नवरात्रि घटस्थापना व कलश पूजन विधि
🗓️ शुभ दिन व मुहूर्त: शारदीय व चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा तिथि (शुभ मुहूर्त में)
पूजन का महत्व एवं चमत्कारी फल
नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) का विधान वेदोक्त है। कलश में ब्रह्मांड के समस्त 33 कोटि देवी-देवताओं, तीर्थों और त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का वास होता है। शुभ मुहूर्त में विधिवत जौ बोने और कलश स्थापित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नौ दिनों तक माँ दुर्गा का दिव्य आशीर्वाद बना रहता है।
सम्पूर्ण पूजन सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
💡 सुझाव: थाली में सामग्री सजाते समय प्रत्येक वस्तु के आगे टिक (✓) लगाएं ताकि कोई सामग्री छूटे नहीं।
आरंभिक शुद्धि, दीप प्रज्वलन एवं संकल्प
१. आसन शुद्धि:
उत्तर-पूर्व (ईशान) कोण में बैठें।
२. आचमन (मुख शुद्धि):
तीन बार आचमन कर हाथ धोएं।
३. पवित्रीकरण (आत्म शुद्धि मंत्र):
पवित्रीकरण करें।
४. दीप प्रज्वलन व प्रणाम:
दीपक जलाएं।
५. संकल्प (Sankalpa):
9 दिनों के नवरात्रि व्रत व कलश स्थापना का संकल्प लें।
मंत्र, विधि एवं भावार्थ सहित संपूर्ण पूजन विधान
प्रत्येक उपचार को श्रद्धापूर्वक संपन्न करें और साथ में दिए गए वैदिक/पौराणिक मंत्र का उच्चारण करें।
1 १. भूमि पूजन व जौ बोना
उपचार #1ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥
मिट्टी के पात्र में स्वच्छ मिट्टी बिछाकर उसमें जौ के दाने समान रूप से फैलाएं और थोड़ा जल छिड़कें।
2 २. कलश में जल भरना
उपचार #2कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः। मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥ कुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुन्धरा। ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदो ह्यथर्वणः॥
कलश के कंठ पर कलावा बांधें, उस पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और शुद्ध जल व गंगाजल भरें।
3 ३. कलश में पवित्र वस्तुएं डालना
उपचार #3ॐ गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
कलश के जल में सुपारी, हल्दी की गांठ, दूर्वा, अक्षत और एक सिक्का डालें।
4 ४. आम्रपल्लव व पूर्णपात्र स्थापना
उपचार #4ॐ अश्वत्थे वो निषदनं पर्णे वो वसतिष्कृता।
कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते लगाएं और ऊपर चावल से भरा ढक्कन (पूर्णपात्र) रखें।
5 ५. नारियल स्थापना (Sriphal)
उपचार #5ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
नारियल पर लाल चुनरी या कलावा लपेटकर, उसका मुख अपनी ओर (या ऊपर) रखते हुए पूर्णपात्र पर स्थापित करें।
6 ६. वरुण देव व नवदुर्गा आवाहन
उपचार #6ॐ तत्त्वा यामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदा शास्ते यजमानो हविर्भिः। अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुशंस मा न आयुः प्र मोषीः॥
हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर वरुण देव और माँ शैलपुत्री सहित नवदुर्गा का आवाहन करें।
7 ७. षोडशोपचार पूजन (गंध, पुष्प, धूप, दीप)
उपचार #7ॐ वरुणाय नमः, ॐ श्रीदुर्गायै नमः। गन्धाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि॥
कलश पर रोली-अक्षत लगाएं, पुष्पमाला पहनाएं, धूप-दीप दिखाएं और फल-मिठाई का भोग लगाएं।
8 ८. अखंड ज्योति प्रज्वलन व आरती
उपचार #8ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
अखंड ज्योति प्रज्वलित कर माँ दुर्गा की आरती करें और शैलपुत्री कथा का पाठ करें।
महत्वपूर्ण पूजन नियम, सावधानियां व वर्जित कार्य
- ✦ घटस्थापना सदैव शुभ मुहूर्त (प्रातःकाल अथवा अभिजित मुहूर्त) में ही करें; चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का त्याग करें।
- ✦ नारियल का मुख हमेशा साधक की ओर (या ऊपर की ओर) होना चाहिए, कभी भी पूर्व या अधोमुखी न रखें।
- ✦ कलश को उत्तर-पूर्व (ईशान) कोण में ही स्थापित करें और नौ दिनों तक इसे हिलाएं नहीं।
- ✦ जौ वाले पात्र में प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा जल छिड़कते रहें ताकि हरियाली युक्त जवारे उगें।
🔔 संबंधित चालीसा एवं महाआरती संग्रह
पूजन की पूर्णता हेतु स्तुति पाठ व कर्पूर आरती अवश्य करें।