BHAKTI KI SHAKTI
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☀️ भगवान श्री सूर्य देव (दिनकर)

श्री सूर्य देव चालीसा

आत्मबल, सरकारी नौकरी, मान-सम्मान, नेत्र ज्योति व पितृ दोष निवारण

📅 शुभ दिन: रविवार एवं मकर संक्रांति 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

कनक बदन कुण्डल मकर, मुकुट शीश पर राज। कर सरोज पद्मासनहिं, जय जय रवि महाराज॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय जय जय रविदेव कृपाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

2

सकल जगत के जीवन दाता। दिनकर दिवाकर भानु विधाता॥

3

सात अश्व रथ सोहत नीके। अरुण सारथी छवि मन जी के॥

4

सहस्र किरण मुख तेज अपारा। तम अज्ञान मिटावनहारा॥

5

कश्यप सुत अदिति के नंदन। वंदन करत सकल जग वंदन॥

6

द्वादश रूप धरे सुखदाई। वेद पुराणन महिमा गाई॥

7

मित्र रवि सूर्य भानु खग पूषा। हिरण्यगर्भ मरीचि अहिनिशा॥

8

आदित्य सवित्रे अर्क भास्करा। द्वादश नाम जपै जो नरा॥

9

ताके रोग शोक सब भागे। धर्म कर्म में बुद्धि जागे॥

10

आरोग्य बल विद्या पावै। सूर्य कृपा ते सब सुख आवै॥

11

नेत्र ज्योति निर्मल करि देहू। हृदय कमल में बासा लेहू॥

12

चर्म रोग कुष्ठ सब टारो। बिगड़े काज हमारे संवारो॥

13

सरकारी कार्यों में जय पावै। जो नर सूर्य चालीसा गावै॥

14

पिता तुल्य प्रभु मान बढावहु। कुल दीपक यश दूर फैलावहु॥

15

प्रातः काल उठि जल जो चढ़ावै। ताके पाप ताप सब नशावै॥

16

तांबे के लोटे जल लीजै। लाल चंदन रोली मिलि दीजै॥

17

अर्घ्य देय ॐ सूर्याय उच्चारै। सो भव सागर पार उतारै॥

18

रविवार व्रत जो नर राखै। सो अमृत फल जीवन चाखै॥

19

नमक त्यागि जो भोजन करई। सूर्य देव ताके कष्ट हरई॥

20

तेज प्रताप बढावनहारा। जय जय जय भुवन उजियारा॥

21

अंधकार सब दूर भगावै। नव प्रभात जीवन में लावै॥

22

ऋषि मुनि सबहिं तुम्हारि शरण में। शीश नवावत चरण कमल में॥

23

गायत्री संग तुमहिं विराजे। जग में सकल काज शुभ साजे॥

24

जो यह पाठ करै चित लाई। तापर सूर्य होय सहाई॥

25

निर्धन को धनवान बनावहु। रोगी को आरोग्य दिलावहु॥

26

विद्यार्थी जो ध्यान लगावै। उत्तम विद्या बुद्धि पावै॥

27

अहंकार मद लोभ नशावहु। सात्विक भाव हृदय उपजावहु॥

28

सकल मनोरथ पूरण कीजै। निज पद भक्ति प्रेम रस दीजै॥

29

दीन दयाल सुनो विनती हमारी। संकट हरहु हमारे भारी॥

30

शत्रु नाश होय विपत्ति टरई। सूर्य चालीसा जो नर पढ़ई॥

31

जय जय दिनकर जय जग स्वामी। तुम हो घट घट अंतरयामी॥

32

प्रातः समय उठि ध्यान लगाऊं। जनम जनम प्रभु गुण मैं गाऊं॥

33

आरती करौं तुम्हारी स्वामी। जय जय जय त्रिभुवन सुखकामी॥

34

अद्भुत महिमा प्रभु तिहारी। वंदन करत सकल संसारी॥

35

दीन मलीन अनाथ सहारा। सूर्य देव तुम हो रखवारा॥

36

सदा रहौं मैं शरण तुम्हारी। रक्षा करहु हे सूर्य बलिहारी॥

37

सूर्य चालीसा जो नित ध्यावै। सो जीवन में सब सुख पावै॥

38

अन्त समय सूर्य लोक सिधावै। जनम मरण के फंद छुड़ावै॥

39

नमो नमो हे सूर्य कुमारा। जय जय जय जग के आधारा॥

40

पाठ समाप्त भयो सुनि लीजै। कृपा दृष्टि हम पर अब कीजै॥

॥ समापन दोहा ॥

सूर्य चालीसा प्रेम युत, पाठ करै जो कोय। सुख संपत्ति आरोग्य बल, सब विधि मंगल होय॥

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

रविवार को प्रातः स्नान कर तांबे के पात्र में जल, लाल पुष्प, अक्षत व रोली मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य चालीसा का पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

सरकारी नौकरी व प्रशासनिक पदों में सफलता, पिता के साथ मधुर संबंध, नेत्र ज्योति व चर्म रोगों में चमत्कारिक लाभ, तथा समाज में मान-प्रतिष्ठा।

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