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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 देवाधिदेव महादेव शिव

शिवापराधक्षमा स्तोत्र

शिवापराधक्षमा स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। शिव महापुराण में वर्णित यह स्तुति देवाधिदेव महादेव शिव के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता भगवान सदाशिव / महर्षि वेदव्यास
स्रोत / ग्रन्थ शिव महापुराण
शुभ दिन / तिथि सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि
जप माला रुद्राक्ष माला - 1, 3 अथवा 11 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
आदौ कर्मप्रसङ्गात् कलयति कलुषं मातृकुक्षौ स्थितं मां विण्मूत्रामध्यमध्ये क्वथयति नितरां जाठरो जातवेदाः । यद्यद्वै तत्र दुःखं व्यथयति नितरां शक्यते केन वक्तुं क्षन्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
बाल्ये दुःखातिरेको मललुलितवपुः स्तन्यपाने पिपासानो शक्तश्चेन्द्रियेभ्यो भवगुणजनिता जन्तवो मां तुदन्ति । नानारोगादिदुःखाद्रुदनपरवशः शङ्करं न स्मरामि क्षन्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
प्रौढोऽहं यौवनस्थो विषयविषधरैः पंचभिर्मर्मसन्धौ दष्टो नष्टो विवेकः सुतधनयुवतिस्वादसौख्ये निषण्णः । शैवीचिन्ताविहीनं मम हृदयमहो मानगर्वाधिरूढं क्षन्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
वार्द्धक्ये चेन्द्रियाणां विगतगतिमतिश्चाधिदैवादितापैः पापै रोगैर्वियोगैस्त्वनवसितवपुः प्रौढिहीनं च दीनम् । मिथ्यामोहाभिलाषैर्धमति मम मनो धूर्जटेानशून्यं क्ष न्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
नो शक्यं स्मार्तकर्म प्रतिपदगहनप्रत्यवायाकुलाख्यं श्रौते वार्ता कथं मे द्विजकुलविहिते ब्रह्ममार्गे सुसारे । नास्था धर्मे विचारः श्रवणमननयोः किं निदिध्यासितव्यं क्षन्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
स्नात्वा प्रत्यूषकाले स्नपनविधिविधौ नाहृतं गाङ्गतोयं पूजार्थं वा कदाचिद्बहुतरगहनात्खण्डबिल्वीदलानि । नानीता पद्ममाला सरसि विकसिता गन्धपुष्पे त्वदर्थं क्षन्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
दुग्धैर्मध्वाज्ययुक्तैर्दधिसितसहितैः स्नापितं नैव लिङ्गंनो लिप्तं चन्दनाद्यैः कनकविरचितैः पूजितं न प्रसूनैः । धूपैः कर्पूरदीपैर्विविधरसयतै व भक्ष्योपहारैः क्षन्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
ध्यात्वा चित्ते शिवाख्यं प्रचरतरधनं नैव दत्तं द्विजेभ्यो हव्यं ते लक्षसंख्यैर्हतवहवदने नार्पितं बीजमन्त्रैः । नो तप्तं गाङ्गतीरे व्रतजपनियमै रुद्रजाप्यैर्न वेदैः क्षन्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
स्थित्वा स्थाने सरोजे प्रणवमयमरुत्कुण्डले सूक्ष्ममार्गे शान्ते स्वान्ते प्रलीने प्रकटितविभवे ज्योतिरूपे पराख्ये । लिङ्गज्ञे ब्रह्मवाक्ये सकलतनुगतं शङ्करं न स्मरामि क्षन्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
नग्नो निःसङ्गशुद्धस्त्रिगुणविरहितो ध्वस्तमोहान्धकारो नासाग्रे न्यस्तदृष्टिर्विदितभवगुणो नैव दृष्टः कदाचित् । उन्मन्यावस्थया त्वां विगत कलिमलं शंकरं न स्मरामि क्षन्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
चन्द्रोद्भासितशेखरे स्मरहरे गङ्गाधरे शंकरे सर्भूषितकण्ठकर्णविवरे नेत्रोत्थवैश्वानरे । दन्तित्वकृतसुन्दराम्बरधरे त्रैलोक्यसारे हरेमोक्षार्थं कुरु चित्तवृत्तिमखिलामन्यैस्तु किं कर्मभिः ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
किं वानेन धनेन वाजिकरिभिः प्राप्तेन राज्येन किं किं वा पुत्रकलत्रमित्रपशुभिर्देहेन गेहेन किम् । ज्ञात्वैतत्क्षणभङ्गरं सपदि रे त्याज्यं मनो दूरतः स्वात्मार्थं गुरुवाक्यतो भज भज श्रीपार्वतीवल्लभम् ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
आयुर्नश्यति पश्यतां प्रतिदिनं याति क्षयं यौवनं प्रत्यायान्ति गताः पुनर्न दिवसाः कालो जगद्भक्षकः । लक्ष्मीस्तोयतरङ्गभङ्गचपला विद्युच्चलं जीवितं तस्मान्मां शरणागतं शरणद त्वं रक्ष रक्षाधुना ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम् । विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ इति श्रीशिवापराधक्षमापनस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: शिवापराधक्षमा स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ देवाधिदेव महादेव शिव की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
देवाधिदेव महादेव शिव का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवापराधक्षमा स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।