श्लोक संख्या 1
॥ श्री ॥
यथामति मतिं देवस्तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2
॥ श्री ॥
अकिञ्चित्करकर्मभ्यः प्रत्याहृत्य कृपावशात् ।
सुब्रह्मण्यः स्तुतावस्यां तन्नः षण्मुखः प्रचोदयात् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3
॥ श्री ॥
अकारादिक्षकारान्तवर्णावयवशालिनी ।
वीणापुस्तकहस्ताव्यात्प्रणो देवी सरस्वती ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4
॥ श्री ॥
या वर्णपदवाक्यार्थगद्यपद्यस्वरूपिणी ।
वाचि नर्तयतु क्षिप्रं मेधां देवी सरस्वती ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5
॥ श्री ॥
उपास्यमाना विप्रेन्द्रैः सन्ध्यासु च तिसृष्वपि ।
सद्यः प्रसीद मे मातः सन्ध्याविद्ये सरस्वती ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6
॥ श्री ॥
मन्दा निन्दालोलुपाहं स्वभावा-
-देतत्स्तोत्रं पूर्यते किं मयेति ।
मा ते भीतिर्हे मते त्वादृशाना-
-मेषा नेत्री राधसा सूनृतानाम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7
॥ श्री ॥
तरङ्गभ्रुकुटीकोटिभङ्ग्या तर्जयते जराम् ।
सुधामयाय शुभ्राय सिन्धूनां पतये नमः ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8
॥ श्री ॥
तस्य मध्ये मणिद्वीपः कल्पकारामभूषितः ।
अस्तु मे ललितावासः स्वस्तिदा अभयङ्करः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9
॥ श्री ॥
कदम्बमञ्जरीनिर्यद्वारुणीपारणोन्मदैः ।
द्विरेफैर्वर्णनीयाय वनानां पतये नमः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10
॥ श्री ॥
तत्र वप्रावली लीला गगनोल्लङ्घिगोपुरम् ।
मातः कौतूहलं दद्यात्सग्ंहार्यं नगरं तव ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11
॥ श्री ॥
मकरन्दझरीमज्जन्मिलिन्दकुलसङ्कुलाम् ।
महापद्माटवीं वन्दे यशसा सम्परीवृताम् ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12
॥ श्री ॥
तत्रैव चिन्तामणिधोरणार्चिभि-
-र्विनिर्मितं रोपितरत्नशृङ्गम् ।
भजे भवानीभवनावतंस-
-मादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13
॥ श्री ॥
मुनिभिः स्वात्मलाभाय यच्चक्रं हृदि सेव्यते ।
तत्र पश्यामि बुद्ध्या तदक्षरे परमे व्योमन् ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14
॥ श्री ॥
पञ्चब्रह्ममयो मञ्चस्तत्र यो बिन्दुमध्यगः ।
तव कामेशि वासोऽयमायुष्मन्तं करोतु माम् ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15
॥ श्री ॥
नानारत्नगुलुच्छालीकान्तिकिम्मीलितोदरम् ।
विमृशामि वितानं तेऽतिश्लक्ष्णमतिलोमशम् ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16
॥ श्री ॥
पर्यङ्कतल्पोपरि दर्शनीयं
सबाणचापाङ्कुशपाशपाणिम् ।
अशेषभूषारमणीयमीडे
त्रिलोचनं नीलकण्ठं प्रशान्तम् ॥ १६ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17
॥ श्री ॥
जटारुणं चन्द्रकलाललामं
उद्वेललावण्यकलाभिरामम् ।
कामेश्वरं कामशरासनाङ्कं
समस्तसाक्षिं तमसः परस्तात् ॥ १७ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18
॥ श्री ॥
तत्र कामेशवामाङ्के खेलन्तीमलिकुन्तलाम् ।
सच्चिदानन्दलहरीं महालक्ष्मीमुपास्महे ॥ १८ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19
॥ श्री ॥
चारुगोरोचनापङ्कजम्बालितघनस्तनीम् ।
नमामि त्वामहं लोकमातरं पद्ममालिनीम् ॥ १९ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 20
॥ श्री ॥
शिवे नमन्निर्जरकुञ्जरासुर-
-प्रतोलिकामौलिमरीचिवीचिभिः ।
इदं तव क्षालनजातसौभगं
चरणं नो लोके सुधितां दधातु ॥ २० ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 20): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 21
॥ श्री ॥
कल्पस्यादौ कारणेशानपि त्री-
-न्स्रष्टुं देवि त्रीन्गुणानादधानाम् ।
सेवे नित्यं श्रेयसे भूयसे त्वा-
-मजामेकां लोहितशुक्लकृष्णाम् ॥ २१ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 21): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 22
॥ श्री ॥
केशोद्भूतैरद्भुतामोदपूरै-
-राशाबृन्दं सान्द्रमापूरयन्तीम् ।
त्वामानम्य त्वत्प्रसादात्स्वयम्भू-
-रस्मान्मायी सृजते विश्वमेतत् ॥ २२ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 22): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 23
॥ श्री ॥
अर्धोन्मीलद्यौवनोद्दामदर्पां
दिव्याकल्पैरर्पयन्तीं मयूखान् ।
देवि ध्यात्वा त्वां पुरा कैटभारि-
-र्विश्वं बिभर्ति भुवनस्य नाभिः ॥ २३ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 23): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 24
॥ श्री ॥
कल्हारश्रीमञ्जरीपुञ्जरीतिं
धिक्कुर्वन्तीमम्ब ते पाटलिम्ना ।
मूर्तिं ध्यात्वा शाश्वतीं भूतिमाय-
-न्निन्द्रो राजा जगतो य ईशे ॥ २४ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 24): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 25
॥ श्री ॥
देवतान्तरमन्त्रौघजपश्रीफलभूतया ।
जापकस्तव देव्यन्ते विद्यया विन्दतेऽमृतम् ॥ २५ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 25): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 26
॥ श्री ॥
पुंस्कोकिलकलक्वाणकोमलालापशालिनि ।
भद्राणि कुरु मे मातर्दुरितानि परासुव ॥ २६ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 26): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
ध्यानम्
॥ श्री ॥
अन्तेवासिन्नस्ति चेत्ते मुमुक्षा
वक्ष्ये युक्तिं मुक्तसर्वैषणः सन् ।
सद्भ्यः साक्षात्सुन्दरीं ज्ञप्तिरूपां
श्रद्धाभक्तिध्यानयोगादवेहि ॥ २७ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
न्यासः
॥ श्री ॥
षोढान्यासादिदेवैश्च सेविता चक्रमध्यगा ।
कामेशमहिषी भूयः षोडशी शर्म यच्छतु ॥ २८ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक न्यासः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 29
॥ श्री ॥
शान्तो दान्तो देशिकेन्द्रं प्रणम्य
तस्यादेशात्तारकं मन्त्रतत्त्वम् ।
जानीते चेदम्ब धन्यः समानं
नातः परं वेदितव्यं हि किञ्चित् ॥ २९ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 29): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 30
॥ श्री ॥
त्वमेव कारणं कार्यं क्रिया ज्ञानं त्वमेव च ।
त्वामम्ब न विना किञ्चित्त्वयि सर्वं प्रतिष्ठितम् ॥ ३० ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 30): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 31
॥ श्री ॥
परागमद्रीन्द्रसुते तवाङ्घ्रि-
-सरोजयोरम्ब दधामि मूर्ध्ना ।
अलङ्कृतं वेदवधूशिरोभि-
-र्यतो जातो भुवनानि विश्वा ॥ ३१ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 31): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 32
॥ श्री ॥
दुष्टान्दैत्यान्हन्तुकामां महर्षीन्
शिष्टानन्यान्पातुकामां कराब्जैः ।
अष्टाभिस्त्वां सायुधैर्भासमानां
दुर्गां देवीग्ं शरणमहं प्रपद्ये ॥ ३२ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 32): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 33
॥ श्री ॥
देवि सर्वानवद्याङ्गि त्वामनादृत्य ये क्रियाः ।
कुर्वन्ति निष्फलास्तेषामदुग्धा इव धेनवः ॥ ३३ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 33): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 34
॥ श्री ॥
नाहं मन्ये दैवतं मान्यमन्य-
-त्त्वत्पादाब्जादम्बिके कुम्भजाद्याः ।
ये ध्यातारो भक्तिसंशुद्धचित्ताः
परामृतात्परिमुच्यन्ति सर्वे ॥ ३४ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 34): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 35
॥ श्री ॥
कुर्वाणोऽपि दुरारम्भांस्तव नामानि शाम्भवि ।
प्रजपन्नेति मायान्तमति मृत्युं तराम्यहम् ॥ ३५ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 35): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 36
॥ श्री ॥
कल्याणि त्वं कुन्दहासप्रकाशै-
-रन्तर्ध्वान्तं नाशयन्ती क्षणेन ।
हन्तास्माकं ध्यायतां त्वत्पदाब्ज-
-मुच्चतिष्ठ महते सौभगाय ॥ ३६ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 36): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 37
॥ श्री ॥
तितीर्षया भवाम्भोधेर्हयग्रीवादयः पुरा ।
अप्रमत्ता भवत्पूजां सुविद्वांसो वितेनिरे ॥ ३७ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 37): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 38
॥ श्री ॥
मद्वश्या ये दुराचारा ये च सन्मार्गगामिनः ।
भवत्याः कृपया सर्वे सुवर्यन्तु यजमानाः ॥ ३८ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 38): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 39
॥ श्री ॥
श्रीचक्रस्थां शाश्वतैश्वर्यदात्रीं
पौण्ड्रं चापं पुष्पबाणान्दधानाम् ।
बन्धूकाभां भावयामि त्रिनेत्रां
तामग्निवर्णां तपसा ज्वलन्तीम् ॥ ३९ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 39): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 40
॥ श्री ॥
भवानि तव पादाब्जनिर्णेजनपवित्रताः ।
भवामयप्रशान्त्यै त्वामपो याचामि भेषजम् ॥ ४० ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 40): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 41
॥ श्री ॥
चिदानन्दसुधाम्भोधेस्तवानन्दलवोऽस्ति यः ।
कारणेशैस्त्रिभिः साकं तद्विश्वमुपजीवति ॥ ४१ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 41): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 42
॥ श्री ॥
नो वा यागैर्नैव पूर्तादिकृत्यै-
-र्नो वा जप्यैर्नो महद्भिस्तपोभिः ।
नो वा योगैः क्लेशकृद्भिः सुमेधा
निचाय्येमां शान्तिमत्यन्तमेति ॥ ४२ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 42): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 43
॥ श्री ॥
प्रातः पाहि महाविद्ये मध्याह्ने तु मृडप्रिये ।
सायं पाहि जगद्वन्द्ये पुनर्नः पाहि विश्वतः ॥ ४३ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 43): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 44
॥ श्री ॥
बन्धूकाभैर्भानुभिर्भासयन्ती
विश्वं शश्वत्तुङ्गपीनस्तनार्धा ।
लावण्याब्धेः सुन्दरि त्वं प्रसादा-
-दायुः प्रजाग्ं रयिमस्मासु धेहि ॥ ४४ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 44): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 45
॥ श्री ॥
कर्णाकर्णय मे तत्त्वं या चिच्छक्तिरितीर्यते ।
त्रिर्वदामि मुमुक्षूणां सा काष्ठा सा परा गतिः ॥ ४५ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 45): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 46
॥ श्री ॥
वाग्देवीति त्वां वदन्त्यम्ब केचि-
-ल्लक्ष्मीर्गौरीत्येवमन्येऽप्युशन्ति ।
शश्वन्मातः प्रत्यगद्वैतरूपां
शंसन्ति केचिन्निविदो जनाः ॥ ४६ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 46): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 47
॥ श्री ॥
ललितेति सुधापूरमाधुरीचोरमम्बिके ।
तव नामास्ति यत्तेन जिह्वा मे मधुमत्तमा ॥ ४७ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 47): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 48
॥ श्री ॥
ये सम्पन्नाः साधनैस्तैश्चत्तुर्भिः
शुश्रूषाभिर्देशिकं प्रीणयन्ति ।
सम्यग्विद्वान् शुद्धसत्त्वान्तराणां
तेषामेवैतां ब्रह्मविद्यां वदेत ॥ ४८ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 48): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 49
॥ श्री ॥
अभिचारादिभिः कृत्यां यः प्रेरयति मय्युमे ।
तव हुङ्कारसन्त्रस्ता प्रत्यक्कर्तारमृच्छतु ॥ ४९ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 49): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 50
॥ श्री ॥
जगत्पवित्रि मामिकामपाहराशु दुर्जराम् ।
प्रसीद मे दयाधुने प्रशस्तिमम्ब नः स्कृधि ॥ ५० ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 50): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 51
॥ श्री ॥
कदम्बारुणमम्बाया रूपं चिन्तय चित्त मे ।
मुञ्च पापीयसीं निष्ठां मा गृधः कस्य स्विद्धनम् ॥ ५१ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 51): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 52
॥ श्री ॥
भण्डभण्डनलीलायां रक्तचन्दनपङ्किलः ।
अङ्कुशस्तव तं हन्याद्यश्च नो द्विषते जनः ॥ ५२ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 52): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 53
॥ श्री ॥
रे रे चित्त त्वं वृधा शोकसिन्धौ
मज्जस्यन्तर्वच्म्युपायं विमुक्त्यै ।
देव्याः पादौ पूजयैकाक्षरेण
तत्ते पदं सङ्ग्रहेण ब्रवीम्योम् ॥ ५३ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 53): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 54
॥ श्री ॥
चञ्चद्बालातपज्योत्स्नाकलामण्डलशालिने ।
ऐक्षवाय नमो मातर्बाहुभ्यां तव धन्वने ॥ ५४ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 54): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 55
॥ श्री ॥
तामेवाद्यां ब्रह्मविद्यामुपासे
मूर्तैर्वेदैः स्तूयमानां भवानीम् ।
हन्त स्वात्मत्वेन यां मुक्तिकामो
मत्वा धीरो हर्षशोकौ जहाति ॥ ५५ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 55): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 56
॥ श्री ॥
शरणं करवाण्यम्ब चरणं तव सुन्दरि ।
शपे त्वत्पादुकाभ्यां मे नान्यः पन्था अयनाय ॥ ५६ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 56): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 57
॥ श्री ॥
रत्नच्छत्रैश्चामरैर्दर्पणाद्यै-
-श्चक्रेशानीं सर्वदोपाचरन्त्यः ।
योगिन्योऽन्याः शक्तयश्चाणिमाद्या
यूयं पातः स्वस्तिभिः सदा नः ॥ ५७ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 57): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 58
॥ श्री ॥
दरिद्रं मां विजानीहि सर्वज्ञासि यतः शिवे ।
दूरीकृत्याशु दुरितमथा नो वर्धया रयिम् ॥ ५८ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 58): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 59
॥ श्री ॥
महेश्वरि महामन्त्रकूटत्रयकलेबरे ।
कादिविद्याक्षरश्रेणिमुशन्तस्त्वा हवामहे ॥ ५९ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 59): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 60
॥ श्री ॥
मूलाधारादूर्ध्वमन्तश्चरन्तीं
भित्त्वा ग्रन्थीन्मूर्ध्नि निर्यत्सुधार्द्राम् ।
पश्यन्तस्त्वां ये च तृप्तिं लभन्ते
तेषां शान्तिः शाश्वती नेतरेषाम् ॥ ६० ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 60): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
ध्यानम्
॥ श्री ॥
मह्यं द्रुह्यन्ति ये मातस्त्वद्ध्यानासक्तचेतसे ।
तानम्ब सायकैरेभिरव ब्रह्मद्विषो जहि ॥ ६१ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 62
॥ श्री ॥
त्वद्भक्तानामम्ब शान्तैषणानां
ब्रह्मिष्ठानां दृष्टिपातेन पूतः ।
पापीयानप्यावृतः स्वर्वधूभिः
शोकातिगो मोदते स्वर्गलोके ॥ ६२ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 62): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 63
॥ श्री ॥
सन्तु विद्या जगत्यस्मिन्संसारभ्रमहेतवः ।
भजेऽहं त्वां यया विद्वान्विद्ययामृतमश्नुते ॥ ६३ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 63): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 64
॥ श्री ॥
विद्वन्मुख्यैर्विद्रुमाभं विशाल-
-श्रोणीशिञ्जन्मेखलाकिङ्किणीकम् ।
चन्द्रोत्तंसं चिन्मयं वस्तु किञ्चि-
-द्विद्धि त्वमेतन्निहितं गुहायाम् ॥ ६४ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 64): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 65
॥ श्री ॥
न विस्मरामि चिन्मूर्तिमिक्षुकोदण्डशालिनीम् ।
मुनयः सनकप्रेष्ठास्तामाहुः परमां गतिम् ॥ ६५ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 65): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 66
॥ श्री ॥
चक्षुःप्रेङ्खत्प्रेमकारुण्यधारां
हंसज्योत्स्नापूरहृष्यच्चकोराम् ।
यामाश्लिष्यन्मोदते देवदेवः
सा नो देवी सुहवा शर्म यच्छतु ॥ ६६ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 66): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 67
॥ श्री ॥
मुञ्च वञ्चकतां चित्त पामरं चापि दैवतम् ।
गृहाण पदमम्बाया एतदालम्बनं परम् ॥ ६७ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 67): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 68
॥ श्री ॥
का मे भीतिः का क्षतिः किं दुरापं
कामेशाङ्कोत्तुङ्गपर्यङ्कसंस्थाम् ।
तत्त्वातीतामच्युतानन्ददात्रीं
देवीमहं निरृतिं वन्दमानः ॥ ६८ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 68): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 69
॥ श्री ॥
चिन्तामणिमयोत्तंसकान्तिकञ्चुकितानने ।
ललिते त्वां सकृन्नत्वा न बिभेति कुतश्चन ॥ ६९ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 69): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 70
॥ श्री ॥
तारुण्योत्तुङ्गितकुचे लावण्योल्लासितेक्षणे ।
तवाज्ञयैव कामाद्या मास्मान्प्रापन्नरातयः ॥ ७० ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 70): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 71
॥ श्री ॥
आकर्णाकृष्टकामासस्त्रसञ्जातं तापमम्ब मे ।
आचामतु कटाक्षस्ते पर्जन्यो वृष्टिमानिव ॥ ७१ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 71): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 72
॥ श्री ॥
कुर्वे गर्वेणापचारानपारा-
-नद्यप्यम्ब त्वत्पदाब्जं तथापि ।
मन्ये धन्ये देवि विद्यावलम्बं
मातेव पुत्रं बिभृतास्वेनम् ॥ ७२ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 72): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 73
॥ श्री ॥
यथोपास्तिक्षतिर्न स्यात्तव चक्रस्य सुन्दरि ।
कृपया कुरु कल्याणि तथा मे स्वस्तिरायुषि ॥ ७३ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 73): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 74
॥ श्री ॥
चक्रं सेवे तारकं सर्वसिध्यै
श्रीमन्मातः सिद्धयश्चाणिमाद्याः ।
नित्या मुद्रा शक्तयश्चाङ्गदेव्यो
यस्मिन्देवा अधि विश्वे निषेदुः ॥ ७४ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 74): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 75
॥ श्री ॥
सुकुमारे सुखाकारे सुनेत्रे सूक्ष्ममध्यमे ।
सुप्रसन्ना भव शिवे सुमृडीका सरस्वती ॥ ७५ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 75): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 76
॥ श्री ॥
विद्युद्वल्लीकन्दलीं कल्पयन्तीं
मूर्तिं स्फूर्त्या पङ्कजं धारयन्तीम् ।
ध्यायन्हि त्वां जायते सार्वभौमो
विश्वा आशाः पृतनाः सञ्जयञ्जयन् ॥ ७६ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 76): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 77
॥ श्री ॥
अविज्ञाय परां शक्तिमात्मभूतां महेश्वरीम् ।
अहो पतन्ति निरयेष्वेके चात्महनो जनाः ॥ ७७ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 77): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 78
॥ श्री ॥
सिन्दूराभैः सुन्दरैरंशुबृन्दै-
-र्लाक्षालक्ष्म्यां मज्जयन्तीं जगन्ति ।
हेरम्बाम्ब त्वां हृदा लम्बते य-
-स्तस्मै विशः स्वयमेवानमन्ते ॥ ७८ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 78): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 79
॥ श्री ॥
तव तत्त्वं विमृशतां प्रत्यगद्वैतलक्षणम् ।
चिदानन्दघनादन्यन्नेह नानास्ति किञ्चन ॥ ७९ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 79): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 80
॥ श्री ॥
कण्ठात्कुण्डलिनीं नीत्वा सहस्रारं शिवे तव ।
न पुनर्जायते गर्भे सुमेधा अमृतोक्षितः ॥ ८० ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 80): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 81
॥ श्री ॥
त्वत्पादुकानुसन्धानप्राप्तसर्वात्मतादृशि ।
पूर्णाहङ्कृतिमत्यस्मिन्न कर्म लिप्यते नरे ॥ ८१ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 81): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 82
॥ श्री ॥
तवानुग्रहनिर्भिन्नहृदयग्रन्थिरद्रिजे ।
स्वात्मत्वेन जगन्मत्वा ततो न विजुगुप्सते ॥ ८२ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 82): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 83
॥ श्री ॥
कदा वसुदलोपेते त्रिकोणनवकान्विते ।
आवाहयामि चक्रे त्वां सूर्याभां श्रियमैश्वरीम् ॥ ८३ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 83): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 84
॥ श्री ॥
ह्रीमित्येकं तावकं वाचकार्णं
यज्जिह्वाग्रे देवि जागर्ति किञ्चित् ।
को वायं स्यात्कामकामस्त्रिलोक्यां
सर्वेऽस्मै देवाः बलिमावहन्ति ॥ ८४ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 84): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 85
॥ श्री ॥
नाकस्त्रीणां किन्नरीणां नृपाणा-
-मप्याकर्षी चेतसा चिन्तनीयम् ।
त्वत्पाणिस्थं कुङ्कुमाभं शिवे यं
द्विष्मस्तस्मिन्प्रति मुञ्चामि पाशम् ॥ ८५ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 85): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 86
॥ श्री ॥
नूनं सिंहासनेश्वर्यास्तवाज्ञां शिरसा वहन् ।
भयेन पवमानोऽयं सर्वा दिशोऽनुविधावति ॥ ८६ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 86): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 87
॥ श्री ॥
त्रिकलाढ्यां त्रिहृल्लेखां द्विहंसस्वरभूषिताम् ।
यो जपत्यम्ब ते विद्यां सोऽक्षरः परमः स्वराट् ॥ ८७ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 87): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 88
॥ श्री ॥
दारिद्र्याब्धौ देवि मग्नोऽपि शश्व-
-द्वाचा याचे नाहमम्ब त्वदन्यम् ।
तस्मादस्मद्वाञ्छितं पूरयैत-
-दुषा सा नक्ता सुदुघेव धेनुः ॥ ८८ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 88): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 89
॥ श्री ॥
यो वा यद्यत्कामनाकृष्टचित्तः
स्तुत्वोपास्ते देवि ते चक्रविद्याम् ।
कल्याणानामालयः कालयोगा-
-त्तं तं लोकं जयते तांश्च कामान् ॥ ८९ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 89): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 90
॥ श्री ॥
साधकः सततं कुर्यादैक्यं श्रीचक्रदेहयोः ।
तथा देव्यात्मनोरैक्यमेतावदनुशासनम् ॥ ९० ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 90): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 91
॥ श्री ॥
हस्ताम्भोजप्रोल्लसच्चामराभ्यां
श्रीवाणीभ्यां पार्श्वयोर्वीज्यमानाम् ।
श्रीसंम्राज्ञि त्वां सदालोकयेयं
सदा सद्भिः सेव्यमानां निगूढाम् ॥ ९१ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 91): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 92
॥ श्री ॥
इष्टानिष्टप्राप्तिविच्छित्तिहेतुः
स्तोतुं वाचां क्लुप्तिरित्येव मन्ये ।
त्वद्रूपं हि स्वानुभूत्यैकवेद्यं
न चक्षुषा गृह्यते नापि वाचा ॥ ९२ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 92): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 93
॥ श्री ॥
हरस्वरैश्चतुर्वर्गप्रदं मन्त्रं सबिन्दुकम् ।
देव्या जपत विप्रेन्द्रा अन्या वाचो विमुञ्चथ ॥ ९३ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 93): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 94
॥ श्री ॥
यस्ते राकाचन्द्रबिम्बासनस्थां
पीयूषाब्धिं कल्पयन्तीं मयूखैः ।
मूर्तिं भक्त्या ध्यायते हृत्सरोजे
न तस्य रोगो न जरा न मृत्युः ॥ ९४ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 94): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 95
॥ श्री ॥
तुभ्यं मातर्योऽञ्जलिं मूर्ध्नि धत्ते
मौलिश्रेण्या भूभुजस्तं नमन्ति ।
यः स्तौति त्वामम्ब चिद्वल्लिवाचा
तं धीरासः कवय उन्नयन्ति ॥ ९५ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 95): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 96
॥ श्री ॥
वैरिञ्चोघैर्विष्णुरुद्रेन्द्रबृन्दै-
-र्दुर्गाकालीभैरवीशक्तिसङ्घैः ।
यन्त्रेशि त्वं वर्तसे स्तूयमाना
न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकम् ॥ ९६ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 96): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 97
॥ श्री ॥
भूत्यै भवानि त्वां वन्दे सुराः शतमखादयः ।
त्वामानम्य समृद्धाः स्युरायो धामानि दिव्यानि ॥ ९७ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 97): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 98
॥ श्री ॥
पुष्पवत्पुल्लताटङ्कां प्रातरादित्यपाटलाम् ।
यस्त्वामन्तः स्मरत्यम्ब तस्य देवा असन्वशे ॥ ९८ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 98): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 99
॥ श्री ॥
वश्ये विद्रुमसङ्काशां विद्यायां विशदप्रभाम् ।
त्वामम्ब भावयेद्भूत्यै सुवर्णां हेममालिनीम् ॥ ९९ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 99): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 100
॥ श्री ॥
वामाङ्कस्थामीशितुर्दीप्यमानां
भूषाबृन्दैरिन्दुरेखावतंसाम् ।
यस्त्वां पश्यन् सन्ततं नैव तृप्तः
तस्मै च देवि वषडस्तु तुभ्यम् ॥ १०० ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 100): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 101
॥ श्री ॥
नवनीपवनीवासलालसोत्तरमानसे ।
शृङ्गारदेवते मातः श्रियं वासय मे कुले ॥ १०१ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 101): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 102
॥ श्री ॥
भक्त्याभक्त्या वापि पद्यावसान-
-श्रुत्या स्तुत्या चैतया स्तौति यस्त्वाम् ।
तस्य क्षिप्रं त्वत्प्रसादेन मातः
सत्याः सन्तु यजमानस्य कामाः ॥ १०२ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 102): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 103
॥ श्री ॥
बालिशेन मया प्रोक्तमपि वात्सल्यशालिनोः ।
आनन्दमादिदम्पत्योरिमा वर्धन्तु वाङ्गिरः ॥ १०३ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 103): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 104
॥ श्री ॥
माधुरीसौरभावासचापसायकधारिणीम् ।
देवीं ध्यायन् पठेदेतत्सर्वकामार्थसिद्धये ॥ १०४ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 104): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 105
॥ श्री ॥
स्तोत्रमेतत्प्रजपतस्तव त्रिपुरसुन्दरि ।
अनुद्वीक्ष्य भयाद्दूरं मृत्युर्धावति पञ्चमः ॥ १०५ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 105): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 106
॥ श्री ॥
यः पठति स्तुतिमेतां
विद्यावन्तं तमम्ब धनवन्तम् ।
कुरु देवि यशस्वन्तं
वर्चस्वन्तं मनुष्येषु ॥ १०६ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 106): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 107
॥ श्री ॥
ये शृण्वन्ति स्तुतिमिमां तव देव्यनसूयकाः ।
तेभ्यो देहि श्रियं विद्यामुद्वर्च उत्तनूबलम् ॥ १०७ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 107): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 108
॥ श्री ॥
त्वामेवाहं स्तौमि नित्यं प्रणौमि
श्रीविद्येशां वच्मि सञ्चिन्तयामि ।
अध्यास्ते या विश्वमाता विराजो
हृत्पुण्डरीकं विरजं विशुद्धम् ॥ १०८ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 108): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 109
॥ श्री ॥
शङ्करेण रचितं स्तवोत्तमं
यः पठेज्जगति भक्तिमान्नरः ।
तस्य सिद्धिरतुला भवेद्ध्रुवा
सुन्दरी च सततं प्रसीदति ॥ १०९ ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 109): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 110
॥ श्री ॥
यत्रैव यत्रैव मनो मदीयं
तत्रैव तत्रैव तव स्वरूपम् ।
यत्रैव यत्रैव शिरो मदीयं
तत्रैव तत्रैव पदद्वयं ते ॥ ११० ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 110): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति
॥ श्री ॥
इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ त्रिपुरसुन्दरी वेदपाद स्तवः ।
॥ इति त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ:
त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
🕉️
इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें: