Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान गणेश

गणेश स्तुति

भगवान गणेश की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक गणेश स्तुति।

रचयिता देवराज इंद्र
स्रोत / ग्रन्थ गणेश पुराण
॥ श्लोक 1 ॥
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् । उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ:

हाथी के मुख वाले, भूत-गणों द्वारा पूजित, कैथ और जामुन के फलों को चाव से खाने वाले, माता पार्वती के पुत्र और भक्तों के शोक का नाश करने वाले विघ्नराज गणेश के चरणकमलों में मैं प्रणाम करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: I bow to the lotus feet of Lord Ganesha, the elephant-faced, served by celestial attendants, who delights in wood-apple and rose-apple fruits, son of Uma, and destroyer of all grief.
॥ श्लोक 2 ॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ:

घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर वाले और करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी हे देवाधिदेव! मेरे समस्त कार्यों को सदा निर्विघ्न पूर्ण करें।

अंग्रेजी अनुवाद: O Lord with the curved trunk and immense form, possessing the radiance of millions of suns, please make all my endeavors free from obstacles at all times.
॥ श्लोक 3 ॥
अगजाननपद्मार्कं गजाननमहर्निशम् । अनेकदं तं भक्तानामेकदन्तमुपास्महे ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ:

पार्वती जी के मुख-कमल को विकसित करने के लिए सूर्य समान, भक्तों को अनेक वरदान देने वाले एकदंत गजमुख श्री गणेश की हम दिन-रात उपासना करते हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: Like the sun causing the lotus face of Mother Parvati to bloom, the granter of countless boons to devotees, we worship the single-tusked, elephant-faced Lord day and night.
॥ श्लोक 4 ॥
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय । नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ:

विघ्नेश्वर, वरदाता, देवताओं के प्रिय, लम्बोदर, कलाओं के स्वामी, जगत का कल्याण करने वाले, गजमुख और गौरीपुत्र गणनाथ को कोटि-कोटि नमन है।

अंग्रेजी अनुवाद: Salutations to You, Lord of Obstacles, granter of boons, beloved of Devas, large-bellied, benefactor of the world, adorned with Vedic wisdom, son of Gauri, O Lord of Gaṇas.
॥ श्लोक 5 ॥
एकदन्तं महाकायं तप्तकाञ्चनसप्रभम् । लम्बोदरं विशालाक्षं वन्देऽहं गणनायकम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ:

एकदंत, विशालकाय, तपे हुए सुवर्ण के समान कान्तिमान, लम्बोदर और विशाल नेत्रों वाले गणनायक श्री गणेश की मैं वन्दना करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: I praise the leader of the Gaṇas, the single-tusked, majestic-bodied Lord shining with the luster of molten gold, with a generous belly and expansive graceful eyes.
🪔

पाठ विधि एवं नियम

  • ✦ प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।
  • ✦ पूजा स्थान में भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • ✦ रोली, अक्षत, सुगंधित पुष्प व नैवेद्य अर्पित कर आचमन करें।
  • ✦ एकाग्र चित्त होकर गणेश स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करें व अंत में आरती करें।
✨

चमत्कारी फलश्रुति व लाभ

सभी प्रकार के विघ्नों का नाश, बुद्धि, विद्या और नए कार्यों में पूर्ण सफलता प्राप्त होती है।

🗓️ शुभ मुहूर्त व वार: प्रातः काल, प्रदोष काल व संबंधित देवता का पावन वार