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पवमान सोम
ऋग्वेद (मंडल 9, सूक्त 67 / तैत्तिरीय ब्राह्मण)
ऋषि: सप्तऋषि
छंद: गायत्री
पवमान सूक्तं
Pavamana Suktam
अंतःकरण और शरीर की समस्त अशुद्धियों को धोकर पवित्रता, आरोग्य व दीर्घायु प्रदान करने वाला सूक्त।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
पवमान सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा 1
वेदमंत्र
Pavamana
Suktam
सहस्राक्षं शतधारमृषिभिः पावनं कृतम् ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ १ ॥
सरल भावार्थ:
जो सहस्रों नेत्रवाला, सैकड़ों धाराओं में बहनेवाला तथा ऋषियोंसे पवित्र किया गया है, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ १ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2
वेदमंत्र
येन पूतमन्तरिक्षं यस्मिन्वायुरधिश्रितः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ २ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे अन्तरिक्ष पवित्र हुआ है, वायु जिसमें अधिष्ठित है, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ २ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3
वेदमंत्र
येन पूते द्यावापृथिवी आपः पूता अथो स्वः ।
तेना सहस्त्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ ३ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे द्युलोक और पृथिवी, जल और स्वर्ग पवित्र किये गये हैं, उन सहस्त्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ ३॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4
वेदमंत्र
येन पूते अहोरात्रे दिशः पूता उत येन प्रदिशः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ ४ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे रात और दिन, दिशा-प्रदिशाएँ पवित्र हुई हैं, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ ४ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5
वेदमंत्र
येन पूतौ सूर्याचन्द्रमसौ नक्षत्राणि भूतकृतः सह येन पूताः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ ५ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे सूर्य और चन्द्रमा, नक्षत्र और भौतिक सृष्टि रचनेवाले पदार्थ पवित्र हुए हैं, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ ५ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6
वेदमंत्र
येन पूता वेदिरग्नयः परिधयः सह येन पूताः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ ६ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे वेदी, अग्नियाँ और परिधि पवित्र की गयी हैं, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ ६ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 7
वेदमंत्र
येन पूतं बर्हिराज्यमथो हविर्येन पूतो यज्ञो वषट्कारो हुताहुतिः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ ७ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे कुशा, आज्य, हवि, यज्ञ और वषट्कार तथा हवन की हुई आहुति पवित्र हुए हैं, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ ७ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 7): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 8
वेदमंत्र
येन पूतौ व्रीहियवौ याभ्यां यज्ञो अधिनिर्मितः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ ८ ॥
सरल भावार्थ:
जिसके द्वारा व्रीहि और जौ (अर्थात् प्राणापान) पवित्र हुए हैं, जिससे यज्ञका निर्माण हुआ है, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ ८ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 8): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 9
वेदमंत्र
येन पूता अश्वा गावो अथो पूता अजावयः ।
तेना सहस्त्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ ९ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे अश्व, गौ, अजा, अवि [और पुरुषसंज्ञक] प्राण पवित्र हुए हैं, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ ९ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 9): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 10
वेदमंत्र
येन पूता ऋचः सामानि यजुर्जाह्मणं सह येन पूतम् ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ १० ॥
सरल भावार्थ:
जिसके द्वारा ऋचाएँ, साम, यजु और ब्राह्मण पवित्र हुए हैं, उस सहस्रधारके द्वारा पवमान मुझे पवित्र करे ॥ १० ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 10): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 11
वेदमंत्र
येन पूता अथर्वाङ्गिरसो देवताः सह येन पूताः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ ११ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे अथर्वाङ्गिरस और देवता पवित्र हुए हैं, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ ११ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 11): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 12
वेदमंत्र
येन पूता ऋतवो येनार्तवा येभ्यः संवत्सरो अधिनिर्मितः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ १२ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे ऋतु तथा ऋतुओं में उत्पन्न होनेवाले रस पवित्र हुए हैं, एवं जिससे संवत्सरका निर्माण हुआ है, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ १२ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 12): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 13
वेदमंत्र
येन पूता वनस्पतयो वानस्पत्या ओषधयो वीरुधः सह येन पूताः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ १३ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे वनस्पतियाँ, पुष्पसे फल देनेवाले वृक्ष, ओषधियाँ और लताएँ पवित्र हुई हैं, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ १३ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 13): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 14
वेदमंत्र
येन पूता गन्धर्वाप्सरसः सर्पपुण्यजनाः सह येन पूताः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ १४ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे गन्धर्व और अप्सराएँ, सर्प और यक्ष पवित्र हुए हैं, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ १४ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 14): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 15
वेदमंत्र
येन पूताः पर्वता हिमवन्तो वैश्वानराः परिभुवः सह येन पूताः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ १५ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे हिममण्डित पर्वत, वैश्वानर अग्नियाँ और परिधि पवित्र हुई हैं, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ १५ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 15): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 16
वेदमंत्र
येन पूता नद्यः सिन्धवः समुद्राः सह येन पूताः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ १६ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे नदियाँ, सिंधु आदि महानद और सागर पवित्र हुए हैं, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ १६ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 16): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 17
वेदमंत्र
येन पूता विश्वेदेवाः परमेष्ठी प्रजापतिः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ १७ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे विश्वेदेव और परमेष्ठी प्रजापति पवित्र हुए हैं, उसे सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ १७ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 17): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 18
वेदमंत्र
येन पूतः प्रजापतिर्लोकं विश्वं भूतं स्वराजभार ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ १८ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे पवित्र होकर प्रजापतिने समस्त लोकको, भूतोंको और स्वर्गको धारण किया है, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ १८ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 18): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 19
वेदमंत्र
येन पूतः स्तनयित्नुरपामुत्सः प्रजापतिः ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ १९ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे विद्युत् और जलोंके आश्रय प्रजापालक मेघ पवित्र हुए हैं, उस सहस्रधार सौमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ १९ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 19): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 20
वेदमंत्र
येन पूतमृतं सत्यं तपो दीक्षां पूतयते ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ २० ॥
सरल भावार्थ:
जिससे ऋत और सत्य पवित्र हुए हैं, जो तप और दीक्षाको पवित्र करता है, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ २० ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 20): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 21
वेदमंत्र
येन पूतमिदं सर्वं यद्भूतं यच्च भाव्यम् ।
तेना सहस्रधारेण पवमानः पुनातु माम् ॥ २१ ॥
सरल भावार्थ:
जिससे जो कुछ भूत और भविष्य है, सभी पवित्र हुआ है, उस सहस्रधार सोमसे पवमान मुझे पवित्र करे ॥ २१ ॥
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 21): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 22
वेदमंत्र
॥ इति पवमान सूक्तं संपूर्ण ॥
आरती
सरल भावार्थ:
पवमान सूक्तं (ऋचा 22): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation:
पवमान सूक्तं (ऋचा 22): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
प्रतिदिन प्रातः स्नान के समय, पूर्णिमा, सोमवती अमावस्या
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- स्नान के समय या पूजा से पूर्व पवित्र जल का अभिमंत्रण करें।
- पवमान सूक्त का जप करते हुए जल का मार्जन करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ पापों और अज्ञान का क्षय होकर मन निर्मल होता है।
- ✔ समस्त असाध्य रोगों में आरोग्य लाभ मिलता है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पवमान सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
पवमान सूक्तं का पाठ सामान्यतः प्रतिदिन प्रातः स्नान के समय, पूर्णिमा, सोमवती अमावस्या के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
पवमान सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
पवमान सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 9, सूक्त 67 / तैत्तिरीय ब्राह्मण) है। इसके ऋषि सप्तऋषि तथा छंद गायत्री है।
पवमान सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से पापों और अज्ञान का क्षय होकर मन निर्मल होता है। तथा समस्त असाध्य रोगों में आरोग्य लाभ मिलता है। होती है।