BHAKTI KI SHAKTI
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🦢 माँ सरस्वती (विद्या व ज्ञान दात्री)

श्री सरस्वती चालीसा

बुद्धि, विद्या, संगीत, वाणी सिद्धि व परीक्षा में सफलता

📅 शुभ दिन: गुरुवार, वसंत पंचमी 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

जनक जननि पद कमल रज, निज मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल देहु उदारि॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी॥

2

जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥

3

रूप चतुर्भुज धारी माता। सकल विश्व अन्दर विख्याता॥

4

जग में पाप बुद्धि जो होती। धर्म बुद्धि चित में नहिं होती॥

5

जबहिं पाप का भार बढ़ंता। धर्म का नाश तबहिं होवंता॥

6

तब तुम मात रूप धर आवत। जग के पापन को विनिसावत॥

7

विद्या दान देहु महरानी। तुम सम और न कोई दानी॥

8

ऋषि मुनि सबहिं तुम्हारि शरण में। शीश नवावत चरण कमल में॥

9

वेद पुराणन महिमा गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

10

वीणा वादिनि तुम सुख दाता। जग कल्याणी जग की माता॥

11

हंस वाहिनी श्वेत वसना। शारदे माता पूरन रसना॥

12

पुस्तक जपमाला कर सोहै। देखि देव मुनि जन मन मोहै॥

13

वाणी में अमृत रस घोलो। मधुर वचन मुख से प्रभु बोलो॥

14

अल्प बुद्धि अति ही अज्ञानी। तुम सम और न मात सयानी॥

15

अंधकार अज्ञान नसावहु। ज्ञान प्रकाश हिये उपजावहु॥

16

विद्या बुद्धि बल हमको दीजै। जनम जनम के पाप हरीजै॥

17

कठिन परीक्षा पास करावहु। उत्तम अंक सदा दिलवावहु॥

18

संगीत कला में ज्ञान बढ़ावहु। सुर लय ताल विवेक सिखावहु॥

19

मूक होय वाचाल विधाता। पंगु चढ़े गिरि तव प्रसादा॥

20

जो जन तुमरो ध्यान लगावै। सो जीवन में सब सुख पावै॥

21

ब्रह्मा विष्णु महेश मनावैं। सुर नर मुनि सब शीश नवावैं॥

22

कालिदास पर कृपा जो कीन्हा। महाकवि पद ताको दीन्हा॥

23

तुलसी सूरदास कबीरा। कृपा तिहारी पायी सुधीरा॥

24

वाल्मीकि मुनि रामायण गाया। सब तिहारी कृपा का साया॥

25

दीन हीन जन शरण तिहारी। रक्षा करहु हे मात हमारी॥

26

काम क्रोध मद लोभ मिटावहु। निर्मल मन में भक्ति जगावहु॥

27

जो यह पाठ करै चालीसा। होय प्रसन्न ज्ञान के ईशा॥

28

प्रातः काल उठि जो नर गावै। विद्या बुद्धि परम फल पावै॥

29

वसंत पंचमी जो व्रत राखै। सरस्वती कृपा अमृत चाखै॥

30

सकल मनोरथ सिद्ध करावै। ज्ञान गंगा हिय में बहलावै॥

31

विद्यावान गुणी अति ज्ञानी। होय तुम्हारी कृपा भवानी॥

32

अक्षर ज्ञान विवेक प्रदाता। जय सरस्वती ज्ञान विधाता॥

33

हंस वाहिनी कमल विराजी। सकल कला विद्या की साजी॥

34

माता कृपा दृष्टि अब कीजै। बुद्धि विवेक ज्ञान रस दीजै॥

35

अज्ञान तिमिर सब दूर भगावहु। ज्ञान ज्योति हिय माहिं जगावहु॥

36

नमो नमो हे मात भवानी। जय जय जय वीणा वरदानी॥

37

सदा रहो मम कंठ निवासा। पुरवहु मात हमारी आसा॥

38

भक्ति भाव से जो नर ध्यावै। सो भव सागर पार लगावै॥

39

सरस्वती चालीसा जो गाई। तापर शारद होय सहाई॥

40

जय जय जय जगदम्ब सरस्वती। देहु ज्ञान मति निर्मल गति॥

॥ समापन दोहा ॥

सरस्वती चालीसा जो, पाठ करै चित लाय। विद्या बुद्धि विवेक बल, सब सुख सम्पति पाय॥

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

वसंत पंचमी या गुरुवार को पीले वस्त्र पहनकर माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पीले पुष्प, पीला चंदन, कलम और पुस्तकें अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर एकाग्रचित्त होकर पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

विद्यार्थियों के लिए परीक्षा में शीर्ष सफलता, तीव्र स्मरण शक्ति, भाषण और संगीत में सिद्धि, तथा वाणी दोष का निवारण।

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