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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 माँ मंगला गौरी

मंगल गौरी स्तुति

माँ मंगला गौरी की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक मंगल गौरी स्तुति।

रचयिता सावित्री
स्रोत / ग्रन्थ भविष्य पुराण
॥ श्लोक 1 ॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
हिंदी भावार्थ:

सर्व मंगलों की दाता, कल्याणकारिणी, समस्त मनोरथों को सिद्ध करने वाली, हे माता मंगला गौरी! आपको बारम्बार नमन।

अंग्रेजी अनुवाद: Auspicious of all auspiciousness, benevolent granter of all desires; salutations to Goddess Mangala Gauri.
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पाठ विधि एवं नियम

  • ✦ प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।
  • ✦ पूजा स्थान में माँ मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • ✦ रोली, अक्षत, सुगंधित पुष्प व नैवेद्य अर्पित कर आचमन करें।
  • ✦ एकाग्र चित्त होकर मंगल गौरी स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करें व अंत में आरती करें।
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चमत्कारी फलश्रुति व लाभ

अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन, शीघ्र विवाह और पति की दीर्घायु का वरदान।

🗓️ शुभ मुहूर्त व वार: प्रातः काल, प्रदोष काल व संबंधित देवता का पावन वार