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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मां महालक्ष्मी (श्री देवी)

ऋग्वैदिक श्री सूक्तम

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्... ऋग्वेद का यह पावन श्री सूक्तम देवी लक्ष्मी का आदि वैदिक स्तोत्र है। इसके पाठ और हवन से दरिद्रता, भूख, ऋण और अभाव का समूल विनाश होता है।

रचयिता वैदिक महर्षि (आनन्द, कर्दम, श्री व चिक्लीत)
स्रोत / ग्रन्थ ऋग्वेद खिल सूक्त (परिशिष्ट)
शुभ दिन / तिथि शुक्रवार, धनतेरस, दीपावली, पूर्णिमा
जप माला कमलगट्टे की माला - 1, 3 अथवा 16 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥१॥
हिंदी भावार्थ: हे सर्वज्ञ अग्निदेव (जातवेदा)! सुवर्ण के समान कांति वाली, हरिणी (मृग) के समान चंचल, स्वर्ण और रजत की माला धारण करने वाली, चंद्रमा के समान आल्हादकारी, हिरण्मयी लक्ष्मी देवी का मेरे लिए आह्वान कीजिए।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥२॥
हिंदी भावार्थ: हे अग्निदेव! उन कभी न जाने वाली (स्थिर) लक्ष्मी जी को मेरे लिए बुलाइए, जिनके निवास करने पर मैं सुवर्ण, गौएं, अश्व और उत्तम सेवकों को प्राप्त करूँ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् । श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ॥३॥
हिंदी भावार्थ: जिनके आगे घोड़े दौड़ते हैं, जो रथ के मध्य में विराजमान हैं, हाथियों के चिंघाड़ से जो जाग्रत होती हैं, उन ऐश्वर्यदायिनी श्री देवी का मैं आह्वान करता हूँ; वे परमेश्वरी मुझ पर प्रसन्न हों।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ सात पीढ़ियों की दरिद्रता और आर्थिक तंगी का स्थायी शमन
  • ✓ व्यापार में अपार उन्नति, धन के अटके स्रोतों का खुलना
  • ✓ अलक्ष्मी (दुर्भाग्य, कलह, रोग) का घर से निष्कासन
  • ✓ घर में स्थिर, सात्विक और अखंड ऐश्वर्य का वास
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व वस्त्र
संध्या समय या प्रातः काल स्नान कर गुलाबी, लाल या पीले स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
दिशा व दीप
उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करें। शुद्ध गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें।
3
लक्ष्मी व कुबेर पूजन
कमलगट्टा, अक्षत, रोली, गुलाब के पुष्प और खीर या बताशे का नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में कमलगट्टा या अक्षत लेकर दारिद्र्य नाश व स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति का संकल्प कर पाठ करें।
5
आरती व समर्पण
पाठ उपरांत महालक्ष्मी की आरती करें और कमलगट्टे को अपनी तिजोरी में रखें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऋग्वैदिक श्री सूक्तम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▼

प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कमलगट्टे की माला - 1, 3 अथवा 16 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।

इस स्तोत्र पाठ के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।