श्री गणेश पूजन विधि
🗓️ शुभ दिन व मुहूर्त: प्रतिदिन प्रातः, प्रत्येक बुधवार अथवा शुक्ल पक्ष चतुर्थी (विनायक व संकष्टी)
पूजन का महत्व एवं चमत्कारी फल
सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य अथवा देव पूजन से पूर्व प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की पूजा अनिवार्य है। श्री गणेश जी की षोडशोपचार पूजा करने से सभी प्रकार के वास्तु दोष, विद्या में रुकावट, व्यापारिक संकट एवं जीवन के अमंगल का नाश होता है। ऋद्धि-सिद्धि के दाता होने के कारण इनकी उपासना से सुख, समृद्धि एवं बुद्धि का विकास होता है।
सम्पूर्ण पूजन सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
💡 सुझाव: थाली में सामग्री सजाते समय प्रत्येक वस्तु के आगे टिक (✓) लगाएं ताकि कोई सामग्री छूटे नहीं।
आरंभिक शुद्धि, दीप प्रज्वलन एवं संकल्प
१. आसन शुद्धि:
कुश या ऊन के आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
२. आचमन (मुख शुद्धि):
दाहिने हाथ में आचमनी से जल लेकर 3 बार मुख में डालें: 'ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः' बोलें और 'ॐ गोविन्दाय नमः' बोलकर हाथ धो लें।
३. पवित्रीकरण (आत्म शुद्धि मंत्र):
अपने ऊपर एवं पूजा सामग्री पर कुश से जल छिड़कें: 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥'
४. दीप प्रज्वलन व प्रणाम:
दीपक प्रज्वलित कर प्रणाम करें: 'शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥'
५. संकल्प (Sankalpa):
दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प और सिक्का लेकर अपना नाम, गोत्र व मनोकामना का उच्चारण कर जल भूमि पर छोड़ें।
मंत्र, विधि एवं भावार्थ सहित संपूर्ण पूजन विधान
प्रत्येक उपचार को श्रद्धापूर्वक संपन्न करें और साथ में दिए गए वैदिक/पौराणिक मंत्र का उच्चारण करें।
1 १. ध्यानम् (Dhyanam)
उपचार #1गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
हाथ में लाल पुष्प व अक्षत लेकर दोनों आंखें बंद कर भगवान श्री गणेश के मंगलकारी स्वरूप का ध्यान करें और पुष्प उनके चरणों में समर्पित करें।
2 २. आवाहनम् (Avahanam)
उपचार #2ॐ भूर्भुवः स्वः सिद्धिबुद्धिसहिताय श्रीगणेशाय नमः, गणेशमावाहयामि स्थापयामि॥
हाथ जोड़कर आवाहन मुद्रा बनाकर श्री गणेश जी से चौकी पर विराजमान होने की विनम्र प्रार्थना करें।
3 ३. आसनम् (Asanam)
उपचार #3रम्यं सुशोभनं दिव्यं सर्वसौख्यकरं शुभम्। आसनं च मया दत्तं गृहाण गणनायक॥
भगवान को बैठने हेतु चौकी पर लाल पुष्प अथवा अक्षत का पवित्र आसन अर्पित करें।
4 ४. पाद्यम् (Padyam)
उपचार #4ॐ सिद्धिबुद्धिसहिताय श्रीगणेशाय नमः, पाद्यं समर्पयामि।
आचमनी से जल लेकर भगवान के चरणों को प्रक्षालित करने के भाव से ताम्रपात्र में छोड़ें।
5 ५. अर्घ्यम् (Arghyam)
उपचार #5अर्घ्यं गृहाण हेरम्ब गन्धपुष्पाक्षतैर्युतम्। गजानन नमस्तेऽस्तु गृहाण करुणाकर॥
जल में चंदन, पुष्प व अक्षत मिलाकर भगवान के हाथों को धोने हेतु अर्घ्य जल समर्पित करें।
6 ६. आचमनीयम् (Achamaniyam)
उपचार #6सर्वतीर्थसमायुक्तं सुगन्धि निर्मलं जलम्। आचम्यतां मया दत्तं प्रसीद परमेश्वर॥
मुख शुद्धि हेतु आचमनी से एक चम्मच शुद्ध सुगंधित जल अर्पित करें।
7 ७. पंचामृत स्नानम् व शुद्धोदक स्नानम् (Snanam)
उपचार #7पञ्चामृतं मयानीतं पयो दधि घृतं मधु। शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
दूध, दही, घी, शहद और मिश्री के पंचामृत से स्नान कराएं, तत्पश्चात शुद्ध गंगाजल से स्नान कराकर साफ वस्त्र से पोंछें।
8 ८. वस्त्रम् व यज्ञोपवीतम् (Vastram & Janeu)
उपचार #8शीतवातोष्णसंत्राणं लज्जाया रक्षणं परम्। देहालङ्करणं वस्त्रमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥ नवतन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम्। उपवीतं गृहाण त्वं प्रथमं गणनायक॥
भगवान को पीला या लाल वस्त्र (अथवा कलावा) अर्पित करें और दाहिने कंधे से बायीं ओर यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण कराएं।
9 ९. गंधम् व सिंदूरम् (Gandham & Sindoor)
उपचार #9सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥
अनामिका अंगुली से भगवान के मस्तक पर रक्त चंदन व लाल सिंदूर का तिलक लगाएं और अक्षत लगाएं।
10 १०. दूर्वा व पुष्पम् (Durva & Pushpam)
उपचार #10दूर्वाङ्कुरान् सुहरितानमृतान् मङ्गलप्रदान्। आनीतांस्तव पूजार्थं गृहाण गणनायक॥
कम से कम 21 दूर्वा की गांठें गणेश जी के मस्तक या चरणों में चढ़ाएं और लाल गुड़हल की माला पहनाएं।
11 ११. धूपम् (Dhupam)
उपचार #11वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः। आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
उत्तम अगरबत्ती या गुग्गल/धूप जलाकर भगवान को दिखाएं और सुगंधित वातावरण निर्मित करें।
12 १२. दीपम् (Deepam)
उपचार #12साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया। दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापह॥
शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित कर भगवान के समक्ष घुमाएं और चरणों में स्थापित करें।
13 १३. नैवेद्यम् (Naivedyam - Bhog)
उपचार #13शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च। आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्॥
मोदक, बेसन के लड्डू, ऋतुफल व पंचमेवा का भोग लगाएं और भोग के चारों ओर आचमनी से 3 बार जल घुमाएं।
14 १४. ताम्बूलम् व दक्षिणा (Tambulam & Dakshina)
उपचार #14पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्। एलादिचूर्णसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्॥
पान के पत्ते पर लौंग, इलायची, सुपारी और कुछ सिक्के दक्षिणा रखकर अर्पित करें।
15 १५. कर्पूर नीराजनम् / आरती (Aarti)
उपचार #15कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं तु प्रदीपितम्। आरार्तिकमहं कुर्वे पश्य मे वरदो भव॥
कपूर जलाकर 'जय गणेश जय गणेश देवा...' की आरती सपरिवार गाएं और भगवान को आरती दें।
16 १६. प्रदक्षिणा व क्षमा प्रार्थना (Pradakshina & Kshama)
उपचार #16आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
अपने ही स्थान पर 3 बार घूमें, साष्टांग प्रणाम करें और पूजा में जाने-अनजाने हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें।
महत्वपूर्ण पूजन नियम, सावधानियां व वर्जित कार्य
- ✦ श्री गणेश जी को कभी भी तुलसी पत्र (Tulsi) अर्पित न करें। पौराणिक कथा के अनुसार गणेश जी की पूजा में तुलसी वर्जित है।
- ✦ गणेश जी को सिंदूर और दूर्वा (कम से कम 3 या 5 पत्तियों वाली गांठ) अत्यंत प्रिय है, इसे सदैव अर्पित करें।
- ✦ पूजा करते समय मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।
- ✦ अक्षत (चावल) हमेशा साबुत होने चाहिए, टूटे हुए चावल पूजा में कदापि न चढ़ाएं।
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पूजन की पूर्णता हेतु स्तुति पाठ व कर्पूर आरती अवश्य करें।