अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्... आदि शंकराचार्य द्वारा रचित यह आठ पदों का स्तोत्र भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के मधुरतम नामों की अमृत-धारा है।
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प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके तुलसी माला - 1 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।
यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।
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