Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
🔱 परमेश्वर व वैदिक ऋषि

षोडशी हृदय स्तोत्र

षोडशी हृदय स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति परमेश्वर व वैदिक ऋषि के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
॥ अथ श्रीषोडशीहृदयप्रारम्भः ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
कैलासे करुणाक्रान्ता परोपकृतिमानसा पप्रच्छ करुणासिन्धुं सुप्रसन्नं महेश्वरम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
॥ श्रीपार्वत्युवाच ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
आगामिनि कलौ ब्रह्मन् धर्मकर्मविवर्जिताः । भविष्यन्ति जनास्तेषां कथं श्रेयो भविष्यति ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
॥ श्रीशिव उवाच ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि तव स्नेहान्महेश्वरि । दुर्लभं त्रिषु लोकेषु सुन्दरीहृदयस्तवम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
ये नरा दुःखसन्तप्ता दारिद्रयहतमानसाः । अस्यैव पाठमात्रेण तेषां श्रेयो भविष्यति ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
विनियोगः ॥ श्री ॥
॥ विनियोगः ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक विनियोगः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
विनियोगः ॥ श्री ॥
ॐ अस्य श्रीमहाषोडशीहृदयस्तोत्रमन्त्रस्य आनन्दभैरव ऋषिः । देवी गायत्री छन्दः । श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी देवता। ऐं बीजम् । सौः शक्तिः । क्लीं कीलकम् । धर्मार्थकाममोक्षार्थे जपे (पाठे) विनियोगः । ॥ अथ ऋष्यादिन्यासः ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक विनियोगः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
विनियोगः ॥ श्री ॥
ॐ आनन्दभैरवऋषये नमः शिरसि । देवी गायत्री छन्दसे नमः मुखे । श्रीमहात्रिपुरसुन्दरीदेवतायै नमः हृदये । ऐं बीजाय नमः नाभौ । सौः शक्तये नमः स्वाधिष्ठाने । क्लीं कीलकाय नमः मूलाधारे । विनियोगाय नमः पादयोः ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक विनियोगः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
न्यासः ॥ श्री ॥
॥ अथ करन्यासः ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक न्यासः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
न्यासः ॥ श्री ॥
ऐं ह्रीं क्लीं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । क्लीं श्रीं सौः ऐं तर्जनीभ्यां नमः । सौः ॐ ह्रीं श्रीं मध्यमाभ्यां नमः । ऐं कएलह्रीं हसकलह्रीं अनामिकाभ्यां नमः । क्लीं सकल कनिष्ठिकाभ्यां नमः । सौः सौः ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । ॥ अथ हृदयादिषडङ्गन्यासः ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक न्यासः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
ऐं ह्रीं क्लीं हदयाय नमः । क्लीं श्रीं सौः ऐं शिरसे स्वाहा । सौः ॐ ह्रीं श्रीं शिखायै वषट् । ऐं कएलह्रीं हसकलह्रीं कवचाय हुम् । क्लीं सकल नेत्रत्रयाय वौषट् । सौः सौः ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं अस्त्राय फट् ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
ध्यानम् ॥ श्री ॥
॥ अथ ध्यानम् ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
बालव्यक्तविभाकरामितनिभां भव्यप्रदां भारती- मीषत्फुल्लमुखाम्बुजस्मितकरैराशाभवान्धापहाम् । पाशं साभयमङ्कुशं च वरदं सम्बिभ्रतीं भूतिदां भ्राजन्तीं चतुरम्बुजाकृतकरैर्भक्त्या भजे षोडशीम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
॥ श्री षोडशी ललितात्रिपुरसुन्दरी हृदय स्तोत्रम् ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
सुन्दरी सकलकल्मषापहा कोटिकञ्जकमनीयकान्तिभृत् । कोटिकल्पकृतपुण्यकर्मणा पूजनीयपदपुण्यपुष्करा ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
शर्वरीशसमसुन्दरानना श्रीशशक्तिसुकृताश्रयाश्रिता । सज्जनानुशरणीयसत्पदा सङ्कटे सुरगणैः सुवन्दिता ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
या सुरासुररणे जवान्विता आजघान जगदम्बिकाऽजिता । तां भजामि जननीं जगज्जनिं युद्धयुक्तदितिजान्सुदुर्जयान् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
योगिनां हृदयसङ्गतां शिवां योगयुक्तमनसां यतात्मनाम् । जाग्रतीं जगति यत्नतो द्विजा यां जपन्ति हृदि तां भजाम्यहम् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
कल्पकास्तु कलयन्ति कालिकां यत्कला कलिजनोपकारिका । कौलिकालिकलितान्घ्रिपङ्कजां तां भजामि कलिकल्मषापहाम् ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
बालार्कानन्तशोचिर्न्निजतनुकिरणैर्द्दीपयन्तीं दिगन्तान् दीप्तैर्द्देदीप्तमानां दनुजदलवनानल्पदावानलाभाम् । दान्तोदन्तोग्रचितां दलितदितिसुतां दर्शनीयां दुरन्तां देवीं दीनार्द्रचित्तां हृदि मुदितमनाः षोडशीं संस्मरामि ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
धीरान्धन्यान्धरित्रीधवविधृतशिरो धूतधूल्यब्जपादां घृष्टान्धाराधराधो विनिधृतचपलाचारुचन्दप्रभाभाम् । धर्म्यान्धूतोपहारान्धरणिसुरधवोद्धारिणीं ध्येयरूपां धीमद्धन्यातिधन्यान्धनदधनवृतां सुन्दरीं चिन्तयामि ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
जयतु जयतु जल्पा योगिनी योगयुक्ता जयतु जयतु सौम्या सुन्दरी सुन्दरास्या । जयतु जयतु पद्मा पद्मिनी केशवस्य जयतु जयतु काली कालिनी कालकान्ता ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
जयतु जयतु खर्वा षोडशी वेदहस्ता जयतु जयतु धात्री धर्मिणी धातृशान्तिः । जयतु जयतु वाणी ब्रह्मणो ब्रह्मवन्द्या जयतु जयतु दुर्गा दारिणी देवशत्रोः ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
न्यासः ॥ श्री ॥
देवि त्वं सृष्टिकाले कमलभवभृता राजसी रक्तरूपा रक्षाकाले त्वमम्बा हरिहृदयधृता सात्विकी श्वेतरूपा । भूरिक्रोधा भवान्ते भवभवनगता तामसी कृष्णरूपा एताश्चान्यास्त्वमेव क्षितमनुजमला सुन्दरी केवलाद्या ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक न्यासः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16 ॥ श्री ॥
सुमलशमनमेतद्देवि गोप्यं गुणज्ञे ग्रहणमननयोग्यं षोडशीयं खलघ्नम् । सुरतरुसमशीलं सम्प्रदं पाठकानां प्रभवति हृदयाख्यं स्तोत्रमत्यन्तमान्यम् ॥ १६ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17 ॥ श्री ॥
इदं त्रिपुरसुन्दर्याः षोडश्याः परमाद्भुतम् । यः श्रृणोति नरः स्तोत्रं स सदा सुखमश्नुते ॥ १७ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18 ॥ श्री ॥
न शूद्राय प्रदातव्यं शठाय मलिनात्मने । देयं दान्ताय भक्ताय ब्राह्मणाय विशेषतः ॥ १८ ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ इति षोडशी हृदय स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: षोडशी हृदय स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
🕉️

संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

✨

पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ परमेश्वर व वैदिक ऋषि की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
📜

स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
परमेश्वर व वैदिक ऋषि का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
❓

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

षोडशी हृदय स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।