BHAKTI KI SHAKTI
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⚙️ देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ⏰ विश्वकर्मा पूजा (17 सितंबर), गुरुवार

श्री विश्वकर्मा जी की आरती (ॐ जय श्री विश्वकर्मा)

शिल्प, निर्माण, तकनीकी सफलता, औजारों की सुरक्षा और कार्यक्षेत्र में उन्नति हेतु।

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॥ मुख्य टेक / मुखड़ा ॥

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक सर्वधर्मा॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥

॥ संपूर्ण आरती कड़ियां ॥
1

चार भुजा अति भ्राजत, हंस वाहन सोहे। शिल्पकला के स्वामी, सब त्रिभुवन मोहे॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥

2

पुष्पक यान बनाये, लंका रची अनूपा। द्वारिका नगरी साजी, अद्भुत दिव्य स्वरूपा॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥

3

यंत्र औजार पूजे, कारीगर सुख पावे। जो जन आरती गावे, उन्नति नित पावे॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक सर्वधर्मा॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥

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आरती करने की शास्त्रोक्त विधि

कल-कारखानों, मशीनों और औजारों की पूजा कर धूप-दीप जलाकर आरती करें।

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आरती के चमत्कारी लाभ

व्यवसाय में वृद्धि होती है और कार्यक्षेत्र में होने वाली दुर्घटनाओं से रक्षा होती है।

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