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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ महामृत्युंजय शिव ऋग्वेद खिल / मार्कण्डेय पुराण ऋषि: ऋषि मार्कण्डेय / शुक्राचार्य छंद: अनुष्टुप्

मृतसंजीवन सूक्तं

Mritasanjivana Suktam

अकाल मृत्यु के निवारण, असाध्य रोगों से रक्षा और दीर्घायु प्रदान करने वाली अमृतमयी संजीवनी विद्या।

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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

मृतसंजीवन सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
Mritsanjeevan Suktam एवमारध्य गौरीशं देवं मृत्युञ्जयमेश्वरं। मृतसञ्जीवनं नाम्ना कवचं प्रजपेत् सदा ॥१॥
सरल भावार्थ: गौरीपति मृत्युञ्जयेश्र्वर भगवान् शंकर की विधिपूर्वक आराधना करने के पश्र्चात भक्तको सदा मृतसञ्जीवन नामक कवचका सुस्पष्ट पाठ करना चाहिये।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2 वेदमंत्र
सारात् सारतरं पुण्यं गुह्याद्गुह्यतरं शुभं। महादेवस्य कवचं मृतसञ्जीवनामकं ॥ २॥-
सरल भावार्थ: महादेव भगवान् शङ्कर का यह मृतसञ्जीवन नामक कवच का तत्त्वका भी तत्त्व है, पुण्यप्रद है गुह्य और मङ्गल प्रदान करनेवाला है।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3 वेदमंत्र
समाहितमना भूत्वा शृणुष्व कवचं शुभं। शृत्वैतद्दिव्य कवचं रहस्यं कुरु सर्वदा ॥३॥
सरल भावार्थ: [आचार्य शिष्य को उपदेश करते हैं कि – हे वत्स! ] अपने मनको एकाग्र करके इस मृतसञ्जीवन कवच को सुनो। यह परम कल्याणकारी दिव्य कवच है। इसकी गोपनीयता सदा बनाये रखना।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4 वेदमंत्र
वराभयकरो यज्वा सर्वदेवनिषेवितः। मृत्युञ्जयो महादेवः प्राच्यां मां पातु सर्वदा ॥४॥
सरल भावार्थ: जरा से अभय करने वाले, निरन्तर यज्ञ करनेवाले, सभी देवतओं से आराधित हे मृत्युञ्जय महादेव ! आप पर्व-दिशामें मेरी सदा रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5 वेदमंत्र
दधाअनः शक्तिमभयां त्रिमुखं षड्भुजः प्रभुः। सदाशिवोऽग्निरूपी मामाग्नेय्यां पातु सर्वदा ॥५॥
सरल भावार्थ: अभय प्रदान करने वाली शक्ति को धारण करने वाले, तीन मुखोंवाले तथा छ: भुजओं वाले, अग्रिरूपी प्रभु सदाशिव अग्रिकोण में मेरी सदा रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6 वेदमंत्र
अष्टदसभुजोपेतो दण्डाभयकरो विभुः। यमरूपि महादेवो दक्षिणस्यां सदावतु ॥६॥
सरल भावार्थ: अट्ठारह भुजाओं से युक्त, हाथ में दण्ड और अभयमुद्रा धारण करनेवाले, सर्वत्र व्याप्त यमरुपी महादेव शिव दक्षिण-दिशामें मेरी सदा रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 7 वेदमंत्र
खड्गाभयकरो धीरो रक्षोगणनिषेवितः। रक्षोरूपी महेशो मां नैरृत्यां सर्वदावतु ॥७॥
सरल भावार्थ: हाथमें खड्ग और अभयमुद्रा धारण करने वाले, धैर्यशाली, दैत्यगणों से आराधित रक्षोरुपी महेश नैर्ऋत्यकोण में मेरी सदा रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 7): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 8 वेदमंत्र
पाशाभयभुजः सर्वरत्नाकरनिषेवितः। वरुणात्मा महादेवः पश्चिमे मां सदावतु ॥८॥-
सरल भावार्थ: हाथमें अभयमुद्रा और पाश धाराण करनेवाले, शभी रत्नाकरों से सेवित, वरुणस्वरूप महादेव भगवान् शंकर पश्चिम- दिशा में मेरी सदा रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 8): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 9 वेदमंत्र
गदाभयकरः प्राणनायकः सर्वदागतिः। वायव्यां मारुतात्मा मां शङ्करः पातु सर्वदा ॥९॥
सरल भावार्थ: हाथों में गदा और अभयमुद्रा धारण करनेवाले, प्राणो के रक्षक, सर्वदा गतिशील वायुस्वरूप शंकरजी वायव्यकोण में मेरी सदा रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 9): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 10 वेदमंत्र
शङ्खाभयकरस्थो मां नायकः परमेश्वरः। सर्वात्मान्तरदिग्भागे पातु मां शङ्करः प्रभुः ॥१०॥
सरल भावार्थ: हाथों में शंख और अभयमुद्रा धारण करने वाले नायक (सर्वमार्गद्रष्टा) सर्वात्मा सर्वव्यापक परमेश्वर भगवान् शिव समस्त दिशाओं के मध्यमें मेरी रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 10): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 11 वेदमंत्र
शूलाभयकरः सर्वविद्यानमधिनायकः। ईशानात्मा तथैशान्यां पातु मां परमेश्वरः ॥११॥
सरल भावार्थ: हाथों में शंख और अभयमुद्रा धारण करनेवाले, सभी विद्याओं के स्वामी, ईशानस्वरूप भगवान् परमेश्व शिव ईशानकोण में मेरी रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 11): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 12 वेदमंत्र
ऊर्ध्वभागे ब्रःमरूपी विश्वात्माऽधः सदावतु। शिरो मे शङ्करः पातु ललाटं चन्द्रशेखरः ॥१२॥
सरल भावार्थ: ब्रह्मरूपी शिव मेरी ऊर्ध्वभाग में तथा विश्वात्मस्वरूप शिव अधोभागमें मेरी सदा रक्षा करें। शंकर मेरे सिर की और चन्द्रशेखर मेरे ललाट की रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 12): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 13 वेदमंत्र
भूमध्यं सर्वलोकेशस्त्रिणेत्रो लोचनेऽवतु। भ्रूयुग्मं गिरिशः पातु कर्णौ पातु महेश्वरः ॥१३॥
सरल भावार्थ: मेरे भौंहों के मध्य में सर्वलोकेश और दोनों नेत्रों की त्रिनेत्र भगवान् शंकर रक्षा करें, दोनों भौंहों की रक्षा गिरिश एवं दोनों कानों को रक्षा भगवान् महेश्वर करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 13): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 14 वेदमंत्र
नासिकां मे महादेव ओष्ठौ पातु वृषध्वजः। जिह्वां मे दक्षिणामूर्तिर्दन्तान्मे गिरिशोऽवतु ॥१४॥
सरल भावार्थ: महादेव मेरी नासीकाकी तथा वृषभध्वज मेरे दोनों ओठों की सदा रक्षा करें। दक्षिणामूर्ति मेरी जिह्वा की तथा गिरिश मेरे दाँतों की रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 14): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 15 वेदमंत्र
मृतुय्ञ्जयो मुखं पातु कण्ठं मे नागभूषणः। पिनाकि मत्करौ पातु त्रिशूलि हृदयं मम ॥१५॥
सरल भावार्थ: मृत्युञ्जय मेरे मुखकी एवं नागभूषण भगवान् शिव मेरे कण्ठकी रक्षा करें। पिनाकी मेरे दोनों हाथोंकी तथा त्रिशूली मेरे हृदय की रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 15): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 16 वेदमंत्र
पञ्चवक्त्रः स्तनौ पातु उदरं जगदीश्वरः। नाभिं पातु विरूपाक्षः पार्श्वौ मे पार्वतीपतिः ॥१६॥
सरल भावार्थ: पञ्चवक्त्र मेरे दोनों स्तनो की और जगदीश्वर मेरे उदरकी रक्षा करें। विरूपाक्ष नाभिकी और पार्वतीपति पार्श्वभागकी रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 16): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 17 वेदमंत्र
कटद्वयं गिरीशौ मे पृष्ठं मे प्रमथाधिपः। गुह्यं महेश्वरः पातु ममोरू पातु भैरवः॥१७॥
सरल भावार्थ: गिरीश मेरे दोनों कटिभाग की तथा प्रमथाधिप पृष्टभाग की रक्षा करें। महेश्वर मेरे गुह्यभाग की और भैरव मेरे दोनों ऊरुओं की रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 17): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 18 वेदमंत्र
जानुनी मे जगद्दर्ता जङ्घे मे जगदम्बिका। पादौ मे सततं पातु लोकवन्द्यः सदाशिवः ॥१८॥
सरल भावार्थ: जगद्धर्ता मेरे दोनों घुटनों की, जगदम्बिका मेरे दोनों जंघोकी तथा लोकवन्दनीय सदाशिव निरन्तर मेरे दोनों पैरोंकी रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 18): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 19 वेदमंत्र
गिरिशः पातु मे भार्यां भवः पातु सुतान्मम। मृत्युञ्जयो ममायुष्यं चित्तं मे गणनायकः ॥१९॥
सरल भावार्थ: गिरीश मेरी भार्याकी रक्षा करें तथा भव मेरे पुत्रोंकी रक्षा करें । मृत्युञ्जय मेरे आयुकी गणनायक मेरे चित्तकी रक्षा करें।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 19): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 20 वेदमंत्र
सर्वाङ्गं मे सदा पातु कालकालः सदाशिव:। एतत्ते कवचं पुण्यं देवतानां च दुर्लभम् ॥२०॥
सरल भावार्थ: कालोंके काल सदाशिव मेरे सभी अंगोकी रक्षा करें। [ हे वत्स ! ] देवताओंके लिये भी दुर्लभ इस पवित्र कवचका वर्णन मैंने तुमसे किया है।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 20): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 21 वेदमंत्र
मृतसञ्जीवनं नाम्ना महादेवेन कीर्तितम्। सह्स्रावर्तनं चास्य पुरश्चरणमीरितम् ॥२१॥
सरल भावार्थ: हादेवजीने मृतसञ्जीवन नामक इस कवचको कहा है। इस कवचकी सहस्त्र आवृत्ति को पुरश्चरण कहा गया है।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 21): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 22 वेदमंत्र
यः पठेच्छृणुयान्नित्यं श्रावयेत्सु समाहितः। सकालमृत्युं निर्जित्य सदायुष्यं समश्नुते ॥२२॥
सरल भावार्थ: जो अपने मन को एकाग्र करके नित्य इसका पाठ करता है, सुनता अथावा दूसरों को सुनाता है, वह अकाल मृत्युको जीतकर पूर्ण आयुका उपयोग करता है।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 22): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 23 वेदमंत्र
हस्तेन वा यदा स्पृष्ट्वा मृतं सञ्जीवयत्यसौ। आधयोव्याध्यस्तस्य न भवन्ति कदाचन ॥२३॥
सरल भावार्थ: जो व्यक्ति अपने हाथ से मरणासन्न व्यक्ति के शरीर का स्पर्श करते हुए इस मृतसञ्जीवन कवचका पाठ करता है, उस आसन्नमृत्यु प्राणी के भीतर चेतनता आ जाती है। फिर उसे कभी आधि-व्याधि नहीं होतीं।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 23): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 24 वेदमंत्र
कालमृयुमपि प्राप्तमसौ जयति सर्वदा। अणिमादिगुणैश्वर्यं लभते मानवोत्तमः ॥२४॥
सरल भावार्थ: यह मृतसञ्जीवन कवच कालके गाल में गये हुए व्यक्तिको भी जीवन प्रदान कर ‍देता है और वह मानवोत्तम अणिमा आदि गुणोंसे युक्त ऐश्वर्यको प्राप्त करता है।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 24): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 25 वेदमंत्र
युद्दारम्भे पठित्वेदमष्टाविशतिवारकं। युद्दमध्ये स्थितः शत्रुः सद्यः सर्वैर्न दृश्यते ॥२५॥
सरल भावार्थ: युद्ध आरम्भ होनेके पूर्व जो इस मृतसञ्जीवन कवचका २८ बार पाठ करके रणभूमिमें उपस्थित होता है, वह उस समय सभी शत्रुऔंसे अदृश्य रहता है।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 25): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 26 वेदमंत्र
न ब्रह्मादीनि चास्त्राणि क्षयं कुर्वन्ति तस्य वै। विजयं लभते देवयुद्दमध्येऽपि सर्वदा ॥२६॥
सरल भावार्थ: यदि देवताओ के भी साथ युद्ध छिड जाय तो उसमें उसका विनाश ब्रह्मास्त्र भी नही कर सकते, वह विजय प्राप्त करता है।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 26): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 27 वेदमंत्र
प्रातरूत्थाय सततं यः पठेत्कवचं शुभं। अक्षय्यं लभते सौख्यमिह लोके परत्र च ॥२७॥
सरल भावार्थ: जो प्रात:काल उठकर इस कल्याणकारी कवच सदा पाठ करता है, उसे इस लोक तथा परलोकमें भी अक्षय्य सुख प्राप्त होता है ॥२७॥
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 27): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 28 वेदमंत्र
सर्वव्याधिविनिर्मृक्तः सर्वरोगविवर्जितः। अजरामरणो भूत्वा सदा षोडशवार्षिकः ॥२८॥
सरल भावार्थ: वह सम्पूर्ण व्याधियोंसे मुक्त हो जाता है, सब प्रकारके रोग उसके शरीरसे भाग जाते हैं। वह अजर-अमर होकर सदाके लिये सोलह वर्षवाला व्यक्ति बन जाता है।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 28): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 29 वेदमंत्र
विचरव्यखिलान् लोकान् प्राप्य भोगांश्च दुर्लभान्। तस्मादिदं महागोप्यं कवचम् समुदाहृतम् ॥२९॥
सरल भावार्थ: इस लोकमें दुर्लभ भोगों को प्राप्त कर सम्पूर्ण लोकोंमें विचरण करता रहता है। इसलिये इस महागोपनीय कवच को मृतसञ्जीवन नाम से कहा है।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 29): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 30 वेदमंत्र
मृतसञ्जीवनं नाम्ना देवतैरपि दुर्लभम् ॥३०॥
सरल भावार्थ: यह देवतओं के लिय भी दुर्लभ है।
English Translation: मृतसंजीवन सूक्तं (ऋचा 30): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष काल

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और भस्म अर्पित करें।
  2. रुद्राक्ष माला से सस्वर मृतसंजीवन सूक्त का पाठ करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ गंभीर बीमारियों और दुर्घटनाओं से रक्षा होती है।
  • ✔ आयु, आरोग्य और मन की शांति प्राप्त होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मृतसंजीवन सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
मृतसंजीवन सूक्तं का पाठ सामान्यतः सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष काल के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
मृतसंजीवन सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
मृतसंजीवन सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद खिल / मार्कण्डेय पुराण है। इसके ऋषि ऋषि मार्कण्डेय / शुक्राचार्य तथा छंद अनुष्टुप् है।
मृतसंजीवन सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से गंभीर बीमारियों और दुर्घटनाओं से रक्षा होती है। तथा आयु, आरोग्य और मन की शांति प्राप्त होती है। होती है।

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