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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 परमेश्वर व वैदिक ऋषि

रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं

रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति परमेश्वर व वैदिक ऋषि के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
विनियोगः ॥ श्री ॥
विनियोग – ॐ अस्य श्रीऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र-मन्त्रस्य भगवान् शुक्राचार्य ऋषिः, ऋण-मोचन-गणपतिः देवता, मम-ऋण-मोचनार्थं जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यास – भगवान् शुक्राचार्य ऋषये नमः शिरसि, ऋण-मोचन-गणपति देवतायै नमः हृदि, मम-ऋण-मोचनार्थे जपे विनियोगाय नमः अञ्जलौ । ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र ॐ स्मरामि देव-देवेश।वक्र-तुण्डं महा-बलम् । षडक्षरं कृपा-सिन्धु, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक विनियोगः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
महा-गणपतिं देवं, महा-सत्त्वं महा-बलम् । महा-विघ्न-हरं सौम्यं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
एकाक्षरं एक-दन्तं, एक-ब्रह्म सनातनम् । एकमेवाद्वितीयं च, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
शुक्लाम्बरं शुक्ल-वर्णं, शुक्ल-गन्धानुलेपनम् । सर्व-शुक्ल-मयं देवं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
रक्ताम्बरं रक्त-वर्णं, रक्त-गन्धानुलेपनम् । रक्त-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
कृष्णाम्बरं कृष्ण-वर्णं, कृष्ण-गन्धानुलेपनम् । कृष्ण-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 6 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
पीताम्बरं पीत-वर्णं, पीत-गन्धानुलेपनम् । पीत-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 7 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
नीलाम्बरं नील-वर्णं, नील-गन्धानुलेपनम् । नील-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 8 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
धूम्राम्बरं धूम्र-वर्णं, धूम्र-गन्धानुलेपनम् । धूम्र-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 9 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
सर्वाम्बरं सर्व-वर्णं, सर्व-गन्धानुलेपनम् । सर्व-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 10 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
भद्र-जातं च रुपं च, पाशांकुश-धरं शुभम् । सर्व-विघ्न-हरं देवं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 11 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
फल-श्रुति – यः पठेत् ऋण-हरं-स्तोत्रं, प्रातः-काले सुधी नरः । षण्मासाभ्यन्तरे चैव, ऋणच्छेदो भविष्यति ।। इति श्री ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र संपूर्णम् ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
जो व्यक्ति उक्त “ऋण-मोचन-स्तोत्र’ का नित्य प्रातः काल पाठ करता है, उसका छः मास में ऋण-निवारण होता है । om asya shrearin-mochan maha-ganpati-stotra-mantrasya bhagavan shukracharya rishih, rin-mochan-ganpatih devta, mam-rin-mochanartham jape viniyogah । bhagavan shukracharya rishaye namah shirasi, rin-mochan-ganpati devtaye namah hrudi, mam-rin-mochanarthe jape viniyogay namah anjalau । om smarami dev-devesh.vakra-tundam maha-balam । shadaksharam krupa-sindhu, namaami rin-muktaye ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
maha-ganpatim devam, maha-sattvam maha-balam । maha-vign-haram saumyam, namaami rin-muktaye ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
ekaaksharam eka-dantam, eka-bram sanatanam । ekamevadvitiyam ch, namaami rin-muktaye ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
shuklambaram shukla-varnam, shukla-gandhanulepanam । sarva-shukla-mayam devam, namaami rin-muktaye ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
raktambaram rakt-varnam, rakt-gandhanulepanam । rakt-puspai pujyamanam, namaami rin-muktaye ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
krushnambaram krushna-varnam, krushna-gandhanulepanam । krushna-puspai pujyamanam, namaami rin-muktaye ।। 6 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
pitambaram pit-varnam, pit-gandhanulepanam । pit-puspai pujyamanam, namaami rin-muktaye ।। 7 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
nilambaram nil-varnam, nil-gandhanulepanam । nil-puspai pujyamanam, namaami rin-muktaye ।। 8 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
dhumrambaram dhumra-varnam, dhumra-gandhanulepanam । dhumra-puspai pujyamanam, namaami rin-muktaye ।। 9 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
sarvaambaram sarva-varnam, sarva-gandhanulepanam । sarva-puspai pujyamanam, namaami rin-muktaye ।। 10 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
bhadra-jatam ch rupam ch, pashankush-dharam shubham । sarva-vign-haram devam, namaami rin-muktaye ।। 11 ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
yah pathet rin-haram-stotram, pratah-kale sudhi narah । ।। iti shri rinamochan mahaganpati stotra sampurnam ।।
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
आरती चालीसा स्तुतियाँ सूक्तम् अष्टकम् सहस्त्रनाम सूर्य स्तोत्रम् चन्द्र स्तोत्रम् मंगल स्तोत्रम् बुध स्तोत्रम् बृहस्पति स्तोत्रम् शुक्र स्तोत्रम् शनि स्तोत्रम् राहू स्तोत्रम् केतु स्तोत्रम् नवग्रह स्तोत्रम्
हिंदी भावार्थ: रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ परमेश्वर व वैदिक ऋषि की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
परमेश्वर व वैदिक ऋषि का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिन्मोचन महागणपति स्तोत्रं का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।