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BHAKTI KI SHAKTI
📜 युगल सरकार श्री सीता-राम जी • 9 श्लोक

सीता राम अष्टकम्

अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान युगल स्वरूप श्री सीताराम जी की यह स्तुति घर में मर्यादा, सुख-शांति, परस्पर प्रेम और रामराज्य प्रदान करती है।

रचयिता महर्षि वाल्मीकि / रामायण परम्परा
स्रोत / ग्रन्थ अध्यात्म रामायण / आनन्द रामायण
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त रामनवमी, विवाह पंचमी, मंगलवार, रविवार
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
अयोध्यापुरनेतारं जानकीहृदयानन्दकम् । रघुकुलतिलकं वन्दे सीतारामं सनातनम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: अयोध्यापुरी के अधिपति, माता जानकी के हृदय को आनंद देने वाले, रघुकुल के शिरोमणि तिलक, सनातन युगल स्वरूप भगवान सीताराम को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Sovereign of Ayodhya, delight of Janaki's heart, crest jewel of the Raghu dynasty, eternal divine couple Sri Sita-Rama, I bow to You.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
सुवर्णकुण्डलोद्भासं धनुर्बाणधरं विभुम् । रत्नसिंहासनारूढं सीतारामं नमाम्यहम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: सुवर्ण के कुण्डलों से सुशोभित, हाथों में कोदण्ड धनुष और बाण धारण करने वाले, सर्वव्यापी और रत्नजड़ित सिंहासन पर माता जानकी सहित विराजमान सीताराम को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Adorned with golden earrings, wielding the bow and arrow, all-pervading, seated upon the jeweled throne alongside Janaki, I bow to Sita-Rama.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
दशरथानन्दवर्धनं कौसल्याहर्षकारकम् । लक्ष्मणप्रियभ्रातारं सीतारामं नमाम्यहम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: महाराज दशरथ के आनंद को बढ़ाने वाले, माता कौशल्या के हर्ष के कारण और लक्ष्मण जी के परम प्रिय भ्राता भगवान सीताराम को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Augmenting King Dasharatha's joy, source of delight to Mother Kausalya, beloved elder brother of Lakshmana, I bow to Sita-Rama.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
विश्वामित्रयज्ञरक्षकं ताटकाकुलनाशनम् । जनकसभाधनुर्भङ्गं सीतारामं नमाम्यहम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करने वाले, ताड़का के राक्षस कुल का नाश करने वाले और राजा जनक की सभा में शिवधनुष को भंग करने वाले सीताराम को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Protector of Sage Vishvamitra's sacrifice, vanquisher of Tataka's clan, breaker of Shiva's bow in King Janaka's assembly, I bow to Sita-Rama.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
दण्डकारण्यविहारिणं खरदूषणघातिनम् । सुग्रीवमैत्रीकरणं सीतारामं नमाम्यहम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: दण्डकारण्य के पवित्र वनों में विचरण करने वाले, खर और दूषण का वध करने वाले और सुग्रीव के साथ पावन मैत्री करने वाले भगवान सीताराम को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Wandering in Dandaka forest, slayer of demons Khara and Dushana, forging sacred alliance with Sugriva, I bow to Sita-Rama.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
समुद्रसेतुबन्धनं लङ्केशकुलमर्दनम् । विभीषणाभयप्रदं सीतारामं नमाम्यहम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: समुद्र पर सेतु बांधने वाले, लंकापति रावण के कुल का मर्दन करने वाले और शरणागत विभीषण को अभयदान देकर लंका का राज्य देने वाले सीताराम को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Bridge-builder across the ocean, crusher of Ravana's clan, bestower of fearlessness and kingdom on Vibhishana, I bow to Sita-Rama.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
सीतया सहितं शान्तं भरताद्यनुसेवितम् । हनुमान्मुखभक्तोद्यं सीतारामं नमाम्यहम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: माता सीता सहित परम शांत स्वरूप, भरत आदि भाइयों द्वारा सेवित और श्री हनुमान जी आदि प्रमुख भक्तों से घिरे भगवान सीताराम को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: United serenely with Sita, served lovingly by Bharata and brothers, surrounded by foremost devotees headed by Hanuman, I bow to Sita-Rama.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
धर्मसंस्थापनपरं सर्वलोकशरण्यकम् । रामराज्यप्रदं देवं सीतारामं नमाम्यहम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: धर्म की स्थापना में सदा तत्पर, समस्त लोकों के एकमात्र शरणदाता और इस पृथ्वी पर रामराज्य का परम सुख प्रदान करने वाले भगवान सीताराम को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Dedicated to upholding cosmic Dharma, supreme refuge of all worlds, bestower of ideal Rama Rajya on earth, I bow to Sita-Rama.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
सीतारामगुणस्याष्टकं यः पठेच्छ्रद्धया नरः । स भुक्त्वा विपुलान् भोगानन्ते साकेतमाप्नुयात् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से भगवान सीताराम के इस पावन गुणाष्टकम का पाठ करता है, वह इस संसार में समस्त सुख और सौभाग्य प्राप्त कर अंत में परम साकेत धाम को प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever devoutly recites this octet of virtues of Sita-Rama enjoys abundant earthly blessings and reaches the eternal realm of Saketa upon departure.
✨ समाप्ति
।। इति श्री सीता राम अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातः स्नान कर पीले या केसरिया वस्त्र पहनें।
  • 2 श्रीराम दरबार के समक्ष घी का दीपक जलाएं और तुलसीदल व पीले फल अर्पित करें।
  • 3 हाथ जोड़कर 'सीतारामं नमाम्यहम्' भाव से अष्टक का सस्वर पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ परिवार में मर्यादा, एकता, भाइयों में प्रेम और दाम्पत्य सुख की वृद्धि होती है।
  • ✔ घर से दरिद्रता, कलह और संकट दूर होकर राम-राज्य जैसी समृद्धि आती है।
  • ✔ भगवान सीताराम की कृपा से अंत समय में पावन साकेत धाम की प्राप्ति होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: रामनवमी, विवाह पंचमी, मंगलवार, रविवार