वट सावित्री व्रत एवं वट वृक्ष पूजन विधि
🗓️ शुभ दिन व मुहूर्त: ज्येष्ठ अमावस्या (पूर्णिमांत व अमान्त अनुसार)
पूजन का महत्व एवं चमत्कारी फल
सती सावित्री ने अपने तपोबल और निष्ठा से यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे। वट (बरगद) वृक्ष के मूल में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव जी का वास माना गया है। सुहागिन स्त्रियां वट वृक्ष को कलावा लपेटकर 108 या 7 बार परिक्रमा करती हैं, जिससे पति को दीर्घायु, स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।
सम्पूर्ण पूजन सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
💡 सुझाव: थाली में सामग्री सजाते समय प्रत्येक वस्तु के आगे टिक (✓) लगाएं ताकि कोई सामग्री छूटे नहीं।
आरंभिक शुद्धि, दीप प्रज्वलन एवं संकल्प
१. आसन शुद्धि:
वट वृक्ष की छांव में आसन बिछाएं।
२. आचमन (मुख शुद्धि):
आचमन करें।
३. पवित्रीकरण (आत्म शुद्धि मंत्र):
पवित्र हों।
४. दीप प्रज्वलन व प्रणाम:
दीपक जलाएं।
५. संकल्प (Sankalpa):
सत्यवान-सावित्री के समान अखंड सौभाग्य का संकल्प लें।
मंत्र, विधि एवं भावार्थ सहित संपूर्ण पूजन विधान
प्रत्येक उपचार को श्रद्धापूर्वक संपन्न करें और साथ में दिए गए वैदिक/पौराणिक मंत्र का उच्चारण करें।
1 १. वट वृक्ष पूजन व अभिषेक
उपचार #1नमो वैवस्वताय नमो धात्रे नमो नमो विष्णवे च। वटवृक्षाय देवाय सर्वसौख्यप्रदायिने॥
वट वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं, रोली-हल्दी का लेप लगाएं और भीगे चने अर्पित करें।
2 २. सूत लपेटना व परिक्रमा (Soot & Pradakshina)
उपचार #2यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले। तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च वृद्धिं मे कुरु सुव्रत॥
हाथ में कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष के तने पर लपेटते हुए 7 या 108 बार परिक्रमा करें।
3 ३. पंखा झलना व कथा श्रवण
उपचार #3ॐ सती सावित्र्यै नमः।
बांस के पंखे से वट वृक्ष और पति को हवा करें, फिर सावित्री-सत्यवान की व्रत कथा सुनें।
4 ४. चने निगलकर व्रत पारण
उपचार #4देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
वट वृक्ष की एक कोंपल और भीगे चने के दाने बिना चबाए जल के साथ निगलकर व्रत खोलें।
महत्वपूर्ण पूजन नियम, सावधानियां व वर्जित कार्य
- ✦ पूजा केवल वट (बरगद) के पेड़ के नीचे ही की जाती है; यदि वृक्ष सुलभ न हो तो वट की डाली गमले में रोपकर पूजा करें।
- ✦ परिक्रमा करते समय सूत टूटना नहीं चाहिए; धागे को सावधानी से लपेटें।
- ✦ व्रत में भीगे चने का प्रसाद अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे सुहागिनों में बांटा जाता है।
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पूजन की पूर्णता हेतु स्तुति पाठ व कर्पूर आरती अवश्य करें।