दीपावली (श्री महालक्ष्मी व गणेश पूजन)
दीपावली सनातन धर्म का सबसे भव्य व प्रकाशमय महापर्व है। यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, और बुराई पर अच्छाई की शाश्वत विजय का प्रतीक है। कार्तिक अमावस्या की गहनतम रात्रि को करोड़ों दीपकों की आभा से आलोकित किया जाता है। इस दिन धन-धान्य, ऐश्वर्य व सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी और ज्ञान व बुद्धि प्रदाता भगवान श्री गणेश का गृह-गृह में स्वागत व षोडशोपचार पूजन किया जाता है।
इस साल का शुभ मुहूर्त एवं समय (2026)
वैदिक सूर्य सिद्धांत व पंचांग गणना अनुसार प्रमाणित
शाम 05:42 से रात 07:38 तक (अवधि: 1 घंटा 56 मिनट)
अति शुभ व श्रेष्ठ समयशाम 05:32 से रात 08:08 तक (गृहस्थ पूजन हेतु सर्वोत्तम)
गृहस्थ पूजन हेतु उत्तमशाम 05:42 से शाम 07:38 तक (स्थिर लग्न - धन आगमन व स्थिरता)
स्थायी धन आगमन हेतु श्रेष्ठरात 11:39 से मध्यरात्रि 12:32 तक (श्री सूक्त पाठ व तंत्र साधना)
श्री सूक्त पाठ व मंत्र साधनातिथि विवरण: 08 नवंबर 2026, दोपहर 12:44 बजे से • समाप्ति: 09 नवंबर 2026, प्रातः 10:35 बजे तक
शुभ: शाम 05:32 - 07:11 | अमृत: शाम 07:11 - 08:50 | लाभ: रात 01:46 - 03:24
कब-कब क्या करना है? संपूर्ण समय-सारणी व पूजा विधि
प्रातः काल स्नान से लेकर मुख्य पूजा, दीप प्रज्वलन व रात्रि अनुष्ठान तक की सटीक समय सारणी
उबटन स्नान, घर शुद्धि व तोरण
प्रातः 06:00 - 08:30 AMब्रह्म मुहूर्त या प्रातःकाल तेल/उबटन लगाकर स्नान करें। संपूर्ण घर, दुकान व कार्यालय की गंगाजल से शुद्धि करें। मुख्य द्वार पर आम या अशोक के ताजे पत्तों का वंदनवार (तोरण) लगाएं और कुमकुम से शुभ-लाभ व स्वस्तिक अंकित करें।
रंगोली निर्माण व बहीखाता पूजन
प्रातः 09:00 - 11:30 AMद्वार पर सिंदूर, चावल के आटे व फूलों से भव्य रंगोली बनाएं। व्यापारी वर्ग अपनी नई बही-खाता, तिजोरी, तराजू और कलम-दवात की पूजा करें।
पूजा मंडप व नैवेद्य सज्जा
दोपहर 12:00 - 03:00 PMईशान कोण या उत्तर दिशा में चौकी स्थापित करें। लाल रेशमी वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी व गणेश जी की सुंदर प्रतिमाएं रखें। खील, बताशे, पंचमेवा, कमल गट्टे, मोदक, फल व मिष्ठान्न की थाल सजाएं।
यम दीपदान व देहली पूजन
शाम 05:30 - 06:15 PMसूर्यास्त के ठीक बाद घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके चार बत्तियों वाला चौमुखा सरसों तेल का दीपक यमराज के निमित्त प्रज्वलित करें, जिससे अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो।
स्थिर लग्न में मुख्य महालक्ष्मी-गणेश पूजन
शाम 05:42 - 07:38 PMप्रदोष काल व वृषभ स्थिर लग्न में गणेश-अंबिका, कलश स्थापना, नवग्रह और महालक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन करें। अक्षत, कुमकुम, कमल पुष्प, इत्र, धूप, दीप व खील-बताशे अर्पित करें। श्री सूक्त, कनकधारा व लक्ष्मी चालीसा का सस्वर पाठ करें।
दीपोत्सव - समस्त घर में दीप प्रज्वलन
शाम 07:45 - 09:30 PMलक्ष्मी पूजा के मुख्य दीपक से बाकी 11, 21, 51 या 101 मिट्टी के दीपकों को प्रज्वलित करें। सबसे पहला दीपक पूजा स्थल, दूसरा तुलसी चौरा, तीसरा मुख्य द्वार, चौथा रसोई, और बाकी दीपक छत, मुंडेरों और तिजोरी के पास सजाएं।
महानिशीथ काल साधना व कुबेर ध्यान
रात 11:39 - 12:32 AMतांत्रिक व साधक वर्ग इस समय कनकधारा स्तोत्र, लक्ष्मी सूक्त और "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः" मंत्र का 108 या 1008 बार कमल गट्टे की माला से जप करें। व्यापार वृद्धि यंत्र स्थापित करें।
अखंड दीप व सुख-समृद्धि मंगल प्रार्थना
मध्यरात्रि 12:30 AM के बादघर में रातभर अखंड दीपक जलता रहे इसकी व्यवस्था करें। परिवार संग महाआरती करें, प्रसाद वितरण करें और सभी बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
यह पर्व या व्रत क्यों मनाया जाता है?
दीपावली सनातन धर्म का सबसे भव्य व प्रकाशमय महापर्व है। यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, और बुराई पर अच्छाई की शाश्वत विजय का प्रतीक है। कार्तिक अमावस्या की गहनतम रात्रि को करोड़ों दीपकों की आभा से आलोकित किया जाता है। इस दिन धन-धान्य, ऐश्वर्य व सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी और ज्ञान व बुद्धि प्रदाता भगवान श्री गणेश का गृह-गृह में स्वागत व षोडशोपचार पूजन किया जाता है।
धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं
पौराणिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक अमावस्या के दिन ही समुद्र मंथन से अमृत कलश और 14 रत्नों के साथ जगन्माता महालक्ष्मी प्रकट हुई थीं और उन्होंने भगवान श्री नारायण (विष्णु जी) का वरण किया था। इसी पावन तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम 14 वर्ष के वनवास के पश्चात लंकापति रावण का संहार कर माता सीता और लक्ष्मण सहित अयोध्या पधारे थे। अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में संपूर्ण नगर को शुद्ध घी के दीपकों से जगमगा दिया था। इसी दिन पांडव भी अपने 12 वर्ष के अज्ञातवास से वापस लौटे थे। दीपावली पर घर की शुद्धि व रंगोली बनाई जाती है ताकि माता लक्ष्मी का स्थायी वास हो।
संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा एवं प्रसंग
पुराणों व सनातन धर्मग्रंथों में वर्णित प्रामाणिक कथा
समुद्र मंथन कथा: जब देवराज इंद्र के प्रमाद से देवलोक श्रीहीन हो गया, तब भगवान विष्णु की आज्ञा से देवताओं और दानवों ने मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकि नाग को नेती बनाकर क्षीरसागर का मंथन किया। मंथन से हलाहल विष के बाद कामधेनु, उच्चैःश्रवा, ऐरावत और अंत में कार्तिक अमावस्या के दिन दिव्य कमल पर विराजमान होकर स्वयं भगवती महालक्ष्मी प्रकट हुईं। समस्त देवों और गंधर्वों ने मां लक्ष्मी की स्तुति की और मां ने भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर वैजयंती माला अर्पित की।
एक अन्य प्रसिद्ध लोककथा एक निर्धन ब्राह्मण और उसकी तपस्वी पत्नी की है। दरिद्रता से पीड़ित ब्राह्मण दंपती ने कार्तिक अमावस्या पर विधिवत दीप प्रज्वलित कर माता लक्ष्मी की निष्काम आराधना की। उनकी निश्छल भक्ति से प्रसन्न होकर मां लक्ष्मी ने स्वयं पधारकर उनके घर का सारा दारिद्र्य दूर किया और उन्हें अनंत धन, विद्या व आरोग्यता का वरदान दिया।
कहाँ-कहाँ देश व विदेश में कैसे मनाया जाता है?
भारत के विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय परंपराएं एवं विदेशों में भारतीय समुदाय का उत्सव
भारत के हर कोने में अनोखी उमंग के साथ मनाई जाती है। उत्तर भारत व दिल्ली-यूपी में लक्ष्मी-गणेश पूजन व आतिशबाजी होती है। पश्चिम बंगाल व असम में इस रात मां काली की तांत्रिक महापूजा (काली पूजा) होती है। गुजरात में दीपावली वर्ष का अंतिम दिन होता है और अगले दिन नूतन वर्ष (बेस्टु वरस) मनाया जाता है। महाराष्ट्र में वसुबारस से लेकर भाईदूज तक 5 दिन का दीपोत्सव होता है। दक्षिण भारत में नरक चतुर्दशी के दिन तेल स्नान (दीपम) कर दिवाली मनाई जाती है।
नेपाल (तिहार पर्व), मॉरीशस (राष्ट्रीय अवकाश), त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना, सूरीनाम, फिजी, सिंगापुर (लिटिल इंडिया रोशनी), मलेशिया, यूके (लीसेस्टर और लंदन में विश्व का सबसे बड़ा दिवाली मेला), अमेरिका (व्हाइट हाउस व टाइम्स स्क्वायर पर दीपोत्सव) और संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय समुदाय इसे भव्य रूप से मनाता है।
पूजा सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
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विशेष मंत्र, स्तोत्र व जप
पूजा व व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें
- ✓ घर का कोना-कोना स्वच्छ रखें, क्योंकि मां लक्ष्मी केवल स्वच्छता में वास करती हैं
- ✓ मुख्य द्वार पर अखंड प्रकाश रखें और रंगोली बनाएं
- ✓ दीपावली की रात घर को सूना या ताला बंद न छोड़ें
- ✗ माता लक्ष्मी की खड़ी प्रतिमा की पूजा न करें, हमेशा बैठी हुई मुद्रा की पूजा करें
- ✗ घर में टूटे-फूटे बर्तन, खंडित कांच या खराब बिजली का सामान न रखें
- ✗ दीपावली की रात जुआ खेलने, मदिरापान या क्रोध करने से महालक्ष्मी रुष्ट होती हैं
दीपावली (श्री महालक्ष्मी व गणेश पूजन) की आगामी तिथियां (2026 से 2030)
भक्तों व परिवारों की अग्रिम योजना हेतु 5-वर्षीय पंचांग सारणी
| वर्ष | दिनांक (Date) | वार (Day) | तिथि | पंचांग |
|---|---|---|---|---|
| 2026 | 08 November 2026 | रविवार | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अमावस्या | पंचांग |
| 2027 | 29 October 2027 | शुक्रवार | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अमावस्या | पंचांग |
| 2028 | 17 October 2028 | मंगलवार | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अमावस्या | पंचांग |
| 2029 | 05 November 2029 | सोमवार | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अमावस्या | पंचांग |
| 2030 | 26 October 2030 | शनिवार | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अमावस्या | पंचांग |
🪔 अन्य प्रमुख हिंदू व्रत एवं त्योहार
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