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भगवती महादुर्गा / जगदंबा
दुर्गा सप्तशती (पंचम अध्याय)
ऋषि: मेधा ऋषि
छंद: अनुष्टुप्
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं
Tantroktadevi Suktam
समस्त प्राणियों में चेतना, बुद्धि, शक्ति और दया रूप में स्थित पराशक्ति भगवती दुर्गा की अप्रतिम स्तुति (या देवी सर्वभूतेषु...)।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा 1
वेदमंत्र
Tantroktdevi
Suktam
१.नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम: ।
नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्म ताम ॥
सरल भावार्थ:
देवी को नमस्कार है, महादेवी शिवा को सर्वदा नमस्कार है। प्रकृति एवं भद्रा को प्रणाम है। जगदम्बा को नियमपूर्वक नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2
वेदमंत्र
२.रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नम: ।
ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नम: ॥
सरल भावार्थ:
रौद्रा को नमस्कार है, नित्या, गौरी एवं धात्री को बारम्बार नमस्कार है। ज्योत्स्नामयी, चन्द्ररूपिणी एवं सुखस्वरूपा देवी को सतत प्रणाम है।
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3
वेदमंत्र
३.कल्याण्यै प्रणतां वृध्द्यै सिद्ध्यै कुर्मो नमो नम: ।
नैर्ऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
शरणागतों का कल्याण करने वाली वृद्धि एवं सिद्धिरूपा देवी को बारम्बार नमस्कार है। नैऋती (राक्षसों की लक्ष्मी) राजाओं की लक्ष्मी तथा शर्वाणी (शिवपत्नी) -स्वरूपा आप जगदम्बा को बारम्बार नमस्कार है।
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4
वेदमंत्र
४.दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै ।
ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नम: ॥
सरल भावार्थ:
दुर्गा, दुर्गम संकट से बाहर निकलने वाली, सबकी आधारभूता, सर्वकारिणी, ख्याति, कृष्णा और धूम्रादेवी को सर्वदा नमस्कार है।
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5
वेदमंत्र
५.अति सौम्याति-रौद्रायै नतास्तस्यै नमो नम: ।
नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्य नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
अत्यंत सौम्य तथा अत्यंत रौद्र रूपा देवी को [मैं] नमस्कार करता हूँ, उन्हें हमारा बारम्बार प्रणाम है, जगत की आधारभूता कृति देवी को बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6
वेदमंत्र
६.या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में विष्णुमाया के रूप में कही जाती हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 7
वेदमंत्र
७.या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में चेतना कहलाती हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 7): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 8
वेदमंत्र
८.या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में बुद्धि रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 8): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 9
वेदमंत्र
९.या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में निद्रा रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 9): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 10
वेदमंत्र
१०.या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में क्षुधा (भूख ) रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 10): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 11
वेदमंत्र
११.या देवी सर्वभूतेषुच्छायारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में छाया रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 11): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 12
वेदमंत्र
१२.या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 12): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 13
वेदमंत्र
१३.या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में तृष्णा (प्यास) रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 13): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 14
वेदमंत्र
१४.या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में क्षान्ति (क्षमा) रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है।
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 14): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 15
वेदमंत्र
१५.या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में जाति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 15): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 16
वेदमंत्र
१६.या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में लज्जा रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 16): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 17
वेदमंत्र
१७.या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में शान्ति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 17): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 18
वेदमंत्र
१८.या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में श्रद्धा रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 18): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 19
वेदमंत्र
१९.या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में शांति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 19): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 20
वेदमंत्र
२०.या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में लक्ष्मी रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 20): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 21
वेदमंत्र
२१.या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में वृत्ति (स्वभाव) रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 21): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 22
वेदमंत्र
२२.या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में स्मृति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 22): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 23
वेदमंत्र
२३.या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में दया रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 23): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 24
वेदमंत्र
२४.या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में तुष्टि रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 24): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 25
वेदमंत्र
२५.या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में माता रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 25): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 26
वेदमंत्र
२६.या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में भ्रान्ति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 26): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 27
वेदमंत्र
२७.इन्द्रियाणा-मधिप्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या ।
भूतेषु सततं तस्यै वियाप्तिदेव्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो जीवों के इन्द्रिय वर्ग की अधिष्ठात्री देवी एवं सब प्राणियों में सदा व्याप्त रहने वाली हैं, उन व्याप्ति देवी को बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 27): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 28
वेदमंत्र
२८.चितिरूपेण या कृत्स्न-मेतद्-व्याप्य स्थिता जगत् ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यैनमस्तस्यै नमो नम: ॥
सरल भावार्थ:
जो देवी चैतन्य रूप से सम्पूर्ण जगत को व्याप्त करके स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 28): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 29
वेदमंत्र
२९.स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रया- त्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता ।
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ॥
सरल भावार्थ:
पूर्वकालमें अपने अभीष्टकी प्राप्ति होनेसे देवताओंने जिनकी स्तुति की तथा देवराज इन्द्रने बहुत दिनोंतक जिनका सेवन किया, वह कल्याणकी साधनभूता ईश्वरी हमारा कल्याण और मङ्गल करे तथा सारी आपत्तियोंका नाश कर डाले
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 29): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 30
वेदमंत्र
३०.या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितै- रस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यते ।
या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः ॥
सरल भावार्थ:
उद्दण्ड दैत्योंसे सताये हुए हम सभी देवता जिन परमेश्वरीको इस समय नमस्कार करते हैं तथा जो भक्तिसे विनम्र पुरुषोंद्वारा स्मरण की जानेपर तत्काल ही सम्पूर्ण विपत्तियोंका नाश कर देती हैं, वे जगदम्बा हमारा संकट दूर करें
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 30): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 31
वेदमंत्र
॥ इति तंत्रोक्त्देवी सूक्तं संपूर्ण ॥
आरती
सरल भावार्थ:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 31): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation:
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं (ऋचा 31): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
नवरात्रि, प्रत्येक शुक्रवार, अष्टमी एवं नवमी तिथि
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- मां दुर्गा के सम्मुख शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक जलाएं।
- लाल पुष्प, कुमकुम और हलवा-चना या बताशे का भोग लगाएं।
- श्रद्धापूर्वक 'या देवी सर्वभूतेषु' मंत्रों का सस्वर पाठ करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ भय, संताप, शत्रुबाधा और नकारात्मक ऊर्जा से तत्काल मुक्ति मिलती है।
- ✔ साधक में असीम आत्मबल, ओज तथा देवी कृपा का वास होता है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं का पाठ सामान्यतः नवरात्रि, प्रत्येक शुक्रवार, अष्टमी एवं नवमी तिथि के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं का पावन स्रोत दुर्गा सप्तशती (पंचम अध्याय) है। इसके ऋषि मेधा ऋषि तथा छंद अनुष्टुप् है।
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से भय, संताप, शत्रुबाधा और नकारात्मक ऊर्जा से तत्काल मुक्ति मिलती है। तथा साधक में असीम आत्मबल, ओज तथा देवी कृपा का वास होता है। होती है।