श्री राम नवमी पूजन विधि
🗓️ शुभ दिन व मुहूर्त: चैत्र शुक्ल नवमी (दोपहर 12:00 बजे)
पूजन का महत्व एवं चमत्कारी फल
मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को मध्याह्न काल (दोपहर 12 बजे) कर्क लग्न और पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था। राम नवमी के पावन पर्व पर रामलला का षोडशोपचार पूजन और स्तुति करने से जीवन के समस्त संकट, कलह और भय का नाश होता है तथा धर्म, मर्यादा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
सम्पूर्ण पूजन सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
💡 सुझाव: थाली में सामग्री सजाते समय प्रत्येक वस्तु के आगे टिक (✓) लगाएं ताकि कोई सामग्री छूटे नहीं।
आरंभिक शुद्धि, दीप प्रज्वलन एवं संकल्प
१. आसन शुद्धि:
दोपहर 12 बजे से पूर्व स्नान कर पीत वस्त्र धारण करें।
२. आचमन (मुख शुद्धि):
आचमन करें।
३. पवित्रीकरण (आत्म शुद्धि मंत्र):
पवित्र हों।
४. दीप प्रज्वलन व प्रणाम:
दीपक जलाएं।
५. संकल्प (Sankalpa):
श्री राम नवमी पूजन का संकल्प लें।
मंत्र, विधि एवं भावार्थ सहित संपूर्ण पूजन विधान
प्रत्येक उपचार को श्रद्धापूर्वक संपन्न करें और साथ में दिए गए वैदिक/पौराणिक मंत्र का उच्चारण करें।
1 १. मध्याह्न 12 बजे जन्मोत्सव स्तुति
उपचार #1भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥ लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी। भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभामिंधु खरारी॥
दोपहर 12:00 बजे घंटा, शंख और नगाड़े बजाकर गोस्वामी तुलसीदास जी रचित प्राकट्य स्तुति का सस्वर गान करें।
2 २. पंचामृत स्नान व राजसी शृंगार
उपचार #2पञ्चामृतस्नानं समर्पयामि।
रामलला को पंचामृत से स्नान कराकर पीतांबर वस्त्र, मुकुट और धनुष-बाण अर्पित करें।
3 ३. तुलसी व पंचामृत महाभोग
उपचार #3नैवेद्यं ससितं दिव्यं तुलसीदलसंयुतम्।
धनिए की पंजीरी, पंचामृत, तुलसी दल और फलों का भोग लगाएं।
4 ४. श्री राम चंद्र कृपालु भजु मन व आरती
उपचार #4श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्। नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुख कर कञ्ज पद कञ्जारुणम्॥
कपूर आरती करें और 'ॐ जय श्री रघुराई' गाएं।
महत्वपूर्ण पूजन नियम, सावधानियां व वर्जित कार्य
- ✦ श्री राम जन्मोत्सव की मुख्य पूजा दोपहर ठीक 12:00 बजे मध्याह्न में की जाती है।
- ✦ पूजन में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
- ✦ राम नवमी के दिन रामचरितमानस या सुंदरकांड का पाठ करना महाकल्याणकारी माना जाता है।
🔔 संबंधित चालीसा एवं महाआरती संग्रह
पूजन की पूर्णता हेतु स्तुति पाठ व कर्पूर आरती अवश्य करें।