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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्री हरि

श्रीहरी स्तुति

भगवान श्री हरि की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक श्रीहरी स्तुति।

रचयिता आदि शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ हरिभक्ति रसामृत
॥ श्लोक 1 ॥
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
हिंदी भावार्थ:

शांत स्वरूप, शेषशायी, नाभि-कमल वाले, देवाधिदेव, विश्व के आधार, योगियों के ध्यानगम्य भगवान श्री हरि विष्णु को मैं नमन करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: Serene in form, resting on the serpent, lotus-naveled, Lord of celestials and world's foundation; I praise Lord Hari.
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पाठ विधि एवं नियम

  • ✦ प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।
  • ✦ पूजा स्थान में भगवान श्री हरि की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • ✦ रोली, अक्षत, सुगंधित पुष्प व नैवेद्य अर्पित कर आचमन करें।
  • ✦ एकाग्र चित्त होकर श्रीहरी स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करें व अंत में आरती करें।
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चमत्कारी फलश्रुति व लाभ

संसार के समस्त भयों का हरण, मानसिक शांति और वैकुंठ धाम की प्राप्ति।

🗓️ शुभ मुहूर्त व वार: प्रातः काल, प्रदोष काल व संबंधित देवता का पावन वार