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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्री हरि विष्णु

विष्णु स्तुति

भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक विष्णु स्तुति।

रचयिता देवता गण
स्रोत / ग्रन्थ गरुड़ पुराण
॥ श्लोक 1 ॥
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् । लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ:

परम शांत स्वरूप वाले, शेषनाग की शय्या पर शयन करने वाले, नाभि में कमल धारण करने वाले, देवताओं के स्वामी, विश्व के आधार, आकाश सदृश व्यापक, मेघ वर्ण, मनोहर अंगों वाले, लक्ष्मीपति, कमल सदृश नयनों वाले, योगियों के ध्यान में आने योग्य, संसार के भय को हरने वाले और सर्वलोकों के एकमात्र स्वामी भगवान श्रीविष्णु की मैं वन्दना करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: I bow to Lord Vishnu, embodiment of serene peace, resting on the celestial serpent Shesha, with a lotus sprouting from His navel, sovereign of the Devas, foundation of the cosmos, boundless like the sky, dark as a raincloud, auspiciously limbed, beloved of Lakshmi, lotus-eyed, attained through yogic meditation, dispeller of worldly fears, and the sole Lord of all realms.
॥ श्लोक 2 ॥
मेघश्यामं पीतकौशेयवासं श्रीवत्साङ्कं कौस्तुभोद्भासिताङ्गम् । पुण्योपेतं पुण्डरीकायताक्षं विष्णुं वन्दे सर्वलोकैकनाथम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ:

मेघ के समान श्यामल, पीताम्बरधारी, वक्षःस्थल पर श्रीवत्स चिन्ह और कौस्तुभ मणि से देदीप्यमान, परम पावन, विशाल कमल नयनों वाले संपूर्ण लोकों के एकमात्र स्वामी श्रीविष्णु को नमन है।

अंग्रेजी अनुवाद: Having the dark hue of a monsoon cloud, draped in golden-yellow silk, bearing the sacred Srivatsa mark, radiant with the Kaustubha jewel, pure and lotus-eyed, I revere Vishnu, the Lord of all universes.
॥ श्लोक 3 ॥
सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलं सपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम् । सहारवक्षःस्थलशोभिकौस्तुभं नमामि विष्णुं शिरसा चतुर्भुजम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ:

शंख और चक्र धारण करने वाले, मुकुट और कुंडलों से शोभित, पीतवस्त्रधारी, कमलनयन, मोतियों के हार तथा कौस्तुभ मणि से सुशोभित वक्षःस्थल वाले चतुर्भुज विष्णु को मैं सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: Holding the conch and discus, adorned with a glorious crown and earrings, clad in yellow garments, lotus-eyed, His chest beautified by pearl necklaces and the Kaustubha gem, I bow my head to the four-armed Lord Vishnu.
॥ श्लोक 4 ॥
छायायां पारिजातस्य हेमसिंहासनोपरि । आसीनमम्बुदश्याममायताक्षमलङ्कृतम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ:

पारिजात वृक्ष की शीतल छाया में स्वर्ण-सिंहासन पर विराजमान, मेघ के समान श्यामवर्ण, विशाल नेत्रों वाले और दिव्य आभूषणों से अलंकृत प्रभु का मैं ध्यान करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: Seated on a golden throne beneath the shade of the celestial Parijata tree, cloud-hued, large-eyed, and gracefully adorned, I meditate upon the Supreme Lord.
॥ श्लोक 5 ॥
यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात् । विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ:

जिनके नाम और स्वरूप का केवल स्मरण करने मात्र से मनुष्य जन्म-मरण के संसार-बंधन से मुक्त हो जाता है, उस सर्वसमर्थ, सर्वव्यापक प्रभु श्रीविष्णु को मेरा नमस्कार है।

अंग्रेजी अनुवाद: By whose mere remembrance mortals are liberated from the bonds of recurring birth and death, to that all-powerful, all-pervading Lord Vishnu be our humble salutations.
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पाठ विधि एवं नियम

  • ✦ प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।
  • ✦ पूजा स्थान में भगवान श्री हरि विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • ✦ रोली, अक्षत, सुगंधित पुष्प व नैवेद्य अर्पित कर आचमन करें।
  • ✦ एकाग्र चित्त होकर विष्णु स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करें व अंत में आरती करें।
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चमत्कारी फलश्रुति व लाभ

सकल पापों का शमन, मन की परम शांति, विष्णु कृपा और वैकुंठ की प्राप्ति।

🗓️ शुभ मुहूर्त व वार: प्रातः काल, प्रदोष काल व संबंधित देवता का पावन वार