BHAKTI KI SHAKTI
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🦚 भगवान श्री कृष्ण ⏰ जन्माष्टमी, बुधवार, एकादशी, संध्या वंदना

श्री कृष्ण जी की आरती (आरती कुंजबिहारी की)

भक्ति, प्रेम, आनंद, वैवाहिक मधुरता और श्रीकृष्ण के सानिध्य की प्राप्ति हेतु।

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॥ मुख्य टेक / मुखड़ा ॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

॥ संपूर्ण आरती कड़ियां ॥
1

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति कारी, राधिका रमन बिहारी की॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

2

कनकमय मुकुट सीस सोहै, छबि लखि त्रिभुवन मन मोहै। गूंज रही वंशी ब्रज गलियां, महक रही प्यारी-प्यारी कलियां। देखि छवि बलि-बलि जाऊं, निरखि हिय आनंद पाऊं। चरन रज लूं बलिहारी की॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

3

जहाँ से प्रगट भई गंगा, कलुष कलि-हारिणि श्रीगंगा। स्मरण ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस जटा के संगा। अमल छबि चमके अति भारी, जटा में गंग पखारी की॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

4

दर्शन बलहारी कुंजबिहारी, कृपा करि दीजै सुख भारी। रास रसमय छवि अति न्यारी, निरखि सब गोपी सुखकारी। श्री यदुनंदन असुर निकंदन, जयति जय कृष्ण मुरारी की॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

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आरती करने की शास्त्रोक्त विधि

भगवान को मोरपंख, माखन, मिश्री और तुलसीदल अर्पित करें। कपूर अथवा गाय के घी का दीपक प्रज्वलित कर मृदंग-मंजीरे के साथ आरती करें।

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आरती के चमत्कारी लाभ

मानसिक अशांति और अवसाद दूर होता है। जीवन में प्रेम, आनंद और माधुर्य का संचार होता है। संतान सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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