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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मार्ग सहायेश्वर शिव

मार्ग सहाय शिवलिंगम स्तुति

मार्ग सहायेश्वर शिव की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक मार्ग सहाय शिवलिंगम स्तुति।

रचयिता मार्कंडेय मुनि
स्रोत / ग्रन्थ ब्रह्मांड पुराण
॥ श्लोक 1 ॥
मार्गे सहायं वरदं महेशं संसारदुःखाब्धितरित्रिरूपम् । यात्रासु रक्षाकरणैकहेतुं मार्गासहायं प्रणतोऽस्मि नित्यम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ:

जीवन के हर मार्ग में सहायता करने वाले, वरदाता, संसार रूपी दुख-सागर को पार कराने वाली नौका समान और यात्रा में रक्षा करने वाले मार्गसहायक शिव को मैं नित्य प्रणाम करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: The divine companion along every path, boon-giver, great Lord who acts as a vessel across the sorrowful sea of earthly life, the protector during journeys, I daily bow to Margasahaya Shiva.
॥ श्लोक 2 ॥
कण्टकादिभयान्मुक्तिं दुर्गेषु विजयप्रदम् । सर्वसङ्कटनाशार्थं मार्गबन्धुं भजाम्यहम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ:

मार्ग के कांटों और संकटों से मुक्ति देने वाले, दुर्गम स्थानों में विजय प्रदान करने वाले और समस्त आपत्तियों का नाश करने वाले मार्गबन्धु शिव का मैं भजन करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: Liberating from fears of thorns and perils on the way, bestowing triumph in arduous passes, and vanquishing all calamities, I worship Margabandhu, friend of travelers.
॥ श्लोक 3 ॥
वृञ्चिपुरनिवासिने विरूपाक्षाय शूलिने । भक्तसंरक्षणोद्युक्तमार्गनाथाय ते नमः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ:

विरिञ्चिपुरम (मार्गसहायक तीर्थ) में वास करने वाले, त्रिनेत्रधारी, त्रिशूलपाणि और भक्तों के संरक्षण में सदा तत्पर रहने वाले हे मार्गेश्वर! आपको नमस्कार है।

अंग्रेजी अनुवाद: Dwelling in the holy Virinchipuram, multi-eyed, holder of the trident, ever vigilant in guarding His devotees, salutations to You, O Lord of the Paths.
॥ श्लोक 4 ॥
तस्करव्याघ्रसर्पादिभयं नश्यति यत्स्मृतेः । तं सर्वमङ्गलाकान्तं मार्गे शरणमाश्रये ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ:

जिनके स्मरण मात्र से चोर, हिंसक व्याघ्र और सर्पादि का भय नष्ट हो जाता है, उन सर्वमंगला पार्वती के कान्त भगवान शिव की मैं अपने मार्ग में शरण लेता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: By whose mere remembrance fears of thieves, wild beasts, and serpents dissolve away, in that beloved Lord of all-auspicious Parvati I take refuge on my journey.
॥ श्लोक 5 ॥
इमां मार्गसहायस्य स्तुतिं यः संयतः पठेत् । स याति निर्भयो नित्यं सुखं चेष्टमवाप्नुयात् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ:

जो संयमित होकर इस मार्गसहायक शिव स्तुति का पाठ करता है, वह यात्रा में सदा निर्भय रहता है तथा संपूर्ण सुख और मनोवांछित फल प्राप्त करता है।

अंग्रेजी अनुवाद: Whoever recites with self-control this Margasahaya hymn walks fearlessly upon every path and attains enduring joy and fulfillment of righteous desires.
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पाठ विधि एवं नियम

  • ✦ प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।
  • ✦ पूजा स्थान में मार्ग सहायेश्वर शिव की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • ✦ रोली, अक्षत, सुगंधित पुष्प व नैवेद्य अर्पित कर आचमन करें।
  • ✦ एकाग्र चित्त होकर मार्ग सहाय शिवलिंगम स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करें व अंत में आरती करें।
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चमत्कारी फलश्रुति व लाभ

यात्राओं में सुरक्षा, मार्ग की बाधाओं का निवारण और जीवन यात्रा में ईश्वरीय मार्गदर्शन।

🗓️ शुभ मुहूर्त व वार: प्रातः काल, प्रदोष काल व संबंधित देवता का पावन वार