ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक सर्वधर्मा॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
चार भुजा अति भ्राजत, हंस वाहन सोहे। शिल्पकला के स्वामी, सब त्रिभुवन मोहे॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
पुष्पक यान बनाये, लंका रची अनूपा। द्वारिका नगरी साजी, अद्भुत दिव्य स्वरूपा॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
यंत्र औजार पूजे, कारीगर सुख पावे। जो जन आरती गावे, उन्नति नित पावे॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक सर्वधर्मा॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥