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परब्रह्म / त्याग व संन्यास
यजुर्वेद (तैत्तिरीय आरण्यक)
ऋषि: नारायण
छंद: त्रिष्टुप्
सन्यास सूक्तं
Sannyasa Suktam
संसार के मिथ्यात्व, वैराग्य की महिमा और मोक्ष मार्ग के अनुशीलन हेतु संन्यास दीक्षा का पवित्र सूक्त।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
सन्यास सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा १
वेदमंत्र
न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः ।
परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति ॥ १ ॥
सरल भावार्थ:
न सकाम कर्मों से, न संतति से और न ही अपार धन से अमरता प्राप्त होती है, केवल त्याग और वैराग्य से ही महापुरुषों ने अमृतत्व पाया है। स्वर्ग से भी परे, हृदय गुहा में जो परब्रह्म प्रकाशमान है, यत्नशील संन्यासी उसी में प्रविष्ट होते हैं।
English Translation:
sannyasa-suktam sacred verse
ऋचा २
वेदमंत्र
वेदान्तविज्ञानसुनिश्चितार्थाः संन्यासयोगाद्यतयः शुद्धसत्त्वाः ।
ते ब्रह्मलोकेषु परान्तकाले परामृताः परिमुच्यन्ति सर्वे ॥ २ ॥
सरल भावार्थ:
वेदान्त ज्ञान के द्वारा जिन्होंने सत्य को भली-भांति जान लिया है, जो संन्यास योग द्वारा शुद्ध अंतःकरण वाले हो चुके हैं, वे समस्त यति ब्रह्मलोक में परम पद को प्राप्त कर सदा के लिए मुक्त हो जाते हैं।
English Translation:
sannyasa-suktam sacred verse
ऋचा ३
वेदमंत्र
दह्रं विपापं परवेश्मभूतं यत्पुण्डरीकं पुरमध्यसंस्थम् ।
तत्रापि दह्रे गगनं विशोकस्तस्मिन्यदन्तस्तदुपासितव्यम् ॥ ३ ॥
सरल भावार्थ:
हृदय रूपी कमल में जो पापरहित, सूक्ष्म और शोकमुक्त परम आकाश स्थित है, उसके भीतर जो परब्रह्म परमात्मा हैं, केवल उन्हीं की उपासना करनी चाहिए।
English Translation:
sannyasa-suktam sacred verse
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
संन्यास ग्रहण, संक्रांति, ध्यान काल
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- शांत चित्त से एकांत में बैठकर आत्मचिंतन करते हुए पाठ करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ आसक्ति, लोभ और मानसिक संताप से मुक्ति मिलती है।
- ✔ परम शांति और आत्म-साक्षात्कार सुलभ होता है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सन्यास सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
सन्यास सूक्तं का पाठ सामान्यतः संन्यास ग्रहण, संक्रांति, ध्यान काल के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
सन्यास सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
सन्यास सूक्तं का पावन स्रोत यजुर्वेद (तैत्तिरीय आरण्यक) है। इसके ऋषि नारायण तथा छंद त्रिष्टुप् है।
सन्यास सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से आसक्ति, लोभ और मानसिक संताप से मुक्ति मिलती है। तथा परम शांति और आत्म-साक्षात्कार सुलभ होता है। होती है।