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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मां दुर्गा (आदिशक्ति)

सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र

सप्तश्लोकी दुर्गा संपूर्ण 700 श्लोकों वाली दुर्गा सप्तशती का महामंत्र-मय सार है। भगवान शिव द्वारा कथित इन सात श्लोकों का पाठ करने से संपूर्ण सप्तशती के पाठ का पुण्य प्राप्त होता है।

रचयिता भगवान शिव (देवी संवाद)
स्रोत / ग्रन्थ श्री दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण)
शुभ दिन / तिथि शुक्रवार, अष्टमी तिथि, नवरात्रि
जप माला रुद्राक्ष अथवा कमल गट्टे की माला - 1 अथवा 7 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा । बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥१॥
हिंदी भावार्थ: वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती हैं (सृष्टि के संचालन के लिए अपनी माया का विस्तार करती हैं)।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ॥२॥
हिंदी भावार्थ: हे दुर्गे! संकट के समय स्मरण करने पर आप समस्त प्राणियों का भय हर लेती हैं और स्वस्थ (शांत) चित्त से स्मरण करने पर परम कल्याणकारी बुद्धि प्रदान करती हैं। हे दारिद्र्य, दुःख और भय को हरने वाली माता! आपके सिवा दूसरी कौन है जिसका चित्त सबका उपकार करने के लिए सदा द्रवित रहता है!
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥३॥
हिंदी भावार्थ: हे समस्त मंगलों को मंगल करने वाली, कल्याणदायिनी, सब मनोरथों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली, हे गौरि! हे नारायणि! आपको बारंबार नमस्कार है।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥४॥
हिंदी भावार्थ: शरणागत, दीन और पीड़ितों की रक्षा में सदा तत्पर रहने वाली तथा सबकी पीड़ा हरने वाली हे देवी नारायणि! आपको नमस्कार है।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥५॥
हिंदी भावार्थ: सर्वस्वरूपा, सबकी स्वामिनी तथा सब प्रकार की शक्तियों से संपन्न हे दिव्य दुर्गे देवी! समस्त भयों से हमारी रक्षा कीजिए, आपको नमस्कार है।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् । त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥६॥
हिंदी भावार्थ: प्रसन्न होने पर आप समस्त रोगों को नष्ट कर देती हैं और रुष्ट होने पर सभी मनोवांछित कामनाओं का नाश कर देती हैं। जो आपकी शरण में आ जाते हैं उन पर कोई विपत्ति नहीं आती, बल्कि वे स्वयं दूसरों को आश्रय देने वाले बन जाते हैं।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि । एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम् ॥७॥
हिंदी भावार्थ: हे तीनों लोकों की स्वामिनी अखिलेश्र्वरी! आप इसी प्रकार संसार की समस्त बाधाओं को शांत करें और हमारे शत्रुओं का संहार करें।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ संपूर्ण दुर्गा सप्तशती के पाठ के समान पुण्य और फल की प्राप्ति
  • ✓ दारिद्र्य, दुःख और भय का समूल नाश
  • ✓ समस्त संकटों और असाध्य व्याधियों से अचूक सुरक्षा
  • ✓ गृह में सुख, शांति, समृद्धि और देवी भगवती की कृपा
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
पवित्रता व आचमन
प्रातः काल स्नानोपरांत लाल या पीले स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
दिशा व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
3
देवी पूजन व अर्पण
माता को लाल पुष्प, कुंकुम, अक्षत, इत्र और नैवेद्य (खीर, बताशा या फल) अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में अक्षत-जल लेकर अपनी मनोकामना का संकल्प करें और निष्ठापूर्वक स्तोत्र का पाठ करें।
5
आरती व क्षमा प्रार्थना
पाठ के अंत में देवी की आरती करें और 'अपराध क्षमापन स्तोत्र' बोलकर क्षमा मांगें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▼

प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष अथवा कमल गट्टे की माला - 1 अथवा 7 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।

इस स्तोत्र पाठ के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।