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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ नाग देवता / तक्षक, वासुकि अथर्ववेद (कांड 8 व 10) ऋषि: गरुड़ / कश्यप छंद: अनुष्टुप्

सर्प सूक्तम्

Sarpa Suktam

सर्प दंश से रक्षा, विष-निवारण तथा भूमिगत भय के शमन हेतु अथर्ववेदीय सर्प सूक्त।

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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

सर्प सूक्तम् मूल पाठ व भावार्थ

श्लोक १ वेदमंत्र
ॐ अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम् । शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा ॥ १ ॥
Om anantaṃ vāsukiṃ śeṣaṃ padmanābhaṃ ca kambalam | śaṅkhapālaṃ dhṛtarāṣṭraṃ takṣakaṃ kāliyaṃ tathā || 1 ||
सरल भावार्थ: अनन्त, वासुकि, शेषनाग, पद्मनाभ, कम्बल, शङ्खपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिया—इन नव प्रमुख पवित्र नागों का हम स्मरण करते हैं।
English Translation: We meditate upon the nine sacred serpent lords: Ananta, Vasuki, Shesha, Padmanabha, Kambala, Shankhapala, Dhritarashtra, Takshaka, and Kaliya.
श्लोक २ वेदमंत्र
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम् । सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः । तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ २ ॥
Etāni nava nāmāni nāgānāṃ ca mahātmanām | sāyaṅkāle paṭhennityaṃ prātaḥkāle viśeṣataḥ | tasya viṣabhayaṃ nāsti sarvatra vijayī bhavet || 2 ||
सरल भावार्थ: महात्मा नागों के इन नौ पावन नामों का जो व्यक्ति प्रातः व सायं पाठ करता है, उसे सर्पदोष, विषभय व कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और वह सर्वत्र विजयी होता है।
English Translation: Whoever recites these nine sacred names at dawn and dusk becomes free from venomous fear, overcomes Kaal Sarp dosha, and triumphs everywhere.
श्लोक ३ वेदमंत्र
सर्पापसर्प भद्रं ते गच्छ सर्प महाविष । जनमेजयस्य यज्ञान्ते आस्तीकवचनं स्मर ॥ ३ ॥
Sarpāpasarpa bhadraṃ te gaccha sarpa mahāviṣa | janamejayasya yajñānte āstīkavacanaṃ smara || 3 ||
सरल भावार्थ: हे महाविषधर सर्प! आपका कल्याण हो, आप दूर चले जाएं। राजा जनमेजय के सर्पयज्ञ के समय महात्मा आस्तीक मुनि को दिए गए अपने वचन का स्मरण करें और रक्षा करें।
English Translation: O sacred serpents, may peace be upon you; remember the divine promise made to Sage Astika during King Janamejaya's sacrifice and protect us.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: नागपंचमी, मंगलवार

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. नाग देवता का स्मरण कर दुग्ध अर्पित करें और पाठ करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ घर में सर्प या विषैले जीवों के भय से रक्षा होती है।
  • ✔ राहु-केतु जनित पीड़ा शांत होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्प सूक्तम् का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
सर्प सूक्तम् का पाठ सामान्यतः नागपंचमी, मंगलवार के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
सर्प सूक्तम् का मूल वेद स्रोत क्या है?
सर्प सूक्तम् का पावन स्रोत अथर्ववेद (कांड 8 व 10) है। इसके ऋषि गरुड़ / कश्यप तथा छंद अनुष्टुप् है।
सर्प सूक्तम् का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से घर में सर्प या विषैले जीवों के भय से रक्षा होती है। तथा राहु-केतु जनित पीड़ा शांत होती है। होती है।

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