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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ ब्रह्मणस्पति / बृहस्पति / गणेश ऋग्वेद (मंडल 2, सूक्त 23) ऋषि: गृत्समद छंद: जगती / त्रिष्टुप्

ब्रह्मनास्पति सूक्तं

Brahmanaspati Suktam

मंत्रों के अधिपति, देवगुरु तथा गणपति स्वरूप ब्रह्मणस्पति की स्तुति, जो बुद्धि, वाणी और आध्यात्मिक तेज को जाग्रत करती है।

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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

ब्रह्मनास्पति सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
Brahmanaspati Suktam उत्तिष्ठ ब्रह्मणस्पते देवयन्तस्त्वेमहे । उप प्र यन्तु मरुत सुदानव इन्द्र प्राशूर्भवा सचा ॥१॥
सरल भावार्थ: हे ज्ञान के स्वामिन् ! उठिये, देवत्व की इच्छा करने वाले हम तुम्हारी प्रार्थना करते हैं। उत्तम दानी मरुत् वीर साथ-साथ रहकर यहाँ आ जायें। हे इन्द्र! सबके साथ रहकर इस सोमरस का पान कीजिये ॥१॥
English Translation: ब्रह्मनास्पति सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2 वेदमंत्र
त्वामिद्धि सहसस्पुत्र मर्त्य उपब्रूते धने हिते । सुवीर्य मरुत आ स्वश्व्यं दधीत यो व आचके ॥२॥
सरल भावार्थ: हे बल के लिये उत्पन्न होने वाले वीर! मनुष्य युद्ध छिड़ जाने पर तुम्हें ही सहायतार्थ बुलाता है। हे मरुतो! जो तुम्हारे गुण गाता है, वह उत्तम घोड़ों से युक्त और उत्तम वीरता वाला धन पाता है ॥२॥
English Translation: ब्रह्मनास्पति सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3 वेदमंत्र
प्रैतु ब्रह्मणस्पतिः प्र देव्येतु सूनृता । अच्छा वीरं नर्यं पङ्क्तिराधसं देवा यज्ञं नयन्तु नः ॥३॥
सरल भावार्थ: ज्ञानी ब्रह्मणस्पति हमारे पास आ जायँ, सत्यरूपिणी देवी भी आयें। सब देव मनुष्यों के लिये हितकारी, पंक्ति में सम्मान योग्य, उत्तम यज्ञ करने वाले वीर को हमारे पास ले आयें ॥३॥
English Translation: ब्रह्मनास्पति सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4 वेदमंत्र
यो वाघते ददाति सूनरं वसु स धत्ते अक्षिति श्रवः । तस्मा इळां सुवीरामा यजामहे सुप्रतूर्तिमनेहसम् ॥४॥
सरल भावार्थ: जो यज्ञ कर्ता को उत्तम धन देता है, वह अक्षय यश प्राप्त करता है। उसके हितार्थ हम उत्तम वीरों से युक्त, शत्रु का हनन करने वाली, अपराजित मातृ भूमि की प्रार्थना करते हैं ॥४॥
English Translation: ब्रह्मनास्पति सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5 वेदमंत्र
प्र नूनं ब्रह्मणस्पतिर्मन्त्रं वदत्युक्थ्यम् । यस्मिन्निन्द्रो वरुणो मित्रो अर्यमा देवा ओकांसि चक्रिरे ॥५॥
सरल भावार्थ: ब्रह्मणस्पति उस पवित्र मन्त्र का अवश्य ही उच्चारण करता है, जिसमें इन्द्र, वरुण, मित्र, अर्यमा आदि देवों ने अपने घर बनाये हैं ॥५॥
English Translation: ब्रह्मनास्पति सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6 वेदमंत्र
तमिद् वोचेमा विदथेषु शंभुवं मन्त्रं देवा अनेहसम् । इमां च वाचं प्रतिहर्यथा नरो विश्वेद् वामा वो अश्नवत् ॥६॥
सरल भावार्थ: हे देवो! उस सुखदायी अविनाशी मन्त्र को हम यज्ञ में बोलते हैं। हे नेतालोगो। इस मन्त्र रूप वाणी की यदि प्रशंसा करोगे तो सभी सुख तुम्हें मिलेंगे ॥६॥
English Translation: ब्रह्मनास्पति सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 7 वेदमंत्र
को देवयन्तमश्नवज् जनं को वृक्तबर्हिषम । प्रप्र दाश्वान् पस्त्याभिरस्थिताऽन्तर्वावत् क्षयं दधे ॥७॥
सरल भावार्थ: देवत्व की इच्छा करने वाले मनुष्य के पास ब्रह्मणस्पति को छोड़कर कौन भला दूसरा आयेगा आसन फैलाने वाले उपासक के पास दूसरा कौन आयेगा दाता अपनी प्रजा के साथ प्रगति करता है, सन्तानों वाले घर का आश्रय करते हैं ॥७॥
English Translation: ब्रह्मनास्पति सूक्तं (ऋचा 7): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 8 वेदमंत्र
उप क्षत्रं पृञ्चीत हन्ति राजभिर्भये चित् सुक्षितिं दधे । नास्य वर्ता न तरुता महाधने नार्भ अस्ति वज्रिणः ॥८॥
सरल भावार्थ: ब्रह्मणस्पति क्षात्र बल का संचय करता है, राजाओं की सहायता से यह शत्रुओं को मारता है, महाभय के उपस्थित होने पर भी वह उत्तम धैर्य को धारण करता है। इस वज्रधारी के साथ होने वाले बड़े युद्ध में इसका निवारण करने वाला और पराजित करने वाला कोई नहीं है और छोटे युद्ध में भी कोई नहीं है ॥८॥
English Translation: ब्रह्मनास्पति सूक्तं (ऋचा 8): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: गुरुवार, बुधवार, गणेश चतुर्थी

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. गुरु और गणेशजी का ध्यान कर पीत चंदन लगाएं।
  2. सस्वर ब्रह्मणस्पति सूक्त का पाठ करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ मंत्र सिद्धि, उच्च शिक्षा में सफलता और तीक्ष्ण मेधा प्राप्त होती है।
  • ✔ कार्य-व्यापार में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रह्मनास्पति सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
ब्रह्मनास्पति सूक्तं का पाठ सामान्यतः गुरुवार, बुधवार, गणेश चतुर्थी के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
ब्रह्मनास्पति सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
ब्रह्मनास्पति सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 2, सूक्त 23) है। इसके ऋषि गृत्समद तथा छंद जगती / त्रिष्टुप् है।
ब्रह्मनास्पति सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से मंत्र सिद्धि, उच्च शिक्षा में सफलता और तीक्ष्ण मेधा प्राप्त होती है। तथा कार्य-व्यापार में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं। होती है।

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