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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मां आद्याशक्ति जगदम्बा

त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम्

त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। श्री दुर्गा सप्तशती / मार्कण्डेय पुराण में वर्णित यह स्तुति मां आद्याशक्ति जगदम्बा के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता महर्षि मार्कण्डेय / तंत्र शास्त्र
स्रोत / ग्रन्थ श्री दुर्गा सप्तशती / मार्कण्डेय पुराण
शुभ दिन / तिथि शुक्रवार, मंगलवार, अष्टमी, नवरात्रि
जप माला कमलगट्टा अथवा स्फटिक माला - 1 या 7 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
यथामति मतिं देवस्तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
अकिञ्चित्करकर्मभ्यः प्रत्याहृत्य कृपावशात् । सुब्रह्मण्यः स्तुतावस्यां तन्नः षण्मुखः प्रचोदयात् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
अकारादिक्षकारान्तवर्णावयवशालिनी । वीणापुस्तकहस्ताव्यात्प्रणो देवी सरस्वती ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
या वर्णपदवाक्यार्थगद्यपद्यस्वरूपिणी । वाचि नर्तयतु क्षिप्रं मेधां देवी सरस्वती ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
उपास्यमाना विप्रेन्द्रैः सन्ध्यासु च तिसृष्वपि । सद्यः प्रसीद मे मातः सन्ध्याविद्ये सरस्वती ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
मन्दा निन्दालोलुपाहं स्वभावा- -देतत्स्तोत्रं पूर्यते किं मयेति । मा ते भीतिर्हे मते त्वादृशाना- -मेषा नेत्री राधसा सूनृतानाम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
तरङ्गभ्रुकुटीकोटिभङ्ग्या तर्जयते जराम् । सुधामयाय शुभ्राय सिन्धूनां पतये नमः ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
तस्य मध्ये मणिद्वीपः कल्पकारामभूषितः । अस्तु मे ललितावासः स्वस्तिदा अभयङ्करः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
कदम्बमञ्जरीनिर्यद्वारुणीपारणोन्मदैः । द्विरेफैर्वर्णनीयाय वनानां पतये नमः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
तत्र वप्रावली लीला गगनोल्लङ्घिगोपुरम् । मातः कौतूहलं दद्यात्सग्ंहार्यं नगरं तव ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
मकरन्दझरीमज्जन्मिलिन्दकुलसङ्कुलाम् । महापद्माटवीं वन्दे यशसा सम्परीवृताम् ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
तत्रैव चिन्तामणिधोरणार्चिभि- -र्विनिर्मितं रोपितरत्नशृङ्गम् । भजे भवानीभवनावतंस- -मादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
मुनिभिः स्वात्मलाभाय यच्चक्रं हृदि सेव्यते । तत्र पश्यामि बुद्ध्या तदक्षरे परमे व्योमन् ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
पञ्चब्रह्ममयो मञ्चस्तत्र यो बिन्दुमध्यगः । तव कामेशि वासोऽयमायुष्मन्तं करोतु माम् ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
नानारत्नगुलुच्छालीकान्तिकिम्मीलितोदरम् । विमृशामि वितानं तेऽतिश्लक्ष्णमतिलोमशम् ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16 ॥ श्री ॥
पर्यङ्कतल्पोपरि दर्शनीयं सबाणचापाङ्कुशपाशपाणिम् । अशेषभूषारमणीयमीडे त्रिलोचनं नीलकण्ठं प्रशान्तम् ॥ १६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17 ॥ श्री ॥
जटारुणं चन्द्रकलाललामं उद्वेललावण्यकलाभिरामम् । कामेश्वरं कामशरासनाङ्कं समस्तसाक्षिं तमसः परस्तात् ॥ १७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18 ॥ श्री ॥
तत्र कामेशवामाङ्के खेलन्तीमलिकुन्तलाम् । सच्चिदानन्दलहरीं महालक्ष्मीमुपास्महे ॥ १८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19 ॥ श्री ॥
चारुगोरोचनापङ्कजम्बालितघनस्तनीम् । नमामि त्वामहं लोकमातरं पद्ममालिनीम् ॥ १९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 20 ॥ श्री ॥
शिवे नमन्निर्जरकुञ्जरासुर- -प्रतोलिकामौलिमरीचिवीचिभिः । इदं तव क्षालनजातसौभगं चरणं नो लोके सुधितां दधातु ॥ २० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 20): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 21 ॥ श्री ॥
कल्पस्यादौ कारणेशानपि त्री- -न्स्रष्टुं देवि त्रीन्गुणानादधानाम् । सेवे नित्यं श्रेयसे भूयसे त्वा- -मजामेकां लोहितशुक्लकृष्णाम् ॥ २१ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 21): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 22 ॥ श्री ॥
केशोद्भूतैरद्भुतामोदपूरै- -राशाबृन्दं सान्द्रमापूरयन्तीम् । त्वामानम्य त्वत्प्रसादात्स्वयम्भू- -रस्मान्मायी सृजते विश्वमेतत् ॥ २२ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 22): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 23 ॥ श्री ॥
अर्धोन्मीलद्यौवनोद्दामदर्पां दिव्याकल्पैरर्पयन्तीं मयूखान् । देवि ध्यात्वा त्वां पुरा कैटभारि- -र्विश्वं बिभर्ति भुवनस्य नाभिः ॥ २३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 23): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 24 ॥ श्री ॥
कल्हारश्रीमञ्जरीपुञ्जरीतिं धिक्कुर्वन्तीमम्ब ते पाटलिम्ना । मूर्तिं ध्यात्वा शाश्वतीं भूतिमाय- -न्निन्द्रो राजा जगतो य ईशे ॥ २४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 24): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 25 ॥ श्री ॥
देवतान्तरमन्त्रौघजपश्रीफलभूतया । जापकस्तव देव्यन्ते विद्यया विन्दतेऽमृतम् ॥ २५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 25): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 26 ॥ श्री ॥
पुंस्कोकिलकलक्वाणकोमलालापशालिनि । भद्राणि कुरु मे मातर्दुरितानि परासुव ॥ २६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 26): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
ध्यानम् ॥ श्री ॥
अन्तेवासिन्नस्ति चेत्ते मुमुक्षा वक्ष्ये युक्तिं मुक्तसर्वैषणः सन् । सद्भ्यः साक्षात्सुन्दरीं ज्ञप्तिरूपां श्रद्धाभक्तिध्यानयोगादवेहि ॥ २७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
न्यासः ॥ श्री ॥
षोढान्यासादिदेवैश्च सेविता चक्रमध्यगा । कामेशमहिषी भूयः षोडशी शर्म यच्छतु ॥ २८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक न्यासः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 29 ॥ श्री ॥
शान्तो दान्तो देशिकेन्द्रं प्रणम्य तस्यादेशात्तारकं मन्त्रतत्त्वम् । जानीते चेदम्ब धन्यः समानं नातः परं वेदितव्यं हि किञ्चित् ॥ २९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 29): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 30 ॥ श्री ॥
त्वमेव कारणं कार्यं क्रिया ज्ञानं त्वमेव च । त्वामम्ब न विना किञ्चित्त्वयि सर्वं प्रतिष्ठितम् ॥ ३० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 30): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 31 ॥ श्री ॥
परागमद्रीन्द्रसुते तवाङ्घ्रि- -सरोजयोरम्ब दधामि मूर्ध्ना । अलङ्कृतं वेदवधूशिरोभि- -र्यतो जातो भुवनानि विश्वा ॥ ३१ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 31): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 32 ॥ श्री ॥
दुष्टान्दैत्यान्हन्तुकामां महर्षीन् शिष्टानन्यान्पातुकामां कराब्जैः । अष्टाभिस्त्वां सायुधैर्भासमानां दुर्गां देवीग्ं शरणमहं प्रपद्ये ॥ ३२ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 32): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 33 ॥ श्री ॥
देवि सर्वानवद्याङ्गि त्वामनादृत्य ये क्रियाः । कुर्वन्ति निष्फलास्तेषामदुग्धा इव धेनवः ॥ ३३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 33): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 34 ॥ श्री ॥
नाहं मन्ये दैवतं मान्यमन्य- -त्त्वत्पादाब्जादम्बिके कुम्भजाद्याः । ये ध्यातारो भक्तिसंशुद्धचित्ताः परामृतात्परिमुच्यन्ति सर्वे ॥ ३४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 34): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 35 ॥ श्री ॥
कुर्वाणोऽपि दुरारम्भांस्तव नामानि शाम्भवि । प्रजपन्नेति मायान्तमति मृत्युं तराम्यहम् ॥ ३५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 35): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 36 ॥ श्री ॥
कल्याणि त्वं कुन्दहासप्रकाशै- -रन्तर्ध्वान्तं नाशयन्ती क्षणेन । हन्तास्माकं ध्यायतां त्वत्पदाब्ज- -मुच्चतिष्ठ महते सौभगाय ॥ ३६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 36): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 37 ॥ श्री ॥
तितीर्षया भवाम्भोधेर्हयग्रीवादयः पुरा । अप्रमत्ता भवत्पूजां सुविद्वांसो वितेनिरे ॥ ३७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 37): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 38 ॥ श्री ॥
मद्वश्या ये दुराचारा ये च सन्मार्गगामिनः । भवत्याः कृपया सर्वे सुवर्यन्तु यजमानाः ॥ ३८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 38): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 39 ॥ श्री ॥
श्रीचक्रस्थां शाश्वतैश्वर्यदात्रीं पौण्ड्रं चापं पुष्पबाणान्दधानाम् । बन्धूकाभां भावयामि त्रिनेत्रां तामग्निवर्णां तपसा ज्वलन्तीम् ॥ ३९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 39): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 40 ॥ श्री ॥
भवानि तव पादाब्जनिर्णेजनपवित्रताः । भवामयप्रशान्त्यै त्वामपो याचामि भेषजम् ॥ ४० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 40): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 41 ॥ श्री ॥
चिदानन्दसुधाम्भोधेस्तवानन्दलवोऽस्ति यः । कारणेशैस्त्रिभिः साकं तद्विश्वमुपजीवति ॥ ४१ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 41): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 42 ॥ श्री ॥
नो वा यागैर्नैव पूर्तादिकृत्यै- -र्नो वा जप्यैर्नो महद्भिस्तपोभिः । नो वा योगैः क्लेशकृद्भिः सुमेधा निचाय्येमां शान्तिमत्यन्तमेति ॥ ४२ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 42): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 43 ॥ श्री ॥
प्रातः पाहि महाविद्ये मध्याह्ने तु मृडप्रिये । सायं पाहि जगद्वन्द्ये पुनर्नः पाहि विश्वतः ॥ ४३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 43): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 44 ॥ श्री ॥
बन्धूकाभैर्भानुभिर्भासयन्ती विश्वं शश्वत्तुङ्गपीनस्तनार्धा । लावण्याब्धेः सुन्दरि त्वं प्रसादा- -दायुः प्रजाग्ं रयिमस्मासु धेहि ॥ ४४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 44): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 45 ॥ श्री ॥
कर्णाकर्णय मे तत्त्वं या चिच्छक्तिरितीर्यते । त्रिर्वदामि मुमुक्षूणां सा काष्ठा सा परा गतिः ॥ ४५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 45): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 46 ॥ श्री ॥
वाग्देवीति त्वां वदन्त्यम्ब केचि- -ल्लक्ष्मीर्गौरीत्येवमन्येऽप्युशन्ति । शश्वन्मातः प्रत्यगद्वैतरूपां शंसन्ति केचिन्निविदो जनाः ॥ ४६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 46): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 47 ॥ श्री ॥
ललितेति सुधापूरमाधुरीचोरमम्बिके । तव नामास्ति यत्तेन जिह्वा मे मधुमत्तमा ॥ ४७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 47): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 48 ॥ श्री ॥
ये सम्पन्नाः साधनैस्तैश्चत्तुर्भिः शुश्रूषाभिर्देशिकं प्रीणयन्ति । सम्यग्विद्वान् शुद्धसत्त्वान्तराणां तेषामेवैतां ब्रह्मविद्यां वदेत ॥ ४८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 48): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 49 ॥ श्री ॥
अभिचारादिभिः कृत्यां यः प्रेरयति मय्युमे । तव हुङ्कारसन्त्रस्ता प्रत्यक्कर्तारमृच्छतु ॥ ४९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 49): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 50 ॥ श्री ॥
जगत्पवित्रि मामिकामपाहराशु दुर्जराम् । प्रसीद मे दयाधुने प्रशस्तिमम्ब नः स्कृधि ॥ ५० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 50): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 51 ॥ श्री ॥
कदम्बारुणमम्बाया रूपं चिन्तय चित्त मे । मुञ्च पापीयसीं निष्ठां मा गृधः कस्य स्विद्धनम् ॥ ५१ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 51): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 52 ॥ श्री ॥
भण्डभण्डनलीलायां रक्तचन्दनपङ्किलः । अङ्कुशस्तव तं हन्याद्यश्च नो द्विषते जनः ॥ ५२ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 52): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 53 ॥ श्री ॥
रे रे चित्त त्वं वृधा शोकसिन्धौ मज्जस्यन्तर्वच्म्युपायं विमुक्त्यै । देव्याः पादौ पूजयैकाक्षरेण तत्ते पदं सङ्ग्रहेण ब्रवीम्योम् ॥ ५३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 53): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 54 ॥ श्री ॥
चञ्चद्बालातपज्योत्स्नाकलामण्डलशालिने । ऐक्षवाय नमो मातर्बाहुभ्यां तव धन्वने ॥ ५४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 54): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 55 ॥ श्री ॥
तामेवाद्यां ब्रह्मविद्यामुपासे मूर्तैर्वेदैः स्तूयमानां भवानीम् । हन्त स्वात्मत्वेन यां मुक्तिकामो मत्वा धीरो हर्षशोकौ जहाति ॥ ५५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 55): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 56 ॥ श्री ॥
शरणं करवाण्यम्ब चरणं तव सुन्दरि । शपे त्वत्पादुकाभ्यां मे नान्यः पन्था अयनाय ॥ ५६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 56): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 57 ॥ श्री ॥
रत्नच्छत्रैश्चामरैर्दर्पणाद्यै- -श्चक्रेशानीं सर्वदोपाचरन्त्यः । योगिन्योऽन्याः शक्तयश्चाणिमाद्या यूयं पातः स्वस्तिभिः सदा नः ॥ ५७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 57): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 58 ॥ श्री ॥
दरिद्रं मां विजानीहि सर्वज्ञासि यतः शिवे । दूरीकृत्याशु दुरितमथा नो वर्धया रयिम् ॥ ५८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 58): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 59 ॥ श्री ॥
महेश्वरि महामन्त्रकूटत्रयकलेबरे । कादिविद्याक्षरश्रेणिमुशन्तस्त्वा हवामहे ॥ ५९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 59): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 60 ॥ श्री ॥
मूलाधारादूर्ध्वमन्तश्चरन्तीं भित्त्वा ग्रन्थीन्मूर्ध्नि निर्यत्सुधार्द्राम् । पश्यन्तस्त्वां ये च तृप्तिं लभन्ते तेषां शान्तिः शाश्वती नेतरेषाम् ॥ ६० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 60): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
ध्यानम् ॥ श्री ॥
मह्यं द्रुह्यन्ति ये मातस्त्वद्ध्यानासक्तचेतसे । तानम्ब सायकैरेभिरव ब्रह्मद्विषो जहि ॥ ६१ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 62 ॥ श्री ॥
त्वद्भक्तानामम्ब शान्तैषणानां ब्रह्मिष्ठानां दृष्टिपातेन पूतः । पापीयानप्यावृतः स्वर्वधूभिः शोकातिगो मोदते स्वर्गलोके ॥ ६२ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 62): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 63 ॥ श्री ॥
सन्तु विद्या जगत्यस्मिन्संसारभ्रमहेतवः । भजेऽहं त्वां यया विद्वान्विद्ययामृतमश्नुते ॥ ६३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 63): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 64 ॥ श्री ॥
विद्वन्मुख्यैर्विद्रुमाभं विशाल- -श्रोणीशिञ्जन्मेखलाकिङ्किणीकम् । चन्द्रोत्तंसं चिन्मयं वस्तु किञ्चि- -द्विद्धि त्वमेतन्निहितं गुहायाम् ॥ ६४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 64): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 65 ॥ श्री ॥
न विस्मरामि चिन्मूर्तिमिक्षुकोदण्डशालिनीम् । मुनयः सनकप्रेष्ठास्तामाहुः परमां गतिम् ॥ ६५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 65): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 66 ॥ श्री ॥
चक्षुःप्रेङ्खत्प्रेमकारुण्यधारां हंसज्योत्स्नापूरहृष्यच्चकोराम् । यामाश्लिष्यन्मोदते देवदेवः सा नो देवी सुहवा शर्म यच्छतु ॥ ६६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 66): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 67 ॥ श्री ॥
मुञ्च वञ्चकतां चित्त पामरं चापि दैवतम् । गृहाण पदमम्बाया एतदालम्बनं परम् ॥ ६७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 67): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 68 ॥ श्री ॥
का मे भीतिः का क्षतिः किं दुरापं कामेशाङ्कोत्तुङ्गपर्यङ्कसंस्थाम् । तत्त्वातीतामच्युतानन्ददात्रीं देवीमहं निरृतिं वन्दमानः ॥ ६८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 68): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 69 ॥ श्री ॥
चिन्तामणिमयोत्तंसकान्तिकञ्चुकितानने । ललिते त्वां सकृन्नत्वा न बिभेति कुतश्चन ॥ ६९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 69): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 70 ॥ श्री ॥
तारुण्योत्तुङ्गितकुचे लावण्योल्लासितेक्षणे । तवाज्ञयैव कामाद्या मास्मान्प्रापन्नरातयः ॥ ७० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 70): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 71 ॥ श्री ॥
आकर्णाकृष्टकामासस्त्रसञ्जातं तापमम्ब मे । आचामतु कटाक्षस्ते पर्जन्यो वृष्टिमानिव ॥ ७१ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 71): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 72 ॥ श्री ॥
कुर्वे गर्वेणापचारानपारा- -नद्यप्यम्ब त्वत्पदाब्जं तथापि । मन्ये धन्ये देवि विद्यावलम्बं मातेव पुत्रं बिभृतास्वेनम् ॥ ७२ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 72): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 73 ॥ श्री ॥
यथोपास्तिक्षतिर्न स्यात्तव चक्रस्य सुन्दरि । कृपया कुरु कल्याणि तथा मे स्वस्तिरायुषि ॥ ७३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 73): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 74 ॥ श्री ॥
चक्रं सेवे तारकं सर्वसिध्यै श्रीमन्मातः सिद्धयश्चाणिमाद्याः । नित्या मुद्रा शक्तयश्चाङ्गदेव्यो यस्मिन्देवा अधि विश्वे निषेदुः ॥ ७४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 74): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 75 ॥ श्री ॥
सुकुमारे सुखाकारे सुनेत्रे सूक्ष्ममध्यमे । सुप्रसन्ना भव शिवे सुमृडीका सरस्वती ॥ ७५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 75): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 76 ॥ श्री ॥
विद्युद्वल्लीकन्दलीं कल्पयन्तीं मूर्तिं स्फूर्त्या पङ्कजं धारयन्तीम् । ध्यायन्हि त्वां जायते सार्वभौमो विश्वा आशाः पृतनाः सञ्जयञ्जयन् ॥ ७६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 76): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 77 ॥ श्री ॥
अविज्ञाय परां शक्तिमात्मभूतां महेश्वरीम् । अहो पतन्ति निरयेष्वेके चात्महनो जनाः ॥ ७७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 77): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 78 ॥ श्री ॥
सिन्दूराभैः सुन्दरैरंशुबृन्दै- -र्लाक्षालक्ष्म्यां मज्जयन्तीं जगन्ति । हेरम्बाम्ब त्वां हृदा लम्बते य- -स्तस्मै विशः स्वयमेवानमन्ते ॥ ७८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 78): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 79 ॥ श्री ॥
तव तत्त्वं विमृशतां प्रत्यगद्वैतलक्षणम् । चिदानन्दघनादन्यन्नेह नानास्ति किञ्चन ॥ ७९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 79): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 80 ॥ श्री ॥
कण्ठात्कुण्डलिनीं नीत्वा सहस्रारं शिवे तव । न पुनर्जायते गर्भे सुमेधा अमृतोक्षितः ॥ ८० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 80): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 81 ॥ श्री ॥
त्वत्पादुकानुसन्धानप्राप्तसर्वात्मतादृशि । पूर्णाहङ्कृतिमत्यस्मिन्न कर्म लिप्यते नरे ॥ ८१ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 81): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 82 ॥ श्री ॥
तवानुग्रहनिर्भिन्नहृदयग्रन्थिरद्रिजे । स्वात्मत्वेन जगन्मत्वा ततो न विजुगुप्सते ॥ ८२ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 82): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 83 ॥ श्री ॥
कदा वसुदलोपेते त्रिकोणनवकान्विते । आवाहयामि चक्रे त्वां सूर्याभां श्रियमैश्वरीम् ॥ ८३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 83): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 84 ॥ श्री ॥
ह्रीमित्येकं तावकं वाचकार्णं यज्जिह्वाग्रे देवि जागर्ति किञ्चित् । को वायं स्यात्कामकामस्त्रिलोक्यां सर्वेऽस्मै देवाः बलिमावहन्ति ॥ ८४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 84): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 85 ॥ श्री ॥
नाकस्त्रीणां किन्नरीणां नृपाणा- -मप्याकर्षी चेतसा चिन्तनीयम् । त्वत्पाणिस्थं कुङ्कुमाभं शिवे यं द्विष्मस्तस्मिन्प्रति मुञ्चामि पाशम् ॥ ८५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 85): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 86 ॥ श्री ॥
नूनं सिंहासनेश्वर्यास्तवाज्ञां शिरसा वहन् । भयेन पवमानोऽयं सर्वा दिशोऽनुविधावति ॥ ८६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 86): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 87 ॥ श्री ॥
त्रिकलाढ्यां त्रिहृल्लेखां द्विहंसस्वरभूषिताम् । यो जपत्यम्ब ते विद्यां सोऽक्षरः परमः स्वराट् ॥ ८७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 87): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 88 ॥ श्री ॥
दारिद्र्याब्धौ देवि मग्नोऽपि शश्व- -द्वाचा याचे नाहमम्ब त्वदन्यम् । तस्मादस्मद्वाञ्छितं पूरयैत- -दुषा सा नक्ता सुदुघेव धेनुः ॥ ८८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 88): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 89 ॥ श्री ॥
यो वा यद्यत्कामनाकृष्टचित्तः स्तुत्वोपास्ते देवि ते चक्रविद्याम् । कल्याणानामालयः कालयोगा- -त्तं तं लोकं जयते तांश्च कामान् ॥ ८९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 89): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 90 ॥ श्री ॥
साधकः सततं कुर्यादैक्यं श्रीचक्रदेहयोः । तथा देव्यात्मनोरैक्यमेतावदनुशासनम् ॥ ९० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 90): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 91 ॥ श्री ॥
हस्ताम्भोजप्रोल्लसच्चामराभ्यां श्रीवाणीभ्यां पार्श्वयोर्वीज्यमानाम् । श्रीसंम्राज्ञि त्वां सदालोकयेयं सदा सद्भिः सेव्यमानां निगूढाम् ॥ ९१ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 91): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 92 ॥ श्री ॥
इष्टानिष्टप्राप्तिविच्छित्तिहेतुः स्तोतुं वाचां क्लुप्तिरित्येव मन्ये । त्वद्रूपं हि स्वानुभूत्यैकवेद्यं न चक्षुषा गृह्यते नापि वाचा ॥ ९२ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 92): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 93 ॥ श्री ॥
हरस्वरैश्चतुर्वर्गप्रदं मन्त्रं सबिन्दुकम् । देव्या जपत विप्रेन्द्रा अन्या वाचो विमुञ्चथ ॥ ९३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 93): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 94 ॥ श्री ॥
यस्ते राकाचन्द्रबिम्बासनस्थां पीयूषाब्धिं कल्पयन्तीं मयूखैः । मूर्तिं भक्त्या ध्यायते हृत्सरोजे न तस्य रोगो न जरा न मृत्युः ॥ ९४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 94): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 95 ॥ श्री ॥
तुभ्यं मातर्योऽञ्जलिं मूर्ध्नि धत्ते मौलिश्रेण्या भूभुजस्तं नमन्ति । यः स्तौति त्वामम्ब चिद्वल्लिवाचा तं धीरासः कवय उन्नयन्ति ॥ ९५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 95): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 96 ॥ श्री ॥
वैरिञ्चोघैर्विष्णुरुद्रेन्द्रबृन्दै- -र्दुर्गाकालीभैरवीशक्तिसङ्घैः । यन्त्रेशि त्वं वर्तसे स्तूयमाना न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकम् ॥ ९६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 96): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 97 ॥ श्री ॥
भूत्यै भवानि त्वां वन्दे सुराः शतमखादयः । त्वामानम्य समृद्धाः स्युरायो धामानि दिव्यानि ॥ ९७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 97): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 98 ॥ श्री ॥
पुष्पवत्पुल्लताटङ्कां प्रातरादित्यपाटलाम् । यस्त्वामन्तः स्मरत्यम्ब तस्य देवा असन्वशे ॥ ९८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 98): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 99 ॥ श्री ॥
वश्ये विद्रुमसङ्काशां विद्यायां विशदप्रभाम् । त्वामम्ब भावयेद्भूत्यै सुवर्णां हेममालिनीम् ॥ ९९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 99): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 100 ॥ श्री ॥
वामाङ्कस्थामीशितुर्दीप्यमानां भूषाबृन्दैरिन्दुरेखावतंसाम् । यस्त्वां पश्यन् सन्ततं नैव तृप्तः तस्मै च देवि वषडस्तु तुभ्यम् ॥ १०० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 100): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 101 ॥ श्री ॥
नवनीपवनीवासलालसोत्तरमानसे । शृङ्गारदेवते मातः श्रियं वासय मे कुले ॥ १०१ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 101): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 102 ॥ श्री ॥
भक्त्याभक्त्या वापि पद्यावसान- -श्रुत्या स्तुत्या चैतया स्तौति यस्त्वाम् । तस्य क्षिप्रं त्वत्प्रसादेन मातः सत्याः सन्तु यजमानस्य कामाः ॥ १०२ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 102): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 103 ॥ श्री ॥
बालिशेन मया प्रोक्तमपि वात्सल्यशालिनोः । आनन्दमादिदम्पत्योरिमा वर्धन्तु वाङ्गिरः ॥ १०३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 103): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 104 ॥ श्री ॥
माधुरीसौरभावासचापसायकधारिणीम् । देवीं ध्यायन् पठेदेतत्सर्वकामार्थसिद्धये ॥ १०४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 104): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 105 ॥ श्री ॥
स्तोत्रमेतत्प्रजपतस्तव त्रिपुरसुन्दरि । अनुद्वीक्ष्य भयाद्दूरं मृत्युर्धावति पञ्चमः ॥ १०५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 105): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 106 ॥ श्री ॥
यः पठति स्तुतिमेतां विद्यावन्तं तमम्ब धनवन्तम् । कुरु देवि यशस्वन्तं वर्चस्वन्तं मनुष्येषु ॥ १०६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 106): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 107 ॥ श्री ॥
ये शृण्वन्ति स्तुतिमिमां तव देव्यनसूयकाः । तेभ्यो देहि श्रियं विद्यामुद्वर्च उत्तनूबलम् ॥ १०७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 107): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 108 ॥ श्री ॥
त्वामेवाहं स्तौमि नित्यं प्रणौमि श्रीविद्येशां वच्मि सञ्चिन्तयामि । अध्यास्ते या विश्वमाता विराजो हृत्पुण्डरीकं विरजं विशुद्धम् ॥ १०८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 108): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 109 ॥ श्री ॥
शङ्करेण रचितं स्तवोत्तमं यः पठेज्जगति भक्तिमान्नरः । तस्य सिद्धिरतुला भवेद्ध्रुवा सुन्दरी च सततं प्रसीदति ॥ १०९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 109): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 110 ॥ श्री ॥
यत्रैव यत्रैव मनो मदीयं तत्रैव तत्रैव तव स्वरूपम् । यत्रैव यत्रैव शिरो मदीयं तत्रैव तत्रैव पदद्वयं ते ॥ ११० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक 110): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ त्रिपुरसुन्दरी वेदपाद स्तवः । ॥ इति त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ मां आद्याशक्ति जगदम्बा की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
मां आद्याशक्ति जगदम्बा का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
❓

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर शुक्रवार, मंगलवार, अष्टमी, नवरात्रि पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।