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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मां सरस्वती

सरस्वती स्तोत्रम

ब्रह्मवैवर्त पुराण में महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा रचित यह सरस्वती स्तोत्र विद्या, संगीत, कला और आत्मज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां भारती की मधुर वंदना है।

रचयिता महर्षि याज्ञवल्क्य
स्रोत / ग्रन्थ ब्रह्मवैवर्त पुराण
शुभ दिन / तिथि बुधवार, वसंत पंचमी
जप माला सफेद चंदन या स्फटिक माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रान्विता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
आशासु राशीभवदंगवल्लीभासैव दासीकृतदुग्धसिन्धुम । मन्दस्मितैर्निन्दितशारदेन्दुं वन्देsरविन्दासनसुन्दरि त्वाम ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
शारदा शारदाम्भोजवदना वदनाम्बुजे । सर्वदा सर्वदास्माकं सन्निधिं सन्निधिं क्रियात ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृदेवताम । देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जना: ।।4।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
पातु नो निकषग्रावा मतिहेम्न: सरस्वती । प्राज्ञेतरपरिच्छेदं वचसैव करोति या ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम । हस्ते स्फाटिकमालिकां च दधतीं पद्मासने संस्थितां वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम ।। 6 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
वीणाधरे विपुलमंगलदानशीले, भक्तार्तिनाशिनि विरिंचिहरीशवन्द्ये । कीर्तिप्रदेsखिलमनोरथदे महार्हे, विद्याप्रदायिनि सरस्वति नौमि नित्यम ।। 7 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
श्वेताब्जपूर्णविमलासनसंस्थिते हे, श्वेताम्बरावृतमनोहरमंजुगात्रे । उद्यन्मनोज्ञसितपंकजमंजुलास्ये, विद्याप्रदायिनि सरस्वति नौमि नित्यम ।। 8 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
मातस्त्वदीयपदपंकजभक्तियुक्ता, ये त्वां भजन्ति निखिलानपरान्विहाय । ते निर्जरत्वमिह यान्ति कलेवरेण, भूवह्निवायुगगनाम्बुविनिर्मितेन ।। 9 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
मोहान्धकारभरिते ह्रदये मदीये, मात: सदैव कुरु वासमुदारभावे । स्वीयाखिलावयवनिर्मलसुप्रभाभि:, शीघ्रं विनाशय मनोगतमन्धकारम ।। 10 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
ब्रह्मा जगत सृजति पालयतीन्दिरेश:, शम्भुर्विनाशयति देवि तव प्रभावै: । न स्यात्कृपा यदि तव प्रकटप्रभावे, न स्यु: कथंचिदपि ते निजकार्यदक्षा: ।। 11 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
लक्ष्मीर्मेधा धरा पुष्टिर्गौरी तुष्टि: प्रभा धृति: । एताभि: पाहि तनुभिरष्टाभिर्मां सरस्वति ।। 12 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नम: । वेदवेदान्तवेदांगविद्यास्थानेभ्य: एव च ।।13।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने । विद्यारुपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोsस्तु ते ।। 14 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
यदक्षरं पदं भ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत । तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि ।। 15 ।।
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
इति श्री सरस्वती स्तोत्रम सम्पूर्णम्
हिंदी भावार्थ: सरस्वती स्तोत्रम (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ विद्या, बुद्धि, ज्ञान और रचनात्मक कलाओं में असाधारण सफलता
  • ✓ विद्यार्थियों में परीक्षा भय और विस्मृति का नाश
  • ✓ उच्च शिक्षा, शोध और साहित्य सृजन में सम्मान
  • ✓ मां शारदा की अहैतुकी कृपा से वाक चातुर्य की प्राप्ति
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
पवित्रता व आचमन
प्रातः काल स्नानोपरांत लाल या पीले स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
दिशा व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
3
देवी पूजन व अर्पण
माता को लाल पुष्प, कुंकुम, अक्षत, इत्र और नैवेद्य (खीर, बताशा या फल) अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में अक्षत-जल लेकर अपनी मनोकामना का संकल्प करें और निष्ठापूर्वक स्तोत्र का पाठ करें।
5
आरती व क्षमा प्रार्थना
पाठ के अंत में देवी की आरती करें और 'अपराध क्षमापन स्तोत्र' बोलकर क्षमा मांगें।
❓

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरस्वती स्तोत्रम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▼

प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके सफेद चंदन या स्फटिक माला - 1 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।

इस स्तोत्र पाठ के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।