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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भूमिपुत्र मंगल देव

मंगला गौरी स्तोत्रं

मंगला गौरी स्तोत्रं सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। ब्रह्मांड पुराण / स्कंद पुराण में वर्णित यह स्तुति भूमिपुत्र मंगल देव के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता महर्षि वेदव्यास
स्रोत / ग्रन्थ ब्रह्मांड पुराण / स्कंद पुराण
शुभ दिन / तिथि मंगलवार, अंगारक चतुर्थी
जप माला लाल मूंगा या रुद्राक्ष माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके । शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले । सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते । पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम् ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले । संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम् ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः । प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम् । वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने-दिने ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
मामरक्ष रक्ष-रक्ष ॐ मंगल मंगले । ॥ इति मंगला गौरी स्तोत्र सम्पूर्णं ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
om raksh-raksh jaganmate devi mangal chandike । harike vipadarrashe harshamangal karike ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
harshamangal dakshe ch harshamangal dayike । shubhemangal dakshe ch shubhemangal chandike ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
mangale manglarhe ch sarvamangal mangale । sata mangal de devi sarvesham manglalaye ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
pujye mangalvare ch manglabhisht devate । pujye mangal bhupasya manuvanshasya santatam ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
mangla dhishthat devi manglanch mangale । sansar mangladhare pare ch sarvakarmanam ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
devyasch mangalanstotram yah shrunoti samahitah । prati mangalvare ch pujye mangal sukh-prade ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
tanmangalam bhavetasya na bhaventad-mangalam । vardhate putra-pautrasch mangalanch dine-dine ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
maamaraksh raksh-raksh om mangal mangale । ॥ iti mangla gauri stotra sampurnam ॥
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16 ॥ श्री ॥
मंगला गौरी स्तोत्र विशेषताए: मंगला गौरी स्तोत्र के साथ-साथ यदि शिव परद गौरी गनेश कि पुजा कि जाए तो, इस स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है, यह स्तोत्र शीघ्र ही फल देने लग जाते है| यदि साधक इस स्तोत्र  का पाठ प्रतिदिन करने से बुराइया खुद- ब- खुद दूर होने लग जाती है साथ ही सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है| अपने परिवार जनों का स्वस्थ्य ठीक रहता है और लम्बे समय से बीमार व्यक्ति को इस स्तोत्र का पाठ सच्चे मन से करने पर रोग मुक्त हो जाता है| यदि मनुष्य जीवन की सभी प्रकार के भय, डर से मुक्ति चाहता है तो वह इस स्तोत्र का पाठ करे| आरती चालीसा स्तुतियाँ सूक्तम् अष्टकम् सहस्त्रनाम सूर्य स्तोत्रम् चन्द्र स्तोत्रम् मंगल स्तोत्रम् बुध स्तोत्रम् बृहस्पति स्तोत्रम् शुक्र स्तोत्रम् शनि स्तोत्रम् राहू स्तोत्रम् केतु स्तोत्रम् नवग्रह स्तोत्रम्
हिंदी भावार्थ: मंगला गौरी स्तोत्रं (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ भूमिपुत्र मंगल देव की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
भूमिपुत्र मंगल देव का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगला गौरी स्तोत्रं का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर मंगलवार, अंगारक चतुर्थी पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।