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पर्जन्य देव (वर्षा व मेघ)
ऋग्वेद (मंडल 5, सूक्त 83)
ऋषि: भौम अत्रि
छंद: त्रिष्टुप् / जगती
पर्जन्य सूक्तं
Parjanya Suktam
समय पर उत्तम वृष्टि, कृषि समृद्धि तथा जल-संकट के निवारण हेतु उच्चारित पावन वैदिक वर्षा सूक्त।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
पर्जन्य सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा 1
वेदमंत्र
Parjanya
Suktam
आपो यं वः प्रथमं देवयन्त इन्द्रानमूर्मिमकृण्वतेळः ॥
तं वो वयं शुचिमरिप्रमद्य घृतेप्रुषं मधुमन्तं वनेम ॥
सरल भावार्थ:
हे जलदेव! देवत्व के इच्छुकों के द्वारा इन्द्रदेव के पीने के लिए भूमि पर प्रवाहित शुद्ध जल को मिलाकर सोमरस बनाया गया है। शुद्ध पापरहित, मधुर रसयुक्त सोम का हम भी पान करेंगे।
English Translation:
पर्जन्य सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2
वेदमंत्र
तमूर्मिमापो मधुमत्तमं वोSपां नपादवत्वा शुहेमा ॥
यस्मिन्निन्द्रो वसुभिर्मादयाते तमश्याम देवयन्तो वो अद्य ॥
सरल भावार्थ:
हे जलदेवता! आपका मधुर प्रवाह सोमरस में मिला है। उसे शीघ्रगामी अग्निदेव सुरक्षित रखें। उसी सोम के पान से वसुओं के साथ इन्द्रदेव मत्त होते हैं। हम देवत्त्व की इच्छावाले आज उसे प्राप्त करेंगे।
English Translation:
पर्जन्य सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3
वेदमंत्र
शतपवित्राः स्वधया मदन्तीर्देवीर्देवानामपि यन्ति पाथः ॥
ता इन्द्रस्य न मिनन्तिं व्रतानि सिन्धुभ्यो हण्यं घृतवज्जुहोत ॥
सरल भावार्थ:
ये जलदेवता हर प्रकार से पवित्र करके तृप्ति सहित प्राणियों में प्रसन्नता भरते हैं। वे जलदेव यज्ञ में पधारते हैं, परन्तु विघ्न नहीं डालते। इसलिए नदियों के निरंतर प्रवाह के लिए यज्ञ करते रहें।
English Translation:
पर्जन्य सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4
वेदमंत्र
याः सूर्यो रश्मिभिराततान याम्य इन्द्री अरदद् गातुभूर्मिम् ॥
तो सिन्धवो वरिवो धातना नो यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः ॥
सरल भावार्थ:
जिस जल को सूर्यदेव अपनी रश्मियों के द्वारा बढ़ाते हैं एवं इन्द्रदेव के द्वारा जिन्हें प्रवाहित होने का मार्ग दिया गया है, हे सिन्धो (जल प्रवाहों)! आप उन जलधाराओं से हमें धन-धान्य से परिपूर्ण करें तथा कल्याणप्रद साधनों से हमारी रक्षा करें। पर्जन्य सूक्तं विशेषताए: पर्जन्य सूक्तं का पाठ किया जाए तो, इस सूक्तं
English Translation:
पर्जन्य सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5
वेदमंत्र
का बहुत लाभ मिलता है, यह सूक्तं शीघ्र ही फल देने लग जाते है। यदि साधक इस सूक्तं का पाठ प्रतिदिन करने से बुराइया खुद- ब- खुद दूर होने लग जाती है साथ ही सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। अपने परिवार जनों का स्वस्थ्य ठीक रहता है और लम्बे समय से बीमार व्यक्ति को इस सूक्तं का पाठ सच्चे मन से करने पर रोग मुक्त हो जाता है। यदि मनुष्य जीवन की सभी प्रकार के भय, डर से मुक्ति चाहता है तो वह इस सूक्तं का पाठ करे।
आरती
सरल भावार्थ:
पर्जन्य सूक्तं (ऋचा 5): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation:
पर्जन्य सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
वर्षा ऋतु, अनावृष्टि काल, सोमवार
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- जलपात्र में शुद्ध जल लेकर वरुण व पर्जन्य देव का आह्वान करें।
- पर्जन्य सूक्त का पाठ करते हुए जल अर्घ्य प्रदान करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ सूखे व जल-अभाव से मुक्ति मिलती है तथा समय पर सुवृष्टि होती है।
- ✔ फसलों और हरियाली की रक्षा होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पर्जन्य सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
पर्जन्य सूक्तं का पाठ सामान्यतः वर्षा ऋतु, अनावृष्टि काल, सोमवार के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
पर्जन्य सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
पर्जन्य सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 5, सूक्त 83) है। इसके ऋषि भौम अत्रि तथा छंद त्रिष्टुप् / जगती है।
पर्जन्य सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से सूखे व जल-अभाव से मुक्ति मिलती है तथा समय पर सुवृष्टि होती है। तथा फसलों और हरियाली की रक्षा होती है। होती है।