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🌳 सती सावित्री, सत्यवान व वट वृक्ष (त्रिदेव) ✨ व्रत व अनुष्ठान 📖 4 षोडशोपचार क्रम

वट सावित्री व्रत एवं वट वृक्ष पूजन विधि

🗓️ शुभ दिन व मुहूर्त: ज्येष्ठ अमावस्या (पूर्णिमांत व अमान्त अनुसार)

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Puranic Significance · धार्मिक व आध्यात्मिक महात्म्य

पूजन का महत्व एवं चमत्कारी फल

सती सावित्री ने अपने तपोबल और निष्ठा से यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे। वट (बरगद) वृक्ष के मूल में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव जी का वास माना गया है। सुहागिन स्त्रियां वट वृक्ष को कलावा लपेटकर 108 या 7 बार परिक्रमा करती हैं, जिससे पति को दीर्घायु, स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।

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Interactive Puja Thali Checklist

सम्पूर्ण पूजन सामग्री सूची (चेकलिस्ट)

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💡 सुझाव: थाली में सामग्री सजाते समय प्रत्येक वस्तु के आगे टिक (✓) लगाएं ताकि कोई सामग्री छूटे नहीं।

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Preliminary Purification & Vow

आरंभिक शुद्धि, दीप प्रज्वलन एवं संकल्प

१. आसन शुद्धि:

वट वृक्ष की छांव में आसन बिछाएं।

२. आचमन (मुख शुद्धि):

आचमन करें।

३. पवित्रीकरण (आत्म शुद्धि मंत्र):

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

पवित्र हों।

४. दीप प्रज्वलन व प्रणाम:

शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥

दीपक जलाएं।

५. संकल्प (Sankalpa):

सत्यवान-सावित्री के समान अखंड सौभाग्य का संकल्प लें।

॥ वैदिक षोडशोपचार पूजन क्रम (१ से १६) ॥

मंत्र, विधि एवं भावार्थ सहित संपूर्ण पूजन विधान

प्रत्येक उपचार को श्रद्धापूर्वक संपन्न करें और साथ में दिए गए वैदिक/पौराणिक मंत्र का उच्चारण करें।

1 १. वट वृक्ष पूजन व अभिषेक

उपचार #1
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

नमो वैवस्वताय नमो धात्रे नमो नमो विष्णवे च। वटवृक्षाय देवाय सर्वसौख्यप्रदायिने॥

👉 विधि व क्रिया (What to do):

वट वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं, रोली-हल्दी का लेप लगाएं और भीगे चने अर्पित करें।

📖 भावार्थ: त्रिदेव स्वरूप वट वृक्ष का अभिषेक करते हैं।

2 २. सूत लपेटना व परिक्रमा (Soot & Pradakshina)

उपचार #2
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले। तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च वृद्धिं मे कुरु सुव्रत॥

👉 विधि व क्रिया (What to do):

हाथ में कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष के तने पर लपेटते हुए 7 या 108 बार परिक्रमा करें।

📖 भावार्थ: अखंड सौभाग्य के सूत्र से वट वृक्ष का बंधन करते हैं।

3 ३. पंखा झलना व कथा श्रवण

उपचार #3
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

ॐ सती सावित्र्यै नमः।

👉 विधि व क्रिया (What to do):

बांस के पंखे से वट वृक्ष और पति को हवा करें, फिर सावित्री-सत्यवान की व्रत कथा सुनें।

📖 भावार्थ: सती सावित्री की पातिव्रत्य कथा सुनते हैं।

4 ४. चने निगलकर व्रत पारण

उपचार #4
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।

👉 विधि व क्रिया (What to do):

वट वृक्ष की एक कोंपल और भीगे चने के दाने बिना चबाए जल के साथ निगलकर व्रत खोलें।

📖 भावार्थ: आशीर्वाद स्वरूप पारण संपन्न होता है।
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Vedic Guidelines & Prohibitions

महत्वपूर्ण पूजन नियम, सावधानियां व वर्जित कार्य

  • ✦ पूजा केवल वट (बरगद) के पेड़ के नीचे ही की जाती है; यदि वृक्ष सुलभ न हो तो वट की डाली गमले में रोपकर पूजा करें।
  • ✦ परिक्रमा करते समय सूत टूटना नहीं चाहिए; धागे को सावधानी से लपेटें।
  • ✦ व्रत में भीगे चने का प्रसाद अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे सुहागिनों में बांटा जाता है।

🔔 संबंधित चालीसा एवं महाआरती संग्रह

पूजन की पूर्णता हेतु स्तुति पाठ व कर्पूर आरती अवश्य करें।