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भगवती श्री महालक्ष्मी
ऋग्वेद खिल सूक्त
ऋषि: आनंद, कर्दम, चिक्लीत, श्री
छंद: अनुष्टुप् / त्रिष्टुप्
श्री सूक्तम्
Shri Suktam
धन, धान्य, स्वर्ण, ऐश्वर्य और कीर्ति की अधिष्ठात्री देवी मां श्री सूक्त, सनातन धर्म में लक्ष्मी साधना का परम आधार है।
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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
श्री सूक्तम् मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा १
वेदमंत्र
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् ।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥ १ ॥
सरल भावार्थ:
हे सर्वज्ञ अग्निदेव! सुवर्ण के समान कान्ति वाली, पीताम्बरी, सोने और चांदी के आभूषणों की माला धारण करने वाली, चन्द्रमा के समान शीतल व आह्लाददायिनी महालक्ष्मी का मेरे घर में आह्वान कीजिए।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा २
वेदमंत्र
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥ २ ॥
सरल भावार्थ:
हे अग्निदेव! आप मेरे लिए कभी नष्ट न होने वाली उन महालक्ष्मी को बुलाइए, जिनके आने से मुझे विपुल स्वर्ण, गौएं, अश्व, संतति और परिजन प्राप्त हों।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा ३
वेदमंत्र
अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् ।
श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ॥ ३ ॥
सरल भावार्थ:
जिनके आगे घोड़े दौड़ते हैं, रथ जिनके मध्य में चलता है, जो हाथियों की चिंघाड़ से प्रसन्न होती हैं, उन ऐश्वर्यमयी श्री देवी का मैं आह्वान करता हूँ। वे देवी मुझ पर प्रसन्न हों।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा ४
वेदमंत्र
कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।
पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम् ॥ ४ ॥
सरल भावार्थ:
जो मन्द-मन्द मुस्कराती हैं, सुवर्ण के कोट में विराजमान हैं, दया से आर्द्र हैं, प्रकाशमान हैं, स्वयं तृप्त रहकर भक्तों को तृप्त करती हैं, कमल पर स्थित हैं और कमल के समान कोमल वर्ण वाली हैं, उन श्रीलक्ष्मी को मैं पुकारता हूँ।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा ५
वेदमंत्र
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।
तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ॥ ५ ॥
सरल भावार्थ:
जो चन्द्रमा के समान कान्तिमयी हैं, यश से दमक रही हैं, देवगण जिनकी सेवा करते हैं, जो अत्यंत उदार हैं, उन कमलनयनी लक्ष्मी की मैं शरण लेता हूँ। मेरी दरिद्रता का नाश हो, मैं केवल आपका वरण करता हूँ।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा ६
वेदमंत्र
आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः ।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः ॥ ६ ॥
सरल भावार्थ:
हे सूर्य के समान तेजस्वी देवी! आपके तप से वनस्पतियों में श्रेष्ठ 'बिल्व' (बेल) का वृक्ष उत्पन्न हुआ है। उस वृक्ष के फल मेरे आन्तरिक अज्ञान और बाहरी दरिद्रता व संकटों को दूर करें।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा ७
वेदमंत्र
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह ।
प्रादुर्भूतो सुराष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ॥ ७ ॥
सरल भावार्थ:
कुबेर और कीर्ति मणियों सहित मेरे पास आएं। इस श्रेष्ठ राष्ट्र में उत्पन्न होकर मैं लक्ष्मी की कृपा से अक्षय कीर्ति और अपार समृद्धि प्राप्त करूँ।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा ८
वेदमंत्र
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् ।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वान् निर्णुद मे गृहात् ॥ ८ ॥
सरल भावार्थ:
भूख, प्यास और मलिनता की अधिष्ठात्री ज्येष्ठा अलक्ष्मी (दरिद्रता) का मैं नाश करता हूँ। हे महालक्ष्मी! मेरे घर से समस्त अभाव, विपन्नता और अमंगल को सदा के लिए निकाल दीजिए।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा ९
वेदमंत्र
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् ॥ ९ ॥
सरल भावार्थ:
जो सुगन्धित द्रव्यों से युक्त हैं, जिन्हें पराजित नहीं किया जा सकता, जो नित्य पुष्ट हैं, पशुधन से संपन्न हैं तथा समस्त चराचर प्राणियों की स्वामिनी हैं, उन श्रीलक्ष्मी का मैं आह्वान करता हूँ।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा १०
वेदमंत्र
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि ।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ॥ १० ॥
सरल भावार्थ:
मेरे मन की शुभ कामनाएं, संकल्प और वाणी की सत्यता सिद्ध हो। विविध पशुधन, विपुल अन्न, ऐश्वर्य और उज्ज्वल यश मेरे भीतर स्थायी रूप से निवास करें।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा ११
वेदमंत्र
कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम ।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ॥ ११ ॥
सरल भावार्थ:
हे कर्दम ऋषि! आप लक्ष्मी के पुत्र रूप में प्रकट हुए हैं। आप मुझमें भी निवास करें और कमल की माला धारण करने वाली अपनी माता महालक्ष्मी को मेरे कुल में सदा के लिए स्थापित करें।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा १२
वेदमंत्र
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे ।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ॥ १२ ॥
सरल भावार्थ:
जलदेव स्निग्ध और पावन पदार्थों की सृष्टि करें। हे चिक्लीत (लक्ष्मीपुत्र)! आप मेरे घर में वास करें और माता श्रीलक्ष्मी को मेरे परिवार में सदा के लिए प्रतिष्ठित करें।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा १३
वेदमंत्र
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम् ।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥ १३ ॥
सरल भावार्थ:
हे अग्निदेव! जो करुणा से आर्द्र हैं, पुष्टि देने वाली हैं, स्वर्णवर्णा हैं, कमल की माला से शोभित हैं, उन आह्लादकारिणी स्वर्णमयी महालक्ष्मी को मेरे सम्मुख उपस्थित कीजिए।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा १४
वेदमंत्र
आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् ।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥ १४ ॥
सरल भावार्थ:
जो प्रजा को नियम में रखने वाली राजलक्ष्मी हैं, सुवर्ण के समान तेजस्वी हैं, सूर्य के समान प्रकाशमान हैं, उन परम करुणामयी महालक्ष्मी का मेरे यहाँ आह्वान कीजिए।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
ऋचा १५
वेदमंत्र
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम् ॥ १५ ॥
सरल भावार्थ:
हे अग्निदेव! आप मेरे लिए उन अविनाशिनी महालक्ष्मी को लाइए, जिनकी कृपा से मुझे विपुल सुवर्ण, गौएं, दास-दासी, अश्व और सर्वगुणसंपन्न संतति प्राप्त हो।
English Translation:
Rigvedic Shri Suktam Verse
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
प्रतिदिन, शुक्रवार, धनतेरस, दीपावली
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- कमल गट्टे की माला अथवा स्फटिक माला से 16 ऋचाओं का पाठ करें।
- घी, कमलगट्टा और खीर से हवन करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ अलक्ष्मी (दरिद्रता, कलह व रोग) का स्थायी निष्कासन होता है।
- ✔ व्यापार, नौकरी और समाज में असीम धन और सम्मान मिलता है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री सूक्तम् का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
श्री सूक्तम् का पाठ सामान्यतः प्रतिदिन, शुक्रवार, धनतेरस, दीपावली के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
श्री सूक्तम् का मूल वेद स्रोत क्या है?
श्री सूक्तम् का पावन स्रोत ऋग्वेद खिल सूक्त है। इसके ऋषि आनंद, कर्दम, चिक्लीत, श्री तथा छंद अनुष्टुप् / त्रिष्टुप् है।
श्री सूक्तम् का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से अलक्ष्मी (दरिद्रता, कलह व रोग) का स्थायी निष्कासन होता है। तथा व्यापार, नौकरी और समाज में असीम धन और सम्मान मिलता है। होती है।