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BHAKTI KI SHAKTI
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🪔 माँ शीतला देवी ⏰ शीतला सप्तमी व अष्टमी, बासौड़ा पर्व, मंगलवार

श्री शीतला माता जी की आरती

माँ शीतला ज्वर, चेचक, दाह और संक्रामक व्याधियों का शमन करने वाली करुणामयी देवी हैं। यह शीतलता और आरोग्य प्रदान करती हैं।

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॥ मुख्य टेक / मुखड़ा ॥

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता। आदि ज्योति महारानी, सब सुख की दाता॥ जय शीतला माता॥

॥ संपूर्ण आरती कड़ियां ॥
1

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता। आदि ज्योति महारानी, सब सुख की दाता॥

2

गर्दभ वाहन सोहे, कर में झाड़ू भारी। कलश लिए अमृत का, शीतलता संसारी॥

3

चेचक दाह ज्वर आदि, सब व्याधि नशावे। शीतल जल जो छिड़के, शांत सब हो जावे॥

4

नीम की डाली साजे, मस्तक मुकुट ललाट। दया दृष्टि से देखत, खुलत भाग्य कपाट॥

5

बासी भोजन का भोग, भक्तन चाव चढ़ावे। शीतलाष्टमी पर्व पर, मंगल गान सुहावे॥

6

संतान की रक्षा करती, मात-पिता सुखदाई। दरिद्रता भय दूर करे, मैया वरदायी॥

7

शीतला माता की आरती, जो नर-नारी गावे। आरोग्य सुख काया पावे, संकट नहिं आवे॥

8

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता। आदि ज्योति महारानी, सब सुख की दाता॥

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता। आदि ज्योति महारानी, सब सुख की दाता॥ जय शीतला माता॥

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Sacred Aarti Exposition & Meaning · आरती भावार्थ व सारांश

Divine Meaning & English Summary of Shri Sheetla Mata Aarti

This sacred Aarti is an offering of light and camphor flame to Maa Sheetla Devi. In Sanatan Dharma, the Aarti ritual symbolizes burning away ego and illuminating life with the divine presence of the Supreme.

✨ Stanza-by-Stanza Devotional Significance

✦ Refrain & Salutations

Hails the glory of Maa Sheetla Devi, expressing deep devotional surrender.

✦ Divine Attributes & Feats

Recalls the protective acts and compassionate pastimes performed for devotees.

✦ Boon of Peace & Grace

Prays for forgiveness of human shortcomings, protection from distress, and permanent auspiciousness in the home.

🌟 Spiritual Fruits & Vastu Household Blessings (आरती फल)

Performing this Aarti at dawn or dusk cleanses household energy (Vastu), dissolves fear, and cultivates loving peace and harmony.

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आरती करने की शास्त्रोक्त विधि

शीतला अष्टमी पर बासौड़ा (शीतल/ठंडा भोजन) का नैवेद्य अर्पित करें, नीम की पत्तियां व शीतल जल अर्पित कर आरती करें।

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आरती के चमत्कारी लाभ

ज्वर, त्वचा रोग, चेचक व शारीरिक दाह से शांति मिलती है, संतान दीर्घायु और निरोगी होती है।