ॐ जय दूलह देवा, साईं जय दूलह देवा। पूजा कनि था सिंधी, ज्योति वारी सेवा॥ ॐ जय दूलह देवा॥
रतनलाल रतनाणी, नंदन अवतारी। अमरलाल सुखकारी, संकट सब टारी॥ ॐ जय दूलह देवा॥
सिंधु नदी जा स्वामी, वरुण देव सांचा। दीन दुखियन जा दाता, पूरन करि वाचा॥ ॐ जय दूलह देवा॥
जो कोइ आरती गावे, प्रेम सों मन लाई। सुख सम्पति सो पावे, झूलेलाल सहाई॥ ॐ जय दूलह देवा॥
ॐ जय दूलह देवा, साईं जय दूलह देवा। पूजा कनि था सिंधी, ज्योति वारी सेवा॥ ॐ जय दूलह देवा॥