भाई दूज / यम द्वितीया (भ्रातृ द्वितीया)
भाई दूज भाई-बहन के पवित्र स्नेह, अटूट विश्वास और परस्पर रक्षा का पावन पर्व है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर शुभ तिलक लगाती हैं, आरती उतारती हैं और उनकी लंबी आयु व सफलता की कामना करती हैं। भाई भी बहनों को उपहार और आजीवन रक्षा का वचन देते हैं। इस दिन यमुना नदी में स्नान करने और बहन के हाथ से बना भोजन करने से यमराज का भय समाप्त हो जाता है।
इस साल का शुभ मुहूर्त एवं समय (2026)
वैदिक सूर्य सिद्धांत व पंचांग गणना अनुसार प्रमाणित
दोपहर 01:14 से 03:25 तक (अवधि: 2 घंटे 11 मिनट)
अति शुभ व श्रेष्ठ समयतिथि विवरण: 10 नवंबर 2026, प्रातः 08:15 बजे से • समाप्ति: 11 नवंबर 2026, प्रातः 06:10 बजे तक
लाभ: प्रातः 10:47 - 12:09 | अमृत: दोपहर 12:09 - 01:31
कब-कब क्या करना है? संपूर्ण समय-सारणी व पूजा विधि
प्रातः काल स्नान से लेकर मुख्य पूजा, दीप प्रज्वलन व रात्रि अनुष्ठान तक की सटीक समय सारणी
स्नान व पकवान तैयारी
प्रातः 08:00 - 10:00 AMबहनें स्नान कर भाई के स्वागत हेतु सात्विक भोजन, खीर व मिष्ठान्न बनाएं।
शुभ मुहूर्त में तिलक अनुष्ठान
दोपहर 01:14 - 03:25 PMभाई को पूर्व या उत्तर दिशा में पाटे (चौकी) पर बैठाएं। सिर पर रुमाल रखें। अनामिका अंगुली से कुमकुम, अक्षत और चंदन का तिलक लगाएं। कलावा बांधें और कद्दू के फूल/सूखा गोला (नारियल) भेंट करें।
आरती, भोजन व उपहार आदान-प्रदान
दोपहर 03:30 PM के बादकपूर या घी के दीपक से भाई की आरती उतारें। बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराए। भाई बहन के पैर छूकर आशीर्वाद ले और प्रेमस्वरूप उपहार भेंट करे।
यह पर्व या व्रत क्यों मनाया जाता है?
भाई दूज भाई-बहन के पवित्र स्नेह, अटूट विश्वास और परस्पर रक्षा का पावन पर्व है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर शुभ तिलक लगाती हैं, आरती उतारती हैं और उनकी लंबी आयु व सफलता की कामना करती हैं। भाई भी बहनों को उपहार और आजीवन रक्षा का वचन देते हैं। इस दिन यमुना नदी में स्नान करने और बहन के हाथ से बना भोजन करने से यमराज का भय समाप्त हो जाता है।
धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं
मान्यता है कि यम द्वितीया के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे, जहां यमुना ने उनका भव्य सत्कार कर तिलक लगाया और स्वादिष्ट भोजन कराया। यमराज ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि जो भाई आज के दिन अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथ का भोजन करेगा और तिलक लगवाएगा, उसे अकाल मृत्यु और यमलोक की यातना नहीं होगी।
संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा एवं प्रसंग
पुराणों व सनातन धर्मग्रंथों में वर्णित प्रामाणिक कथा
सूर्यपुत्र यमराज और उनकी बहन यमुना में अगाध स्नेह था। यमुना बार-बार यमराज को अपने घर भोजन के लिए बुलाती थीं, परंतु व्यस्तता के कारण यमराज नहीं जा पाते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अचानक यमुना के घर पहुंचे। बहन के हर्ष का ठिकाना न रहा। उसने स्नान कराकर भाई का तिलक किया और 56 भोग खिलाए। यमराज ने प्रसन्न होकर वर मांगने को कहा।
यमुना ने कहा, "हे भ्राता! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो वरदान दीजिए कि जो भी भाई आज के दिन अपनी बहन के घर भोजन करेगा, उसे आपका भय न रहे और जो बहन-भाई यमुना में स्नान करेंगे, उन्हें मोक्ष मिले।" यमराज ने तथास्तु कहकर वरदान दिया। एक अन्य प्रसंग में नरकासुर वध के बाद भगवान श्री कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के घर पहुंचे थे, जहां सुभद्रा ने आरती उतारकर उनका स्वागत किया था।
कहाँ-कहाँ देश व विदेश में कैसे मनाया जाता है?
भारत के विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय परंपराएं एवं विदेशों में भारतीय समुदाय का उत्सव
उत्तर भारत में भाई दूज, बंगाल में "भाई फोटा", महाराष्ट्र व गोवा में "भाऊ बीज", और गुजरात में "भाई बीज" के नाम से मनाया जाता है। मथुरा के विश्राम घाट पर भाई-बहन का यमुना स्नान विश्व प्रसिद्ध है।
नेपाल में इसे "भाई टीका" कहते हैं, जहां यह 5 दिवसीय तिहार का सबसे बड़ा दिन होता है और 7 रंगों का तिलक लगाया जाता है। विदेशों में भारतीय समुदाय इसे बड़े उत्साह से मनाता है।
पूजा सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
पूजा की तैयारी करते समय वस्तुओं पर टिक करें
विशेष मंत्र, स्तोत्र व जप
पूजा व व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें
- ✓ तिलक के समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा में हो
- ✓ भाई बहन के हाथ का बना भोजन ही करे
- ✓ सूखा गोला अवश्य भेंट करें
- ✗ राहुकाल में तिलक न करें
- ✗ इस दिन भाई-बहन किसी विवाद या कटुता में न पड़ें
भाई दूज / यम द्वितीया (भ्रातृ द्वितीया) की आगामी तिथियां (2026 से 2030)
भक्तों व परिवारों की अग्रिम योजना हेतु 5-वर्षीय पंचांग सारणी
| वर्ष | दिनांक (Date) | वार (Day) | तिथि | पंचांग |
|---|---|---|---|---|
| 2026 | 10 November 2026 | मंगलवार | कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष द्वितीया | पंचांग |
| 2027 | 31 October 2027 | रविवार | कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष द्वितीया | पंचांग |
| 2028 | 19 October 2028 | गुरुवार | कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष द्वितीया | पंचांग |
| 2029 | 07 November 2029 | बुधवार | कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष द्वितीया | पंचांग |
| 2030 | 28 October 2030 | सोमवार | कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष द्वितीया | पंचांग |
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