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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 परमेश्वर व वैदिक ऋषि

आनंद लहरी स्तोत्र

आनंद लहरी स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। शंकराचार्य स्तोत्ररत्न में वर्णित यह स्तुति परमेश्वर व वैदिक ऋषि के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ शंकराचार्य स्तोत्ररत्न
शुभ दिन / तिथि नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
भवानि स्तोतुं त्वां प्रभवति चतुर्भिर्न वदनै: प्रजानामीशानस्त्रिपुरमथन: पञ्चभिरपी । न षड्भि: सेनानीर्दशशतमुखैरप्यहिपतिस्तदान्येषां केषां कथय कथमस्मिन्नवसर: ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
घृतक्षीरद्राक्षामधुमधुरिमा कैरपि पदैर्विशिष्यानाख्येयो भवति रसनामात्रविषय: । तथा ते सौन्दर्यं परमशिवद्रंगमात्रविषय: कथंकारं ब्रूम: सकलनिगमागोचरगुणे ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
मुखे ते ताम्बूलं नयनयुगले कज्जलकला ललाटे काश्मीरं विलसति गले मौक्तिकलता । स्फुरत्कांची शाटी पृथुकटितटे हाटकमयी भजामि त्वां गौरीं नगपतिकिशोरीमविरतम् ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
विराजन्मन्दारद्रुमकुसुमहारस्तनतटी नदद्वीणानादश्रवणविलसत्कुण्डलगुणा । नतांगी मातंगीरुचिरगतिभंगी भगवती सती शम्भोरम्भोरूहचटुलचक्षुर्विजयते ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
नवीनार्कभ्राजन्मणिकनकभूषापरिकरैर्व्रतांगी सारंगीरुचिरनयनांगीकृतशिवा । तड़ित्पीता पीताम्बरललितमंजीरसुभगा ममापर्णा पूर्णा निरवधिसुखैरस्तु सुमुखी ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
हिमाद्रे: संभूता सुललितकरै: पल्लवयुता सुपुष्पा मुक्ताभिर्भ्रमरकलिता चालकभरै: । कृतस्थाणुस्थाना कुचफलनता सूक्तिसरसा रुजां ह्न्त्री गन्त्री विलसति चिदानन्दलतिका ।। 6 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
सपर्णामाकीर्णां कतिपयगुणै: सादरमिह श्रयन्त्यन्ये वल्लीं मम तु मतिरेवं विलसति । अपर्णैका सेव्या जगति सकलैर्यत्परिवृत: पुराणोऽपि स्थाणु: फलति किल कैवल्यपदवीम् ।। 7 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
विधात्री धर्माणां त्वमसि सकलाम्नायजननी त्वमर्थानां मूलं धनदनमनीयांगघ्रिकमले । त्वमादि: कामानां जननि कृतकंदर्पविजये सतां मुक्तेर्बीजं त्वमसि परमब्रह्ममहिषी ।। 8 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
प्रभूता भक्तिस्ते यदपि न ममालोलमनसस्त्वया तु श्रीमत्या सदयमवलोक्योऽहमधुना । पयोद: पानीयं दिशति मधुरं चातकमुखे भृशं शंके कैर्वा विधिभिरनुनीता मम मति: ।। 9 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
कृपापांगलोकं वितर तरसा साधुचरिते न ते युक्तोपेक्षा मयि शरणदीक्षामुपगते । न चेदिष्टं दधादनुपदमहो कल्पलतिका विशेष: सामान्यै: कथमितरवल्लीपरिकरै: ।। 10 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
महान्तं विश्वासं तव चरणपनकेरूहयुगे निधायान्यन्नैवाश्रितमिह मया दैवतमुमे । तथापि त्वच्चेतो यदि मयि न जायेत सदयं निरालम्बो लम्बोदरजननि कं यामि शरणम् ।। 11 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
अय: स्पर्शे लग्नं सपदि लभते हेमपदवीं यथा रथ्यापाथ: शुचि भवति गंगौघमिलितम् । तथा तत्तत्पापैरतिमलिनमंतर्मम यदि त्वयि प्रेम्णासक्तं कथमिव न जायेत विमलम् ।। 12 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
त्वदन्यस्मादिच्छाविषयफललाभे न नियमस्त्वमर्थानामिच्छाधिकमपि समर्था वितरणे । इति प्राहु: प्राञच: कमलभवनाधास्त्वयि मनस्त्वदासक्तं नक्तं दिवमुचितमीशानि कुरु तत् ।। 13 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
स्फुरन्नानारत्नस्फटिकमयभित्तिप्रतिफलत्त्वदाकारं चञचच्छशधरकलासौधशिखरम् । मुकुन्दब्रह्मोंद्रप्रभृतिपरिवारं विजयते तवागारं रम्यं त्रिभुवनमहाराजग्रहिणी ।। 14 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
निवास: कैलासे विधिशतमखाधा: स्तुतिकरा: कुटुम्बं त्रैलोक्यं कृतकरपुट: सिद्धिनिकर: । महेश: प्राणेशस्तदवनिधराधीशतनये न ते सौभाग्यस्य क्वचिद्पि मनागस्ति तुलना ।। 15 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16 ॥ श्री ॥
वृषो वृद्धो यानं विषमशनमाशा निवसनं समग्रा सामग्री जगति विदितैवं स्मररिपोर्यदेतस्यैश्वर्यं तव जननि सौभाग्यमहिमा ।। 16 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17 ॥ श्री ॥
अशेषब्रह्माण्डप्रलयविधिनैसर्गिकमति: श्मशानेष्वासीन: कृतभसितलेप: पशुपति: । दधौ कण्ठे हालाहलमखिलभूगोलकृपया भवत्या: संगत्या: फलमिति च कल्याणि कलये ।। 17 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18 ॥ श्री ॥
त्वदीयं सौन्दर्यं निरतिशयमालोक्य परया भियैवासीद्गंगा जलमयतनु: शैलतनये । तदेतस्यास्तस्माद्वदनकमलं वीक्ष्य कृपया प्रतिष्ठामातन्वन्निजशिरसिवासेन गिरीश: ।। 18 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19 ॥ श्री ॥
विशालश्रीखण्डद्रवमृगमदाकीर्णघुसृणप्रसूनव्यामिश्रं भगवति तवाभ्यंगसलिलम् । समादाय स्त्रष्टा चलितपदपांसून्निजकरै: समाधत्ते सृष्टिं विबुधपुरपंकेरूहदृशाम् ।। 19 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 20 ॥ श्री ॥
वसन्ते सानन्दे कुसुमितलताभि: परिवृते स्फुरन्नानापद्मे सरसि कलहंसालिसुभगे । सखिभि: खेलन्तीं मलयपवनन्दोलितजले स्मरेधस्त्वां तस्य ज्वरजनितपीड़ापसरति ।। 20 ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक 20): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
।। इति आनन्द लहरी स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।
हिंदी भावार्थ: आनंद लहरी स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ परमेश्वर व वैदिक ऋषि की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
परमेश्वर व वैदिक ऋषि का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आनंद लहरी स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।