Shri Krishna Janmashtami Puja Vidhi
🗓️ Auspicious Days / Tithi: Bhadrapada Krishna Ashtami (Midnight)
Significance & Spiritual Fruits (पूजा का महात्म्य व फल)
Celebrating the divine appearance of Lord Krishna, Janmashtami midnight worship blesses devotees with divine joy, grants progeny to the childless, purifies past karma, and fills life with love and spiritual bliss.
Puja Samagri Checklist (सामग्री चेकलिस्ट)
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Preliminary Rituals & Sankalpa (आरंभिक शुद्धि व संकल्प)
१. आसन शुद्धि:
मध्यरात्रि 12 बजे से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
२. आचमन (मुख शुद्धि):
आचमन करें।
३. पवित्रीकरण (आत्म शुद्धि मंत्र):
पवित्र हों।
४. दीप प्रज्वलन व प्रणाम:
दीपक जलाएं।
५. संकल्प (Sankalpa):
श्री कृष्ण जन्मोत्सव व्रत का संकल्प लें।
Vedic Procedure with Sanskrit Mantras
प्रत्येक उपचार को श्रद्धापूर्वक संपन्न करें और साथ में दिए गए वैदिक/पौराणिक मंत्र का उच्चारण करें।
1 १. खीरा चीरकर जन्मोत्सव (Naal Chhedan)
उपचार #1ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
रात्रि 12:00 बजे खीरे के डंठल को सिक्के से काटकर श्री कृष्ण के गर्भ से प्राकट्य का उत्सव मनाएं और शंख बजाएं।
2 २. पंचामृत महाभिषेक
उपचार #2पञ्चामृतं मयानीतं पयो दधि घृतं मधु। स्नानाय गृह्यतां देव देवकीनन्दन प्रभो॥
शंख में पंचामृत भरकर लड्डू गोपाल का अभिषेक करें और अंत में गंगाजल से स्नान कराएं।
3 ३. शृंगार, पीतांबरी व मोरपंख
उपचार #3बर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कर्णिकारं बिभ्रद्वासः कनककपिशं वैजयन्तीं च मालाम्॥
सुंदर पीला वस्त्र पहनाएं, चंदन लगाएं, सिर पर मोरपंख युक्त मुकुट और हाथों में बांसुरी सजाएं।
4 ४. झूला झुलाना (Palna)
उपचार #4झूलत राधा संग कन्हैया।
सजे हुए पालने में बाल गोपाल को विराजित कर प्रेमपूर्वक झूला झुलाएं।
5 ५. माखन-मिश्री व धनिया पंजीरी भोग
उपचार #5नवनीतं ससितं दिव्यं तुलसीदलसंयुतम्। गृहाण बालरूपेण यशोदानन्दवर्धन॥
ताजा माखन-मिश्री, धनिए की पंजीरी, पंचामृत और ऋतुफलों का तुलसी दल सहित भोग लगाएं।
6 ६. मध्यरात्रि महाआरती व जन्मोत्सव गान
उपचार #6आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की। गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला॥
कपूर आरती करें, 'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' गाएं और प्रसाद बांटें।
Important Rules, Dos & Don'ts (पूजन नियम व क्या न करें)
- ✦ जन्माष्टमी के दिन दिनभर निर्जला या फलाहारी व्रत रखें और मध्यरात्रि जन्मोत्सव के बाद ही पारण करें।
- ✦ भोग में तुलसी दल (Tulsi) अवश्य रखें, बिना तुलसी के श्री कृष्ण भोग नहीं लेते।
- ✦ जन्माष्टमी के प्रसाद में धनिए की पंजीरी विशेष रूप से बनाई जाती है, जो अत्यंत स्वास्थ्यवर्धक और शास्त्रसम्मत है।
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पूजन की पूर्णता हेतु स्तुति पाठ व कर्पूर आरती अवश्य करें।