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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम

जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र

जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा
जप माला तुलसी माला - 1 अथवा 3 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
जटायुरुवाच अगणितगुणमप्रमेयमाधं सकलजगत्स्थितिसंयमादिहेतुम् । उपरमपरमं परात्मभूतं सततमहं प्रणतोऽस्मि रामचन्द्रम् ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
निरवधिसुखमिन्दिराकटाक्षं क्षपितसुरेन्द्रचतुर्मुखादिदुःखम् । नरवरमनिशं नतोऽस्मि रामं वरदमहं वरचापबाणहस्तम् ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
त्रिभुवनकमनीयरूपमीडयं रविशतभासुरमीहितप्रदानम् । शरणदमनिशं सुरागमूले कृतनिलयं रघुनन्दनं प्रपधे ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
भवविपिनदवाग्निनामधेयं भवमुखदैवतदैवतं दयालुम् । दनुजपतिसहस्त्रकोटिनाशं रवितनयासदृशं हरिं प्रपधे ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
अविरतभवभावनातिदूरं भवविमुखैर्मुनिभि: सदैव दृश्यम् । भवजलधिसुतारणांगघ्रिपोतं शरणमहं रघुनन्दनं प्रपधे ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
गिरिशगिरिसुतामनोनिवासं गिरिवरधारिणमीहिताभिरामम् । सुरवरदनुजेन्द्रसेवितांगघ्रिं सुरवरदं रघुनायकं प्रपधे ।। 6 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
परधनपरदारवर्जितानां परगुणभूतिषु तुष्टमानसानाम् । परहितनिरतात्मनां सुसेव्यं रघुवरमम्बुजलोचनं प्रपधे ।। 7 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
स्मितरुचिरविकासिताननाब्जमतिसुलभं सुरराजनीलनीलम् । सितजलरूहचारुनेत्रशोभं रघुपतिमीशगुरोर्गुरुं प्रपधे ।। 8 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
हरिकमलजशम्भुरूपभेदात्त्वमिह विभासि गुणत्रयानुवृत्त: । रविरिव जलपूरितोदपात्रेष्वमरपतिस्तुतिपात्रमीशमीडे ।। 9 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
रतिपतिशतकोटिसुन्दरांग शतपथगोचरभावनाविदूरम् । यतिपतिह्रदये सदा विभातं रघुपतिमार्तिहरं प्रभुं प्रपधे ।। 10 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
इत्येवं स्तुवतस्तस्य प्रसन्नोऽभूद्रघूत्तम: । उवाच गच्छ भद्रं ते मम विष्णो: परं पद्म ।। 11 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
श्रृणोति य इदं स्तोत्रं लिखेद्वा नियत: पठेत् । स याति मम सारुप्यं मरणे मत्स्मृतिं लभेत् ।। 12 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
इति राघवभाषितं तदा श्रुतवान् हर्षसमाकुलो द्विज: । रघुनन्दनसाम्यमास्थित: प्रययौ ब्रह्मसुपूजितं पद्म ।। 13 ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
।। इति जतायुकृत श्रीराम स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।
हिंदी भावार्थ: जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।