BHAKTI KI SHAKTI
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🪷 माँ महालक्ष्मी ⏰ दीपावली, शुक्रवार, धनतेरस, शरद पूर्णिमा, संध्या काल

श्री लक्ष्मी जी की आरती (ॐ जय लक्ष्मी माता)

धन-धान्य, ऐश्वर्य, आर्थिक स्थिरता, व्यापार वृद्धि और दरिद्रता निवारण हेतु।

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॥ मुख्य टेक / मुखड़ा ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

॥ संपूर्ण आरती कड़ियां ॥
1

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

2

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

3

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भव-निधि की त्राता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

4

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहिं घबराता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

5

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

6

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहिं पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

7

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गावे। उर आनन्द समावे, पाप उतर जावे॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

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आरती करने की शास्त्रोक्त विधि

शुक्रवार की शाम शुद्ध घी का नौमुखी या पंचमुखी दीपक जलाएं। कमलगट्टा, मखाने, खीर और बताशे का भोग लगाएं। आरती को दक्षिणावर्त घुमाएं।

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आरती के चमत्कारी लाभ

आर्थिक तंगी व कर्ज से मुक्ति मिलती है। घर में धन का स्थायित्व और बरकत बनी रहती है। पारिवारिक कलह समाप्त होकर सुख-समृद्धि आती है।

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