सप्तश्लोकी दुर्गा संपूर्ण 700 श्लोकों वाली दुर्गा सप्तशती का महामंत्र-मय सार है। भगवान शिव द्वारा कथित इन सात श्लोकों का पाठ करने से संपूर्ण सप्तशती के पाठ का पुण्य प्राप्त होता है।
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प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष अथवा कमल गट्टे की माला - 1 अथवा 7 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।
यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।
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