Maha Lakshmi & Diwali Puja Vidhi
🗓️ Auspicious Days / Tithi: Diwali (Kartik Amavasya), every Friday, Dhanteras & Sharad Purnima
Significance & Spiritual Fruits (पूजा का महात्म्य व फल)
Goddess Maha Lakshmi is the supreme goddess of wealth, fortune, and abundance. Performing Shodashopachara puja in Sthir Lagna (Taurus/Leo) ensures permanent prosperity, dissolves debt, and fills the household with divine auspiciousness.
Puja Samagri Checklist (सामग्री चेकलिस्ट)
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Preliminary Rituals & Sankalpa (आरंभिक शुद्धि व संकल्प)
१. आसन शुद्धि:
उत्तर या ईशान कोण की ओर मुख कर आसन ग्रहण करें।
२. आचमन (मुख शुद्धि):
तीन बार आचमन कर पवित्र हों।
३. पवित्रीकरण (आत्म शुद्धि मंत्र):
गंगाजल छिड़क कर पूजा स्थल व स्वयं को शुद्ध करें।
४. दीप प्रज्वलन व प्रणाम:
अखंड चौमुखी महादीपक प्रज्वलित करें।
५. संकल्प (Sankalpa):
हाथ में जल, पुष्प, सिक्का लेकर स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति का संकल्प लें।
Vedic Procedure with Sanskrit Mantras
प्रत्येक उपचार को श्रद्धापूर्वक संपन्न करें और साथ में दिए गए वैदिक/पौराणिक मंत्र का उच्चारण करें।
1 १. ध्यानम् (Dhyanam)
उपचार #1ॐ या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी। गम्भीरावर्तनाभिः स्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया॥ लक्ष्मीर्दिव्यैर्गजेन्द्रैर्मणिगणखचितैः स्नापिता हेमकुम्भैः। नित्यं सा पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमाङ्गल्ययुक्ता॥
कमल के पुष्प व अक्षत हाथ में लेकर माता लक्ष्मी के चतुर्भुज, स्वर्णाभ व कमलारूढ़ स्वरूप का ध्यान करें।
2 २. आवाहनम् (Avahanam)
उपचार #2ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥ आगच्छ वरदे देवि भक्तानुकम्पिनि॥
हाथ जोड़कर माता महालक्ष्मी व गणेश जी का सस्नेह आवाहन करें।
3 ३. आसनम् (Asanam)
उपचार #3दिव्यास्तरणसंयुक्तं मणिरत्नसमन्वितम्। कार्तस्वरमयं दिव्यमासनं प्रतिगृह्यताम्॥
रक्त पुष्प या कमल दल चौकी पर बिछाकर आसन अर्पित करें।
4 ४. पाद्यम् (Padyam)
उपचार #4ॐ महालक्ष्म्यै नमः, पादोदकं समर्पयामि।
चरण प्रक्षालन हेतु सुगंधित जल अर्पित करें।
5 ५. अर्घ्यम् (Arghyam)
उपचार #5अर्घ्यं गृहाण वरदे गन्धपुष्पाक्षतैर्युतम्। प्रसन्न भव मे देवि त्रैलोक्यजननि शुभे॥
गुलाब जल, चंदन व अक्षत युक्त अर्घ्य जल चढ़ाएं।
6 ६. आचमनीयम् (Achamaniyam)
उपचार #6सर्वतीर्थसमुद्भूतं सुगन्धामृतशीतलम्। आचम्यतां मया दत्तं लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते॥
आचमनी से जल अर्पित कर मुख शुद्धि कराएं।
7 ७. पंचामृत व स्वर्णोदक स्नानम् (Snanam)
उपचार #7क्षीरं दधि घृतं चैव मधु शर्करया युतम्। पञ्चामृतं गृहाण त्वं स्नानाय कमलालये॥
चांदी के सिक्के व प्रतिमा को पंचामृत से, तत्पश्चात इत्र युक्त गंगाजल से स्नान कराएं।
8 ८. वस्त्रम् व आभूषणम् (Vastram & Shringar)
उपचार #8रक्तवस्त्रयुगं देवि नानालङ्कारशोभितम्। मया दत्तं गृहाण त्वं विष्णुपत्नि नमोऽस्तु ते॥
लाल रेशमी चुनरी, वस्त्र व चूड़ी, बिंदी, सिंदूर आदि संपूर्ण सुहाग सामग्री चढ़ाएं।
9 ९. गन्धम्, कुंकुम व अक्षत (Chandan & Kumkum)
उपचार #9कुङ्कुमं कामदं दिव्यं कामिनीकामसम्भवम्। कुङ्कुमेनार्चिता देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
माता को लाल कुंकुम, अष्टगंध व हल्दी-मिश्रित पीले अक्षत अर्पित करें।
10 १०. कमल पुष्प व माला (Kamal & Pushpam)
उपचार #10पद्मशङ्खगदाहस्ते पद्मवर्णानि सुप्रभे। कमलैः पूजिते देवि सर्वान् कामान् प्रयच्छ मे॥
गुलाबी या लाल कमल के फूल, कमल गट्टा व गुलाब की ताजी माला माता को पहनाएं।
11 ११. धूपम् व इत्र (Dhupam & Itra)
उपचार #11दिव्यगन्धसमायुक्तं वनस्पतिरसोद्भवम्। आघ्रेयं सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
गुलाब या चंदन का इत्र रुई के फाहे से लगाएं और सुगंधित धूप जलाएं।
12 १२. महादीपम् (Deepam)
उपचार #12अन्तर्ज्योतिर्बहिर्ज्योतिर्ज्योतिर्ज्योतिः परात्परः। दीपज्योतिर्महादेवि गृहाण मम मङ्गले॥
शुद्ध घी का बड़ा दीपक और तेल के दीपक प्रज्वलित कर चारों ओर प्रकाश फैलाएं।
13 १३. नैवेद्यम् (Bhog - Kheer & Batashe)
उपचार #13अन्नं चतुर्विधं स्वादु रसैः षड्भिः समन्वितम्। नैवेद्यं गृह्यतां देवि भक्तिर्मे ह्यचला भवेत्॥
चावल की खीर, बताशे, खील, मावे के लड्डू, अनार व सिंघाड़े का भोग लगाएं।
14 १४. ताम्बूलम्, कुबेर पूजन व दक्षिणा (Tambulam)
उपचार #14पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्। स्वर्णरजतमुद्राढ्यं दक्षिणां च समर्पये॥
पान-सुपारी, कौड़ी, गोमती चक्र और तिजोरी/बहीखाता पूजन कर दक्षिणा रखें।
15 १५. महाआरती (Karpoor Aarti)
उपचार #15ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
कपूर और 5 बत्तियों वाले पंचदीप से माँ लक्ष्मी की सपरिवार भव्य आरती करें।
16 १६. प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि व क्षमा (Pushpanjali)
उपचार #16ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥ अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥
हाथ में पुष्प लेकर महालक्ष्मी गायत्री मंत्र का पाठ कर पुष्पांजलि अर्पित करें और नतमस्तक होकर क्षमा मांगें।
Important Rules, Dos & Don'ts (पूजन नियम व क्या न करें)
- ✦ माता लक्ष्मी की पूजा कभी अकेले न करें; उनके साथ प्रथम पूज्य श्री गणेश जी की स्थापना अनिवार्य है (अन्यथा धन बिना विवेक के विपत्ति बन सकता है)।
- ✦ दीपावली पूजन में माँ लक्ष्मी को गणेश जी के दाहिनी ओर (Right side) स्थापित करना चाहिए।
- ✦ माँ लक्ष्मी को श्वेत (सफेद) फूल न चढ़ाएं; उन्हें लाल, गुलाबी कमल और गुलाब अत्यंत प्रिय हैं।
- ✦ पूजन के उपरांत घर में झाड़ू न लगाएं और किसी को भी उस रात्रि धन/उधार न दें।
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पूजन की पूर्णता हेतु स्तुति पाठ व कर्पूर आरती अवश्य करें।