भगवान शिव पूजन विधि (रुद्राभिषेक)
🗓️ शुभ दिन व मुहूर्त: प्रतिदिन प्रातः, प्रत्येक सोमवार, प्रदोष व्रत अथवा महाशिवरात्रि
पूजन का महत्व एवं चमत्कारी फल
देवाधिदेव महादेव शिव आशुतोष हैं, जो मात्र एक लोटा जल और बिल्वपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं। शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग का विधिवत षोडशोपचार पूजन व रुद्राभिषेक करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है, गंभीर रोग-शोक दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह पूजन ग्रह दोषों विशेषकर शनि की साढ़े साती, कालसर्प दोष और चंद्र पीड़ा से मुक्ति दिलाता है।
सम्पूर्ण पूजन सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
💡 सुझाव: थाली में सामग्री सजाते समय प्रत्येक वस्तु के आगे टिक (✓) लगाएं ताकि कोई सामग्री छूटे नहीं।
आरंभिक शुद्धि, दीप प्रज्वलन एवं संकल्प
१. आसन शुद्धि:
उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशा के आसन पर बैठें।
२. आचमन (मुख शुद्धि):
'ॐ नमः शिवाय' अथवा 'ॐ केशवाय नमः' का उच्चारण कर 3 बार आचमन करें।
३. पवित्रीकरण (आत्म शुद्धि मंत्र):
गंगाजल अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर छिड़क कर पवित्र करें।
४. दीप प्रज्वलन व प्रणाम:
शिव जी के सम्मुख गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें।
५. संकल्प (Sankalpa):
हाथ में जल, अक्षत व बिल्वपत्र लेकर मन में शिव जी का स्मरण कर संकल्प लें।
मंत्र, विधि एवं भावार्थ सहित संपूर्ण पूजन विधान
प्रत्येक उपचार को श्रद्धापूर्वक संपन्न करें और साथ में दिए गए वैदिक/पौराणिक मंत्र का उच्चारण करें।
1 १. ध्यानम् (Dhyanam)
उपचार #1ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
हाथ में श्वेत पुष्प और अक्षत लेकर कैलाशपति भगवान शिव के त्रिपुंडधारी, त्रिनेत्र स्वरूप का ध्यान करें।
2 २. आवाहनम् (Avahanam)
उपचार #2ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्य pushy यामामृतात्॥ आगच्छ भगवन् शम्भो स्थाने चात्र स्थिरो भव॥
हाथ जोड़कर भगवान शिव का आवाहन करें और शिवलिंग पर पधारने की प्रार्थना करें।
3 ३. आसनम् (Asanam)
उपचार #3आसनं शाश्वतं दिव्यं सर्वकामफलप्रदम्। गृहाण देवदेवेश भक्त्या दत्तं महेश्वर॥
शिवलिंग के पास पुष्प व अक्षत अर्पित कर आसन समर्पित करें।
4 ४. पाद्यम् (Padyam)
उपचार #4ॐ नमः शिवाय, पाद्यं समर्पयामि।
जल अर्पित कर भगवान के चरण प्रक्षालन का भाव करें।
5 ५. अर्घ्यम् (Arghyam)
उपचार #5गन्धपुष्पाक्षतैर्युक्तमर्घ्यं सम्पादितं मया। गृहाण शम्भो देवेश प्रसीद परमेश्वर॥
चंदन, पुष्प व अक्षत मिला जल अर्घ्य स्वरूप चढ़ाएं।
6 ६. आचमनीयम् (Achamaniyam)
उपचार #6गङ्गाजलसमानीतं सुगन्धि विमलं जलम्। आचम्यतां सुरश्रेष्ठ मया दत्तं हि भक्तितः॥
मुख शुद्धि हेतु आचमनी से एक चम्मच निर्मल जल अर्पित करें।
7 ७. रुद्राभिषेक व पंचामृत स्नानम् (Abhishekam)
उपचार #7ॐ नमः शिवाय। पञ्चामृतं मयानीतं पयो दधि घृतं मधु। शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
सर्वप्रथम जल, फिर दूध, दही, घी, शहद व शर्करा से क्रमशः अभिषेक करें। अंत में प्रचुर गंगाजल की अखंड धारा चढ़ाएं।
8 ८. वस्त्रम् व यज्ञोपवीतम् (Vastram & Janeu)
उपचार #8वस्त्रं शीतनिवारणार्थं लज्जाया रक्षणं तथा। मया दत्तं गृहाण त्वं शम्भो भक्त्या समर्पितम्॥ उपवीतं गृहाण त्वं सोमेश्वर जगत्पते॥
सफेद वस्त्र या कलावा और जनेऊ शिवलिंग पर अर्पित करें।
9 ९. गन्धम्, भस्म व अक्षत (Chandan & Bhasma)
उपचार #9श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्। विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥ विभूतिं च प्रयच्छामि सर्वपापप्रणाशिनीम्॥
शिवलिंग पर श्वेत चंदन का त्रिपुंड लगाएं, पवित्र भस्म (विभूति) चढ़ाएं और बिना टूटे अक्षत अर्पित करें।
10 १०. बिल्वपत्र, धतूरा व पुष्प (Bilvapatra & Pushpam)
उपचार #10त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥
बिल्वपत्र के चिकने भाग पर 'ॐ नमः शिवाय' लिखकर शिवलिंग पर उलटा चढ़ाएं। धतूरा, भांग व आक के फूल चढ़ाएं।
11 ११. धूपम् (Dhupam)
उपचार #11वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यः सुमनोहरः। आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
गुग्गल व लोबान की धूप प्रज्वलित कर भगवान को दिखाएं।
12 १२. दीपम् (Deepam)
उपचार #12भो शम्भो सर्वलोकेश दीपं पश्य मयार्पितम्। तमसो मा ज्योतिर्गमय प्रसीद परमेश्वर॥
गाय के घी का दीपक जलाकर शिवलिंग की आरती करें।
13 १३. नैवेद्यम् (Naivedyam)
उपचार #13नैवेद्यं शर्करायुक्तं फलानि विविधानि च। गृहाण देवदेवेश मया दत्तं महेश्वर॥
दूध की मिठाई, पंचमेवा व बेल/बेर के फलों का भोग लगाएं।
14 १४. ताम्बूलम् व दक्षिणा (Tambulam)
उपचार #14पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्। ताम्बूलं गृह्यतां देव दक्षिणां च समर्पये॥
पान, लौंग, इलायची, सुपारी व दक्षिणा अर्पित करें।
15 १५. कर्पूर आरती (Maha Aarti)
उपचार #15कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
कपूर जलाकर 'ॐ जय शिव ओंकारा' आरती करें।
16 १६. प्रदक्षिणा व क्षमा प्रार्थना (Pradakshina)
उपचार #16करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्। विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥
शिवलिंग की आधी परिक्रमा (सोमसूत्र को न लांघें) करें और क्षमा याचना करें।
महत्वपूर्ण पूजन नियम, सावधानियां व वर्जित कार्य
- ✦ शिवलिंग पर कभी भी केतकी (केवड़ा) और चंपा का फूल न चढ़ाएं। शिव पुराण में यह शापित माना गया है।
- ✦ शिवलिंग पर कभी भी हल्दी (Turmeric) और सिंदूर / कुमकुम न चढ़ाएं (यह देवी पार्वती की प्रतिमा पर चढ़ाया जा सकता है, शिवलिंग पर केवल भस्म व श्वेत चंदन चढ़ाएं)।
- ✦ शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा न करें; जल निकासी नाली (सोमसूत्र / निर्मली) को लांघना वर्जित है, हमेशा आधी परिक्रमा करके लौटें।
- ✦ अभिषेक के लिए शंख से जल न चढ़ाएं (शंखचूड़ वध के कारण शिव जी पर शंख से जल वर्जित है)। तांबे के लोटे में दूध कदापि न डालें; दूध के लिए पीतल या चांदी का लोटा उपयोग करें।
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पूजन की पूर्णता हेतु स्तुति पाठ व कर्पूर आरती अवश्य करें।