करिष्ये"। मंदिर में करवा चौथ माता की तस्वीर स्थापित करें।

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सोलह श्रृंगार व मेंहदी

दोपहर 12:00 - 03:00 PM

हाथों-पैरों में सुंदर मेंहदी रचाएं। लाल, सुनहरे या गुलाबी रंग की पारंपरिक साड़ी या लहंगा और सोलह श्रृंगार (सिंदूर, बिंदी, मंगलसूत्र, चूड़ियां, पायल आदि) धारण करें।

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शुभ मुहूर्त में मुख्य करवा चौथ पूजन

शाम 05:44 - 07:02 PM

चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां पार्वती, शिवजी, गणेशजी व करवा माता का चित्र लगाएं। मिट्टी के करवे में जल भरें, ढक्कन में गेहूं व दक्षिणा रखें। धूप-दीप जलाकर करवा चौथ की पौराणिक कथा सुनें और थाली फेरी की रस्म करें।

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सास को बाया भेंट करना

शाम 07:15 - 08:00 PM

पूजा संपन्न होने के बाद पूजा में रखे वस्त्र, फल, मिठाई व करवा अपनी सास या घर की बुजुर्ग सुहागिन महिला को सादर भेंट कर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

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चंद्रोदय दर्शन, अर्घ्य व पारण

रात 08:15 PM के बाद

चंद्रमा के उदय होते ही पूजा की थाली, जल भरा लोटा, धूप-दीप और छलनी लेकर छत/आंगन में जाएं। पहले छलनी से चंद्रमा को देखें, फिर दीपक की रोशनी में पति का चेहरा देखें। चंद्रमा को जल से अर्घ्य दें। पति के हाथों से पहला घूंट जल व मिठाई खाकर व्रत पूर्ण करें।

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Why is this Festival Celebrated?

करवा चौथ का पावन व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में अटूट प्रेम व सौहार्द की कामना हेतु किया जाता है। हिंदू धर्म में इसे त्याग, निष्ठा और समर्पण का सर्वोच्च पर्व माना गया है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला (बिना अन्न-जल) व्रत रखती हैं और रात्रि में छलनी से चंद्रमा व पति का दर्शन कर जल ग्रहण करती हैं।

Significance rooted in Sanatan Dharma
🪷

Pauranik Beliefs & Cultural Traditions

पौराणिक मान्यता के अनुसार, करवा चौथ का व्रत सबसे पहले देवी पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने और उनकी अमरता के लिए किया था। महाभारत काल में द्रौपदी ने भी पांडवों के संकट निवारण और विजय के लिए भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर यह व्रत किया था। मिट्टी के नए करवे में जल भरकर पूजन किया जाता है, जो जल तत्व और जीवन की पूर्णता का प्रतीक है। छलनी से देखने का रहस्य यह है कि चंद्रमा के सौम्य प्रकाश और पति के रूप को छानकर केवल पवित्र प्रेम व सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण किया जाए।

Preserved through millennia of tradition
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Complete Sacred Mythological Story (Vrat Katha)

Authentic narration from Sacred Puranas and Epics

करवा चौथ की सबसे प्रचलित कथा रानी वीरवती की है। सात भाइयों की इकलौती लाडली बहन वीरवती का विवाह एक राजा से हुआ था। करवा चौथ के दिन उसने निर्जला व्रत रखा। भूख और प्यास से व्याकुल बहन की दशा भाइयों से देखी नहीं गई। उन्होंने एक ऊंचे वटवृक्ष की ओट में दीपक जलाकर छलनी रख दी और बहन से कहा कि देखो चंद्रमा निकल आया है। वीरवती ने भ्रमवश दीपक को अर्घ्य देकर जैसे ही पहला निवाला खाया, उसमें बाल निकला, दूसरे में छींक आई और तीसरे में पति के आकस्मिक निधन का दुखद समाचार मिला।

शोक में डूबी वीरवती ने पति के शव को सुरक्षित रखा और पूरे वर्ष नियमपूर्वक चतुर्थी का व्रत किया। अगले वर्ष करवा चौथ पर देवी इंद्राणी (शची) के कहे अनुसार उसने सच्चे हृदय से निर्जला व्रत रखकर विधिवत पूजा की। उसके तप और पश्चाताप से प्रसन्न होकर देवी पार्वती व भगवान शिव ने उसके मृत पति को जीवनदान दिया। इसके अलावा माता करवा की कथा भी प्रसिद्ध है, जिन्होंने अपने तपोबल से एक मगरमच्छ को कच्चे धागे से बांधकर यमराज को अपने पति के प्राण लौटाने पर विवश कर दिया था।

📖 Reciting or listening to this Katha during puja yields multifold blessings.
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How and Where is it Celebrated? (India & Worldwide)

Regional customs across Indian states and global celebrations by Indian diaspora

🇮🇳 Across Indian States & Regions

पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश व बिहार में अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। पंजाब में सरगी (सास द्वारा दी जाने वाली मिठाई व फल) और बाया की परंपरा प्रमुख है। राजस्थान में महिलाएं पारंपरिक चुनरी और लहरिया पहनकर लोकगीत गाती हैं।

🌐 Celebrations Across the Globe (NRI & Diaspora)

संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), ब्रिटेन (UK), कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर और केन्या में भारतीय प्रवासी समुदाय सामूहिक करवा चौथ पूजा आयोजित करते हैं। मंदिरों व सामुदायिक केंद्रों में सैकड़ों महिलाएं एक साथ बैठकर थाली बंटाने (फेरी लगाने) की रस्म निभाती हैं।

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Puja Samagri Checklist

Tick off items as you prepare for the ritual

11 Items
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Sacred Mantras & Invocations

देवी पार्वती मंत्र: "ॐ शिवायै नमः, ॐ उमायै नमः"
भगवान शिव मंत्र: "ॐ नमः शिवाय"
गणेश जी मंत्र: "ॐ गं गणपतये नमः"
चंद्र अर्घ्य मंत्र: "क्षीरोदार्णवसंभूत अत्रिनेत्रसमुद्भव। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं रोहिण्यासहितो मम॥"
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Rules: Dos and Don'ts

What to Do (अवश्य करें)
  • ✓ लाल, गुलाबी, पीले या नारंगी रंग के शुभ वस्त्र पहनें
  • ✓ पूरे दिन मन शांत रखें और ईश्वर का स्मरण करें
  • ✓ बड़ों का आदरपूर्वक चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें
What to Avoid (कदापि न करें)
  • ✗ काले, सफेद या नीले रंग के वस्त्र न पहनें
  • ✗ धारदार वस्तु जैसे कैंची, सुई आदि का उपयोग न करें
  • ✗ किसी के प्रति कटु वचन या विवाद से बचें
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Upcoming Dates for Karwa Chauth Vrat (2026–2030)

Accurate advance calendar for devotees, families and diaspora planning

Year Date Day Tithi Action
2026 29 October 2026 Thursday कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष चतुर्थी Panchang
2027 18 October 2027 Monday कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष चतुर्थी Panchang
2028 05 November 2028 Sunday कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष चतुर्थी Panchang
2029 26 October 2029 Friday कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष चतुर्थी Panchang
2030 15 October 2030 Tuesday कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष चतुर्थी Panchang

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