जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता। अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता॥ ॐ जय संतोषी माता॥
सुंदर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो। हीरा पन्ना जड़ित, मुकुट शीश दीन्हो॥ ॐ जय संतोषी माता...॥
गुड़ और चना का भोग, मां को अति भावे। जो जन श्रद्धा से सेवे, सो मनवांछित पावे॥ ॐ जय संतोषी माता...॥
संतोषी मां की आरती, जो कोई नर गावे। सुख संपत्ति सुख पाए, दुख सब मिट जावे॥ ॐ जय संतोषी माता...॥
जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता। अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता॥ ॐ जय संतोषी माता॥