धनतेरस / धन्वंतरि त्रयोदशी जयंती
धनतेरस दीपावली महापर्व का प्रथम दिन है। इसे धनत्रयोदशी और राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन देवताओं के परम चिकित्सक और आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए यह पर्व केवल धन-संपत्ति का ही नहीं, बल्कि मनुष्य के सबसे बड़े धन — उत्तम स्वास्थ्य और आरोग्य का उत्सव है। इस दिन सोने, चांदी, पीतल के बर्तन, वाहन, झाड़ू और धनिया खरीदने की अत्यंत मंगलकारी परंपरा है।
इस साल का शुभ मुहूर्त एवं समय (2026)
वैदिक सूर्य सिद्धांत व पंचांग गणना अनुसार प्रमाणित
शाम 05:43 से रात 08:04 तक (प्रदोष काल)
अति शुभ व श्रेष्ठ समयशाम 05:33 से रात 08:09 तक
गृहस्थ पूजन हेतु उत्तमतिथि विवरण: 06 नवंबर 2026, शाम 04:12 बजे से • समाप्ति: 07 नवंबर 2026, दोपहर 02:28 बजे तक
चर: शाम 05:33 - 07:12 | लाभ: रात 08:51 - 10:30
कब-कब क्या करना है? संपूर्ण समय-सारणी व पूजा विधि
प्रातः काल स्नान से लेकर मुख्य पूजा, दीप प्रज्वलन व रात्रि अनुष्ठान तक की सटीक समय सारणी
शुभ चौघड़िया में खरीदारी
प्रातः 07:00 - 11:00 AMशुभ मुहूर्त में बाजार जाकर सोना, चांदी, पीतल के बर्तन, धार्मिक मूर्तियां या नई झाड़ू खरीदें। बर्तनों को घर में कभी खाली न लाएं, उसमें थोड़ा जल या मीठा रखें।
तिजोरी व व्यापार स्थल शुद्धि
दोपहर 02:00 - 04:30 PMदुकान व तिजोरी की सफाई करें, कुमकुम से ॐ व स्वस्तिक बनाएं और नई तिजोरी/गल्ले में कौड़ी व गोमती चक्र स्थापित करें।
दक्षिण मुखी यम दीपदान
शाम 05:43 - 07:05 PMगेहूं के आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक लें। उसमें सरसों का तेल व चार बत्तियां रखें। घर के मुख्य द्वार पर अन्न की ढेरी पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यम दीप प्रज्वलित करें।
भगवान धन्वंतरि व कुबेर पूजन
शाम 07:05 - 08:30 PMधन्वंतरि देव, कुबेर देव व माता लक्ष्मी का पंचोपचार/षोडशोपचार पूजन करें। तुलसी दल, औषधि, साबुत धनिया व गुड़ का भोग लगाएं।
आरती व धनिया प्रसाद वितरण
रात 09:00 PMधन्वंतरि अमृत आरती गाएं। पूजा में अर्पित साबुत धनिए को तिजोरी में रखें और कुछ धनिए को गमले में बोएं, जिससे वर्षभर समृद्धि खिली रहे।
यह पर्व या व्रत क्यों मनाया जाता है?
धनतेरस दीपावली महापर्व का प्रथम दिन है। इसे धनत्रयोदशी और राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन देवताओं के परम चिकित्सक और आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए यह पर्व केवल धन-संपत्ति का ही नहीं, बल्कि मनुष्य के सबसे बड़े धन — उत्तम स्वास्थ्य और आरोग्य का उत्सव है। इस दिन सोने, चांदी, पीतल के बर्तन, वाहन, झाड़ू और धनिया खरीदने की अत्यंत मंगलकारी परंपरा है।
धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं
मान्यता है कि धनतेरस के दिन जो भी वस्तु (सोना, चांदी, पीतल, तांबा) खरीदी जाती है, उसमें तेरह गुना वृद्धि होती है। घर की दरिद्रता दूर करने के लिए इस दिन नई झाड़ू और साबुत धनिया खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सायंकाल घर के बाहर यमराज के निमित्त चौमुखा यम दीपक जलाने से परिवार के सभी सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।
संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा एवं प्रसंग
पुराणों व सनातन धर्मग्रंथों में वर्णित प्रामाणिक कथा
यम दीपदान कथा: प्राचीन काल में राजा हेम के एक पुत्र हुआ। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि विवाह के ठीक चौथे दिन सर्पदंश से राजकुमार की मृत्यु हो जाएगी। राजकुमार का विवाह हुआ। जब चौथा दिन आया, तो उसकी चतुर पत्नी ने पति को सोने नहीं दिया। उसने शयनकक्ष के द्वार पर सोने, चांदी के आभूषण और सिक्कों का एक विशाल ढेर लगा दिया और पूरे महल को दीपकों से जगमगा दिया। जब यमराज सर्प का रूप धारण कर आए, तो दीपों और हीरों-जवाहरात की चकाचौंध से उनकी आंखें चौंधिया गईं। वे सोने के ढेर पर बैठकर रातभर राजकुमार की पत्नी द्वारा गाए जा रहे मधुर भजनों और कथाओं को सुनते रहे। सुबह होते ही मृत्यु का समय बीत गया और राजकुमार के प्राण बच गए। तभी से धनतेरस पर दीपदान की परंपरा शुरू हुई।
कहाँ-कहाँ देश व विदेश में कैसे मनाया जाता है?
भारत के विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय परंपराएं एवं विदेशों में भारतीय समुदाय का उत्सव
पूरे भारत में बाजार देर रात तक खुले रहते हैं। सर्राफा बाजार, बर्तन बाजार व ऑटोमोबाइल शोरूम में भारी भीड़ रहती है। उत्तर भारत में पीतल के बर्तन व झाड़ू खरीदी जाती है। दक्षिण भारत में इसे धन्वंतरि त्रयोदशी के रूप में मनाते हैं और औषधीय काढ़ा प्रसाद के रूप में लिया जाता है।
नेपाल, मॉरीशस, यूके, यूएसए, कनाडा, यूएई में भारतीय ज्वैलरी स्टोर्स पर विशेष धनतेरस मेला लगता है और प्रवासी भारतीय स्वर्ण व रजत सिक्कों की खरीदारी करते हैं।
पूजा सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
पूजा की तैयारी करते समय वस्तुओं पर टिक करें
विशेष मंत्र, स्तोत्र व जप
पूजा व व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें
- ✓ पीतल, तांबा, सोना, चांदी या झाड़ू खरीदें
- ✓ यम दीपदान अवश्य करें
- ✓ घर में स्वच्छता व सात्विकता बनाए रखें
- ✗ कांच, एल्युमिनियम या लोहे का सामान न खरीदें
- ✗ खरीदे गए बर्तन को घर में खाली न लाएं
- ✗ किसी को इस दिन उधार या कर्ज न दें
धनतेरस / धन्वंतरि त्रयोदशी जयंती की आगामी तिथियां (2026 से 2030)
भक्तों व परिवारों की अग्रिम योजना हेतु 5-वर्षीय पंचांग सारणी
| वर्ष | दिनांक (Date) | वार (Day) | तिथि | पंचांग |
|---|---|---|---|---|
| 2026 | 06 November 2026 | शुक्रवार | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | पंचांग |
| 2027 | 27 October 2027 | बुधवार | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | पंचांग |
| 2028 | 15 October 2028 | रविवार | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | पंचांग |
| 2029 | 03 November 2029 | शनिवार | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | पंचांग |
| 2030 | 24 October 2030 | गुरुवार | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | पंचांग |
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