ब्रह्मवैवर्त पुराण में महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा रचित यह सरस्वती स्तोत्र विद्या, संगीत, कला और आत्मज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां भारती की मधुर वंदना है।
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प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके सफेद चंदन या स्फटिक माला - 1 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।
यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।
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