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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 परमेश्वर व वैदिक ऋषि

भारत भूमात्र स्तोत्र

भारत भूमात्र स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति परमेश्वर व वैदिक ऋषि के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
वन्दे मातरमव्यक्तां व्यक्तां च जननीं पराम् । दीनोहं बालक: कांक्षे सेवां जन्मनि जन्मनि ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
सागरालिंगिता लक्ष्मीं जगज्जनककन्यकाम् । स्थितां हिमनगस्यांके पार्वतीमपरां भजे ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
शुभ्रं धर्मध्वजं मातु: किं वा राशीकृतं यश: । रौप्यं वा मुकुटं दिव्यं वन्देऽहं तं हिमालयम् ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
जाह्नवीयमुनासिन्धुब्रह्मपुत्रशतद्रुभि: । भूदेवीं पंचधाराभि सततं साभिषिचंति ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
नगाधिपं धारयंती मस्तके रत्नमद्वयम् । काश्मीरं च ललाटे भ्रूमध्ये नेपालिकां शुभाम् ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
नर्मदातापतीविंध्यसप्तपीठकमेखलाम् । पूर्वापराचलोरूँ च मलयं पादपीठके । मध्यदेशोदरे गुप्तानक्षयान् धनसंचयान् ।। 6 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
असुराणां पुरी लंका दासी यंच्चरणयो: कृता । तां देवी भारतीं वन्दे मातरं विश्वपूजिताम् ।। 7 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
दृष्टा चैवोपनिषदां गीतशास्त्रप्रवर्तक: । षड्दर्शनप्रवक्ता च भगवान्पाणिनिर्मुनि: ।। 8 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
वाल्मीकिश्र्च तथा व्यास: कालिदासो महाकवि: । आर्यभट्टश्र्च भरत: शंकरोऽद्वैतकेसरी ।। 9 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
भीष्मरामार्जुना वीरा नृपौ रामयुधिष्ठिरौ । सावित्री द्रोपदी सीता दमयंती च तारका ।। 10 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
महाधान्यद्वितीयानि रत्नान्येतानि भूतले । जननी भारती तेषां रत्नगर्भा कथं न सा ।। 11 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
वसुंधरा रत्नगर्भा रसा विश्र्वंभरा क्षमा । सर्वसहा स्थिरा चैव भारती भूसुकन्यका ।। 12 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
रत्नाकर: स्वयं भक्त्या मुक्तो पायनपूर्वकम् । चरणान्क्षालयत्यस्या अंतद्रश्र्च दिवानिशम् ।। 13 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
कैलासद्वारकाधीशौ रामेश्वरपुरीश्र्वरौ । द्वारपाला वभूबुश्र्च सौभाग्यं मातुरद्भुतम् ।। 14 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
पोषयन्ति सदा मातु: पर्वतस्तनमण्डलात् । नि:सृहाश्र्च पयोधारा: संततीनां परंपरा ।। 15 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16 ॥ श्री ॥
पुत्रवत्सलता मातुरगाथा हरिणा स्वयम् । अवतीर्योदरे सोढं गर्भदुखं पुन: पुन: ।। 16 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17 ॥ श्री ॥
मरणे जन्मकाले च मुमूर्षुर्नवबालक: । त्वदंके चैव संशेते अहो वत्सलता तव ।। 17 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18 ॥ श्री ॥
पद्मालया त्वमेवासि त्वमेव च सरस्वती । अन्नपूर्णा त्वमेवासि त्वमेव च शिवा सती ।। 18 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19 ॥ श्री ॥
त्वदृक्षा: कल्पवृक्षाश्र्च चिंतामणिशिला: शिला: । त्वद्वनं नन्दनं साक्षात्साक्षात्वं स्वर्गदेवता ।। 19 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 20 ॥ श्री ॥
प्रतिजन्मनि मे चित्तं वित्तं देहश्र्च संतति: । त्वत्सेवानिरता भूयुर्माता त्वं करुणामयी ।। 20 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 20): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 21 ॥ श्री ॥
न मे वांछाऽस्ति यशसि विद्वत्तवे न च वा सुखे । प्रभुत्वं नैव वा स्वर्गे मोक्षेत्यानंददायके ।। 21 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 21): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 22 ॥ श्री ॥
परं च भारते जनम मानवस्य च वा पशो: । विहंगस्य च वा जन्तोर्व्रक्षपाषाणयोरपि ।। 22 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 22): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 23 ॥ श्री ॥
निरंतरं भवतु मे मातृ सेवांशभाग्यभाक् । एषैव वांछा ह्रदये साक्षी सर्वात्मक: प्रभु: ।। 23 ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक 23): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
।। इति भारत भूमातृ स्तोत्र संपूर्णम्‌ ।।
हिंदी भावार्थ: भारत भूमात्र स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ परमेश्वर व वैदिक ऋषि की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
परमेश्वर व वैदिक ऋषि का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत भूमात्र स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।