BHAKTI KI SHAKTI
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🌟 नवग्रह देव (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु)

श्री नवग्रह चालीसा

कुंडली के समस्त ग्रह दोषों की शांति, भाग्य वृद्धि व सर्वत्र रक्षा

📅 शुभ दिन: शनिवार, मंगलवार, रविवार 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

श्री गणपति गुरु गौरी पद, प्रेम सहित सिर नाय। नवग्रह चालीसा कहौं, सब संताप नशाय॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

प्रथमहिं रवि कहँ शीश नवाऊं। सूर्य देव के गुण मैं गाऊं॥

2

आदित्य देव परम सुखकारी। रोग शोक संकट के हारी॥

3

दूजे चंद्र देव मन भावन। शीतलता अमृत बरसावन॥

4

तीजे मंगल देव बलीरा। हरहु भूमि सुत सकल शरीरा॥

5

चौथे बुध देव बुद्धि प्रदाता। विद्या ज्ञान सकल सुख दाता॥

6

पंचम गुरु बृहस्पति देवा। ज्ञान ध्यान की दीजै सेवा॥

7

छठे शुक्र देव सुखकारी। दैत्य गुरु जय जय बलिहारी॥

8

सातवें शनि देव यम भ्राता। कर्म फल के न्याय विधाता॥

9

आठवें राहु देव बलवाना। सर्प रूप जग माहिं बखाना॥

10

नवम केतु देव मोक्ष प्रदाता। ध्वज रूप जग के सुख दाता॥

11

नवग्रह मिलि जब कृपा कराहीं। विपत्ति संकट कछु नहिं पाहीं॥

12

कुंडली दोष सकल मिट जावै। जो नवग्रह चालीसा गावै॥

13

कालसर्प अरु मांगलिक दोषा। साढ़े साती कटै संतोषा॥

14

गृह क्लेश अरु व्यापारिक मंदी। नवग्रह कृपा ते होय न बंदी॥

15

विद्यार्थी जो पाठ सुनावै। उत्तम बुद्धि परीक्षा पावै॥

16

पुत्र हीन को गोदी भरई। नवग्रह कृपा ते सब दुख टरई॥

17

आरोग्य बल काया पावै। बिगड़े काज सकल बन जावै॥

18

दीन मलीन अनाथ सहारा। नवग्रह देव तुम हो रखवारा॥

19

सदा रहौं मैं शरण तुम्हारी। रक्षा करहु हे नाथ बलिहारी॥

20

दुःख दरिद्र नहिं निकटै आवै। मंगल मोद प्रमोद बढावै॥

21

जो यह पाठ करै चालीसा। होय प्रसन्न नवग्रह के ईशा॥

22

नित्त नेम करि पाठ सुनावै। सो नर मनवांछित फल पावै॥

23

अद्भुत महिमा प्रभु तिहारी। वंदन करत सकल संसारी॥

24

काम क्रोध मद लोभ नशावहु। सात्विक भाव हृदय उपजावहु॥

25

रोग कष्ट सब दूर भगावहु। आरोग्य बल विद्या दिलवावहु॥

26

सकल मनोरथ सिद्ध करावहु। बिगड़े काज हमारे संवारो॥

27

जय नवग्रह जय जय सुखदाता। भक्त जनों के भाग्य विधाता॥

28

शरण तुम्हारी आयो स्वामी। तुम हो घट घट अंतरयामी॥

29

आरती करौं तुम्हारी देवा। सदा करहु भक्तन की सेवा॥

30

प्रेम भक्ति रस अन्तर नाचे। नवग्रह नाम जो सांचे बांचे॥

31

सकल मनोरथ पूरण कीजै। निज पद भक्ति प्रेम रस दीजै॥

32

आरोग्य बल विद्या दीजै। दास जानि अपना करि लीजै॥

33

नवग्रह चालीसा पाठ समाप्ता। सब विधि मंगल होय प्रभाता॥

34

जय जय जय नवग्रह बलवाना। राखहु लाज सुनो भगवाना॥

35

माता कृपा दृष्टि नित राखो। अमृत वचन सदा मुख भाखो॥

36

निश्चय मन जो ध्यान लगावै। नवग्रह ताहि सदा सुख पावै॥

37

सदा रहो मम कंठ निवासा। पुरवहु मात हमारी आसा॥

38

विद्या बुद्धि विवेक प्रदाता। जय जय जय नवग्रह सुखदाता॥

39

अन्न धन्य से घर भर जावै। जो जन नवग्रह गुण गावै॥

40

नवग्रह चरण में शीश झुकाऊं। जनम जनम प्रभु गुण मैं गाऊं॥

॥ समापन दोहा ॥

नवग्रह चालीसा पढ़ै, जो कोई चित लाय। ग्रह पीड़ा सब दूर हो, सुख सम्पति घर आय॥

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

शनिवार या रविवार को नवग्रह यंत्र या चित्र के सम्मुख नौ अलग-अलग दिशाओं का ध्यान कर घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं। नवग्रह चालीसा का पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

कुंडली के सभी 9 ग्रहों के अनिष्ट प्रभावों का शमन, कालसर्प व मांगलिक दोष की शांति, और जीवन में चौतरफा सफलता।

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