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🚩 श्री हनुमान जी ✨ नित्य व देव पूजन 📖 16 षोडशोपचार क्रम

श्री हनुमान पूजन व चोला अर्पण विधि

🗓️ शुभ दिन व मुहूर्त: प्रत्येक मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती अथवा सुंदरकांड पाठ अवसर

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Puranic Significance · धार्मिक व आध्यात्मिक महात्म्य

पूजन का महत्व एवं चमत्कारी फल

संकटमोचन श्री हनुमान जी कलियुग में प्रत्यक्ष जाग्रत देव हैं। मंगलवार या शनिवार को हनुमान जी की षोडशोपचार पूजा व सिंदूर-चमेली के तेल का चोला चढ़ाने से शनि की साढ़े साती, भूत-प्रेत बाधा, असाध्य रोग, कोर्ट-कचहरी के विवाद और भय का तत्काल नाश होता है। वे अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता हैं।

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Interactive Puja Thali Checklist

सम्पूर्ण पूजन सामग्री सूची (चेकलिस्ट)

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💡 सुझाव: थाली में सामग्री सजाते समय प्रत्येक वस्तु के आगे टिक (✓) लगाएं ताकि कोई सामग्री छूटे नहीं।

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Preliminary Purification & Vow

आरंभिक शुद्धि, दीप प्रज्वलन एवं संकल्प

१. आसन शुद्धि:

लाल ऊनी आसन पर पूर्व या दक्षिण मुख होकर बैठें।

२. आचमन (मुख शुद्धि):

आचमन कर स्वयं को शुद्ध करें।

३. पवित्रीकरण (आत्म शुद्धि मंत्र):

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

पवित्रीकरण करें।

४. दीप प्रज्वलन व प्रणाम:

शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥

चमेली के तेल या घी का दीपक जलाएं।

५. संकल्प (Sankalpa):

हाथ में जल, अक्षत लेकर संकट मुक्ति का संकल्प लें।

॥ वैदिक षोडशोपचार पूजन क्रम (१ से १६) ॥

मंत्र, विधि एवं भावार्थ सहित संपूर्ण पूजन विधान

प्रत्येक उपचार को श्रद्धापूर्वक संपन्न करें और साथ में दिए गए वैदिक/पौराणिक मंत्र का उच्चारण करें।

1 १. ध्यानम् (Dhyanam)

उपचार #1
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

👉 विधि व क्रिया (What to do):

अतुलित बल के धाम, स्वर्ण पर्वत जैसे शरीर वाले पवनपुत्र श्री हनुमान जी का ध्यान करें।

📖 भावार्थ: ज्ञानियों में अग्रगण्य, रघुपति प्रिय भक्त हनुमान जी को नमन करते हैं।

2 २. आवाहनम् (Avahanam)

उपचार #2
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

ॐ हनुमते नमः। आगच्छ वायुपुत्र त्वं रामकार्यधुरन्धर॥

👉 विधि व क्रिया (What to do):

हाथ जोड़कर श्री हनुमान जी का आवाहन करें।

📖 भावार्थ: हे रामदूत अंजनीपुत्र! कृपा कर पधारें।

3 ३. आसनम् (Asanam)

उपचार #3
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

दिव्यासनं मया दत्तं गृहाण कपिसत्तम।

👉 विधि व क्रिया (What to do):

लाल पुष्पों का आसन अर्पित करें।

📖 भावार्थ: पावन आसन समर्पित है।

4 ४. पाद्यम् (Padyam)

उपचार #4
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

ॐ पवनपुत्राय नमः, पाद्यं समर्पयामि।

👉 विधि व क्रिया (What to do):

चरण प्रक्षालन हेतु जल चढ़ाएं।

📖 भावार्थ: पाद्य जल अर्पित है।

5 ५. अर्घ्यम् (Arghyam)

उपचार #5
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

अर्घ्यं गृहाण देवेश रामदूत महाबल।

👉 विधि व क्रिया (What to do):

अर्घ्य जल चढ़ाएं।

📖 भावार्थ: अर्घ्य जल समर्पित है।

6 ६. आचमनीयम् (Achamaniyam)

उपचार #6
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

सुगन्धि निर्मलं तोयं आचम्यतां कपीश्वर।

👉 विधि व क्रिया (What to do):

आचमन हेतु जल चढ़ाएं।

📖 भावार्थ: आचमन जल समर्पित है।

7 ७. स्नानम् व चोला अर्पण (Snanam & Chola)

उपचार #7
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

सिन्दूरं शोभनं रक्तं चमेलीतैलसंयुतम्। चोलकं ते प्रयच्छामि गृहाण कपिकुञ्जर॥

👉 विधि व क्रिया (What to do):

गंगाजल से स्नान कराएं। चमेली के तेल में नारंगी सिंदूर मिलाकर संपूर्ण प्रतिमा पर चोला चढ़ाएं और चांदी का वर्क लगाएं।

📖 भावार्थ: पवनपुत्र को दिव्य चोला व सिंदूर समर्पित है।

8 ८. वस्त्रम् व जनेऊ (Vastram & Janeu)

उपचार #8
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

रक्तवस्त्रं मया दत्तं यज्ञोपवीतं तथैव च।

👉 विधि व क्रिया (What to do):

लाल लंगोट व जनेऊ धारण कराएं।

📖 भावार्थ: लाल वस्त्र व जनेऊ समर्पित है।

9 ९. गन्धम् व अक्षत (Chandan)

उपचार #9
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

रक्तचन्दनमिश्रेण तिलकं धारय प्रभो।

👉 विधि व क्रिया (What to do):

लाल चंदन का तिलक लगाएं।

📖 भावार्थ: चंदन व अक्षत अर्पित है।

10 १०. मंदार पुष्प व राम नाम पीपल माला (Flowers)

उपचार #10
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

आकपुष्पं मया दत्तं रामनामाङ्कितं दलम्।

👉 विधि व क्रिया (What to do):

आक (मदार) के फूलों की माला और 21 पीपल के पत्तों पर 'श्री राम' लिखकर बनी माला पहनाएं।

📖 भावार्थ: श्री राम नाम अंकित पीपल माला अर्पित है।

11 ११. धूपम् (Dhupam)

उपचार #11
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

धूपं गृहाण देवेश मारुते सर्वदुःखहन्।

👉 विधि व क्रिया (What to do):

गुग्गल की धूप दिखाएं।

📖 भावार्थ: धूप समर्पित है।

12 १२. दीपम् (Deepam)

उपचार #12
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

चमेलीतैलसंयुक्तं दीपं दर्शयामि मारुते।

👉 विधि व क्रिया (What to do):

चमेली के तेल या घी का दीपक दिखाएं।

📖 भावार्थ: दीपक समर्पित है।

13 १३. लड्डू, गुड़-चना व तुलसी भोग (Bhog)

उपचार #13
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

मोदकं चणकं चैव तुलसीदलसंयुतम्। नैवेद्यं प्रतिगृह्यतां रामभक्त नमोऽस्तु ते॥

👉 विधि व क्रिया (What to do):

बूंदी के लड्डू या गुड़-चना चढ़ाएं, ऊपर तुलसी दल अवश्य रखें।

📖 भावार्थ: तुलसी युक्त लड्डू व गुड़-चने का भोग अर्पित है।

14 १४. बनारसी पान का बीड़ा (Tambulam)

उपचार #14
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

नागवल्लीदलैर्युक्तं पूगीफलसमन्वितम्। ताम्बूलं गृहाण कपिश्रेष्ठ कुरु कार्यं ममोद्धतम्॥

👉 विधि व क्रिया (What to do):

गुलकंद, सौंफ, लौंग युक्त मीठा पान (बीड़ा) अर्पित करें।

📖 भावार्थ: कार्य सिद्धि हेतु पान का बीड़ा समर्पित है।

15 १५. महाआरती (Aarti)

उपचार #15
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांके॥

👉 विधि व क्रिया (What to do):

कपूर आरती करें और हनुमान चालीसा व बजरंग बाण का पाठ करें।

📖 भावार्थ: श्री हनुमान लला की महाआरती संपन्न करते हैं।

16 १६. प्रदक्षिणा व क्षमा (Pradakshina)

उपचार #16
🕉️ पूजक मंत्र (Sanskrit Mantra):

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

👉 विधि व क्रिया (What to do):

3 बार परिक्रमा करें और साष्टांग दंडवत प्रणाम कर संकट हरने की प्रार्थना करें।

📖 भावार्थ: श्री रामदूत हनुमान जी के चरणों में आत्मसमर्पण करते हैं।
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Vedic Guidelines & Prohibitions

महत्वपूर्ण पूजन नियम, सावधानियां व वर्जित कार्य

  • ✦ हनुमान जी के भोग में तुलसी दल (Tulsi) अनिवार्य है, इसके बिना वे भोग ग्रहण नहीं करते।
  • ✦ हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं, अतः पूजा में पूर्ण ब्रह्मचर्य व शारीरिक-मानसिक शुद्धि का पालन करें।
  • ✦ चोला केवल शुद्ध घी या चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर ही चढ़ाया जाता है।
  • ✦ हनुमान जी की पूजा से पूर्व भगवान श्री राम और माता सीता का स्मरण अवश्य करें।

🔔 संबंधित चालीसा एवं महाआरती संग्रह

पूजन की पूर्णता हेतु स्तुति पाठ व कर्पूर आरती अवश्य करें।