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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्री कृष्ण

मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र

मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति भगवान श्री कृष्ण के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा
जप माला तुलसी माला - 1 अथवा 3 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
श्री गणेशाय नमः । मोहिन्युवाच । सर्वेन्द्रियाणां प्रवरं विष्णोरंशं च मानसम् । तदेव कर्मणां बीजं तदुद्भव नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
स्वयमात्मा हि भगवान् ज्ञानरूपो महेश्वरः । नमो ब्रह्मन् जगत्स्रष्टस्तदुद्भव नमोऽस्तु ते ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
सर्वाजित जगज्जेतर्जीवजीव मनोहर । रतिबीज रतिस्वामिन् रतिप्रिय नमोऽस्तु ते ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
शश्वद्योषिदधिष्ठान योषित्प्राणाधिकप्रिय । योषिद्वाहन योषास्त्र योषिद्बन्धो नमोऽस्तु ते ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
पतिसाध्यकराशेषरूपाधार गुणाश्रय । सुगन्धिवातसचिव मधुमित्र नमोऽस्तु ते ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
शश्वद्योनिकृताधार स्त्रीसन्दर्शनवर्धन । विदग्धानां विरहिणां प्राणान्तक नमोऽस्तु ते ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
अकृपा येषु तेऽनर्थं तेषां ज्ञानं विनाशनम् । अनूहरूपभक्तेषु कृपासिन्धो नमोऽस्तु ते ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
तपस्विनां च तपसां विघ्नबीजाय लीलया । मनः सकामं मुक्तानां कर्तुं शक्तं नमोऽस्तु ते ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
तपःसाध्यस्तथाऽऽराध्यः सदैवं पाञ्चभौतिकः । पञ्चेन्द्रियकृताधार पञ्चबाण नमोऽस्तु ते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
ध्यानम् ॥ श्री ॥
मोहिनीत्येवमुक्त्वा तु मनसा सा विधेः पुरः । विरराम नम्रवक्त्रा बभूव ध्यानतत्परा ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
उक्तं माध्यन्दिने कान्ते स्तोत्रमेतन्मनोहरम् । पुरा दुर्वाससा दत्तं मोहिन्यै गन्धमादने ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
स्तोत्रमेतन्महापुण्यं कामी भक्त्या यदा पठेत् । अभीष्टं लभते नूनं निष्कलङ्को भवेद् ध्रुवम् ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
चेष्टां न कुरुते कामः कदाचिदपि तं प्रियम् । भवेदरोगी श्रीयुक्तः कामदेवसमप्रभः । वनितां लभते साध्वीं पत्नीं त्रैलोक्यमोहिनीम् ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ इति श्रीमोहिनीकृतं कृष्णस्तोत्रं समाप्तम् ॥
हिंदी भावार्थ: मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ भगवान श्री कृष्ण की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
भगवान श्री कृष्ण का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहिनिकृत कृष्ण स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।