करवा चौथ व्रत एवं पूजन विधि
🗓️ शुभ दिन व मुहूर्त: कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (चंद्रोदय समय)
पूजन का महत्व एवं चमत्कारी फल
करवा चौथ सुहागिन महिलाओं का सर्वाधिक आस्थावान व्रत है। यह व्रत पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुरक्षा और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए पूर्ण निर्जला रखा जाता है। सायंकाल माता पार्वती, शिव जी, कार्तिकेय और गणेश जी की पूजा कर रात्रि में छलनी से चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के पश्चात पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत पूर्ण होता है।
सम्पूर्ण पूजन सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
💡 सुझाव: थाली में सामग्री सजाते समय प्रत्येक वस्तु के आगे टिक (✓) लगाएं ताकि कोई सामग्री छूटे नहीं।
आरंभिक शुद्धि, दीप प्रज्वलन एवं संकल्प
१. आसन शुद्धि:
प्रातः सूर्योदय से पूर्व सरगी ग्रहण कर निर्जला व्रत का संकल्प लें।
२. आचमन (मुख शुद्धि):
सायंकाल 16 शृंगार कर पूजा स्थल पर बैठें।
३. पवित्रीकरण (आत्म शुद्धि मंत्र):
पवित्रीकरण करें।
४. दीप प्रज्वलन व प्रणाम:
दीपक जलाएं।
५. संकल्प (Sankalpa):
अखंड सौभाग्य हेतु करवा चौथ व्रत का संकल्प लें।
मंत्र, विधि एवं भावार्थ सहित संपूर्ण पूजन विधान
प्रत्येक उपचार को श्रद्धापूर्वक संपन्न करें और साथ में दिए गए वैदिक/पौराणिक मंत्र का उच्चारण करें।
1 १. चौथ माता व शिव परिवार पूजन
उपचार #1ॐ शिवायै नमः, ॐ नमः शिवाय, ॐ षण्मुखाय नमः, ॐ गणेशाय नमः।
दीवार या कैलेंडर पर बने करवा चौथ चित्र के समक्ष माता पार्वती, शिव जी व गणेश जी को रोली, अक्षत, पुष्प व सुहाग सामग्री चढ़ाएं।
2 २. करवे की पूजा व फेरना
उपचार #2देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
करवे में जल या गेहूं भरकर ढक्कन पर खांड की मठरी रखें। महिलाएं एक-दूसरे से करवा फेरती हैं और सास को बायना देती हैं।
3 ३. करवा चौथ व्रत कथा श्रवण
उपचार #3ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं चौथ मात्रे नमः।
हाथ में 13 गेहूं के दाने लेकर रानी वीरवती की करवा चौथ कथा सुनें और दाने पल्लू में बांधें।
4 ४. चंद्र दर्शन, अर्घ्य व व्रत पारण
उपचार #4क्षीरोदार्णवसंभूत अत्रिगोत्रसमुद्भव। गृहाणार्घ्यं शशाङ्केश रोहिण्यासहितो मम॥
चंद्रोदय होने पर छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा को देखें, फिर पति का मुख देखें। लोटे में दूध-जल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें और पति के हाथों जल पीकर व्रत खोलें।
महत्वपूर्ण पूजन नियम, सावधानियां व वर्जित कार्य
- ✦ व्रत पूर्णतः निर्जला रखा जाता है; चंद्र दर्शन के बाद ही जल व भोजन ग्रहण करें।
- ✦ इस दिन काले, नीले या सफेद रंग के वस्त्र न पहनें; लाल, गुलाबी या पीले सुहाग वस्त्र ही पहनें।
- ✦ कथा सुनते समय हाथ में 13 गेहूं के दाने अवश्य रखें।
- ✦ पूजा के बाद सास या घर की वरिष्ठ सुहागिन महिला को बायना देकर चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
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पूजन की पूर्णता हेतु स्तुति पाठ व कर्पूर आरती अवश्य करें।